क्या भारत की अर्थव्यवस्था की हालत ठीक नहीं है? ईरान युद्ध शुरू होने से पहले ही भारत के आठ कोर सेक्टर की वृद्धि दर घटकर आधी रह गई थी। तो युद्ध के असर के बाद हालात क्या होंगे?
ईरान युद्ध से पहले ही भारत की अर्थव्यवस्था की हालत ख़राब हो गई और भारत के आठ कोर सेक्टरों की विकास दर फरवरी में काफ़ी कम हो गई। सरकारी आँकड़ों में ही कहा गया है कि यह दर सिर्फ़ 2.3 प्रतिशत रह गई। यह तीन महीनों का सबसे कम स्तर है। ये आँकड़े वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी किए। विकास दर की रफ़्तार धीमी पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने से पहले ही हो चुकी थी।
आठ मुख्य उद्योगों का इंडेक्स अर्थव्यवस्था के बुनियादी ढांचे को दिखाता है। इनमें कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, उर्वरक, स्टील, सीमेंट और बिजली शामिल हैं। ये आठ उद्योग कुल औद्योगिक उत्पादन का 40.27 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं।
जनवरी में कोर सेक्टर का विकास दर 4.7% थी
जनवरी में यह विकास दर 4.7 प्रतिशत थी, लेकिन फरवरी में यह आधी से भी कम होकर 2.3 प्रतिशत रह गई। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार आईसीआरए की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, 'पश्चिम एशिया संकट शुरू होने से पहले ही भारत के मुख्य उद्योगों का उत्पादन तीन महीनों के सबसे कम स्तर पर पहुंच गया था। जनवरी से फरवरी में विकास दर आधी हो गई और यह लगभग सभी क्षेत्रों में देखा गया। सिर्फ सीमेंट और स्टील में 3.5 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ोतरी हुई।'
किस क्षेत्र में फरवरी में कैसी रफ़्तार
- सीमेंट: 9.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जो सबसे अच्छा प्रदर्शन था। लेकिन यह चार महीनों का सबसे कम स्तर है। पिछले तीन महीनों से दहाई अंक में बढ़ रहा था, पर अब कम हुआ।
- स्टील: 7.2 प्रतिशत बढ़ा है। यह तीन महीनों का सबसे कम है, लेकिन फिर भी अच्छा प्रदर्शन।
- उर्वरक: 3.4 प्रतिशत बढ़ा, जो पांच महीनों का सबसे कम है। पिछले साल फरवरी में यह 10.2 प्रतिशत था।
- कोयला: यह 2.3 प्रतिशत बढ़ा। लेकिन तीन महीनों का सबसे कम है।
- बिजली: सिर्फ 0.5 प्रतिशत बढ़ा, तीन महीनों का सबसे कम।
- कच्चा तेल: 5.2 प्रतिशत घटा, लगातार छठे महीने में गिरावट आई।
- प्राकृतिक गैस: 5 प्रतिशत घटा, लगातार 20वें महीने में गिरावट आई।
- पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स: 1 प्रतिशत घटा। इस वित्त वर्ष में 11 महीनों में से 6 में गिरावट आई।
रिपोर्ट के अनुसार अदिति नायर ने कहा कि घरेलू स्तर पर तेल, गैस और पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन कई महीनों से घट रहा था। अब ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से सप्लाई और एक्सपोर्ट में और समस्या आई है। इससे ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं और उपलब्धता कम हो सकती है। इससे वित्त वर्ष 2027 में भारत की जीडीपी विकास दर पर नकारात्मक असर पड़ेगा, भले ही घरेलू मांग मजबूत हो।
मार्च में स्थिति और ख़राब होगी?
मार्च में स्थिति और खराब होने की आशंका है क्योंकि युद्ध से सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक यानी 11 महीनों का कुल विकास दर 2.9 प्रतिशत रहा है।
ये आँकड़े अर्थव्यवस्था के लिए चिंता की बात हैं क्योंकि मुख्य उद्योग बुनियादी ढांचे, निर्माण और ऊर्जा से जुड़े हैं। सरकार और अर्थशास्त्री अब मार्च के आंकड़ों और युद्ध के असर पर नजर रखे हुए हैं।