सरकार ने खाने के तेल के पैक के साइज फिर से स्टैंडर्ड कर दिए हैं। उपभोक्ताओं को भ्रम से बचाने के लिए 3 महीने में अब बाजार में 650 ग्राम, 700 ग्राम, 810 ग्राम, 850 ग्राम या 870 ग्राम जैसे अजीब साइज के पैक नहीं मिलेंगे।
सरकार ने आम लोगों को राहत देते हुए खाने के तेल के पैक के साइज फिर से स्टैंडर्ड कर दिए हैं। अब बाजार में 650 ग्राम, 700 ग्राम, 810 ग्राम, 850 ग्राम या 870 ग्राम जैसे अजीब साइज के पैक नहीं मिलेंगे। ऐसे पैक होने से यह भ्रम रहता था कि आखिर अलग-अलग कंपनियों के कौन से पैक महंगे या कौन से सस्ते होंगे। यानी अनजाने में ही महंगे पैक खरीद का डर रहता था। लेकिन अब जो नये नियम आये हैं उससे सीधे आपकी जेब के पैसे बच पाएँगे। अब पैक साइज़ 200 ग्राम, 500 ग्राम, 1 किलो, 2 किलो, 3 किलो, 4 किलो, 5 किलो, 15 किलो और 20 किलो में मिलेंगे।
उपभोक्ता मामलों के विभाग ने एक एडवाइजरी जारी करके सभी कंपनियों, पैकर्स और आयातकर्ताओं को तीन महीने का समय दिया है। तीन महीने बाद केवल स्टैंडर्ड साइज के पैक ही बाजार में बिक सकेंगे।
स्टैंडर्ड पैक साइज से आपको कैसे फायदा?
मान लीजिए एक कंपनी 1 लीटर तेल 180 रुपये में दे रही है। दूसरी कंपनी 850 ml का पैक 160 रुपये में बेच रही है। अब आप जल्दी में समझ ही नहीं पाते कि असल में कौन सा सस्ता पड़ रहा है। कई बार महंगा पैक सस्ता लगता है और वह महंगा निकल जाता है। दुकानदार भी कन्फ्यूज कर देते थे। महिलाओं और आम उपभोक्ताओं को बहुत परेशानी हो रही थी।
कौन-कौन से साइज होंगे वैध?
सरकार ने पाम ऑयल, सोयाबीन, सूरजमुखी, सरसों, मूंगफली, तिल, राइस ब्रान, कॉटनसीड, कॉर्न ऑयल आदि जैसे खाने के तेलों के लिए ये स्टैंडर्ड पैक साइज तय किए हैं-
- 200 ग्राम / 200 मिली
- 500 ग्राम / 500 मिली
- 1 किलो / 1 लीटर
- 2 किलो / 2 लीटर
- 3 किलो / 3 लीटर
- 4 किलो / 4 लीटर
- 5 किलो / 5 लीटर
- 15 किलो / 15 लीटर
- 20 किलो / 20 लीटर
- 200 ग्राम या मिलीलीटर से छोटे पैक पर कोई पाबंदी नहीं है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
2023 में सरकार ने पैक साइज की पाबंदी ढीली कर दी थी, जिसके बाद कंपनियां तरह-तरह के अजीब साइज के पैक लाने लगीं। इससे ग्राहकों को बहुत परेशानी हो रही थी। लोग कीमतों की तुलना नहीं कर पाते थे और अक्सर कन्फ्यूजन होता था। 20 मई को उपभोक्ता सचिव निधि खरे की अध्यक्षता में हुई बैठक में उद्योग और उपभोक्ता संगठनों ने इस समस्या पर चर्चा की। सभी ने स्टैंडर्ड साइज वापस लाने पर सहमति जताई।
किसे फायदा होगा?
उपभोक्ता वॉयस के चीफ एक्जीक्यूटिव आशिम सान्याल ने कहा, 'यह फैसला उपभोक्ताओं के लिए बहुत अच्छा है। अब लोग आसानी से कीमतों की तुलना कर सकेंगे और सही मूल्य समझ पाएंगे।' मिंट की रिपोर्ट के अनुसार इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुधाकर देसाई ने कहा कि पिछले तीन साल में गैर-स्टैंडर्ड पैक आने से बाजार बिगड़ गया था। अब रिटेल दुकानों पर व्यवस्था वापस ठीक हो जाएगी।छोटे तेलों पर छूट
नारियल तेल, जैतून तेल जैसी कम इस्तेमाल होने वाली छोटी मात्रा के तेलों पर यह नियम लागू नहीं होगा। उन्हें सिर्फ यूनिट प्राइस यानी प्रति किलो या प्रती लीटर कीमत दिखानी होगी।
भारत में खाने के तेल की स्थिति
भारत खाने के तेल का बहुत बड़ा बाजार है। देश अपनी ज़रूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। 2022-23 में खपत 28.9 मिलियन टन थी। 2025-26 में आयात 16.65 मिलियन टन रहा। औसतन हर भारतीय अब साल में करीब 19.7 किलो तेल इस्तेमाल करता है। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह बाजार 2030 तक और बढ़कर 6.49 बिलियन डॉलर का हो जाएगा। बहरहाल, कंपनियों को 5 सितंबर 2026 तक पुराने साइज के स्टॉक खत्म करके नए स्टैंडर्ड साइज के पैक लाने होंगे। यह फैसला आम घरेलू महिलाओं और उपभोक्ताओं के लिए बड़ा राहत भरा कदम माना जा रहा है, क्योंकि अब तेल खरीदते समय उन्हें पहले जितनी दिक्कत नहीं होगी।