भारत में इलेक्ट्रिक वाहन यानी ईवी खरीदने वालों के लिए एक बुरी ख़बर है। चीन ने एक नीतिगत बदलाव किया है, जिससे भारत में ईवी की बैटरी महंगी हो जाएगी और इसका नतीजा यह होगा कि इलेक्ट्रिक कारों, स्कूटरों और बाइकों की कीमतें बढ़ सकती हैं। यह जानकारी मिंट अखबार की एक रिपोर्ट में छपी है। तो सवाल है कि क्या यह भारत के खिलाफ चीन की नीति का हिस्सा है?

रिपोर्ट के अनुसार चीन सरकार ने 8 जनवरी को फ़ैसला लिया कि लिथियम-आयन बैटरी पर निर्यात टैक्स रिबेट यानी एक तरह की टैक्स में छूट को 9% से घटाकर 6% कर दिया जाएगा। यह बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। साथ ही, अगले एक साल में यानी 2027 तक यह रिबेट पूरी तरह खत्म कर दी जाएगी।
भारत में ज़्यादातर ईवी कंपनियाँ बैटरी चीन से आयात करती हैं। BYD और CATL जैसे बड़े सप्लायर से बैटरी आती है। बैटरी महंगी होने से ईवी की क़ीमतों पर बड़ा असर इसलिए हो सकता है क्योंकि बैटरी की क़ीमत ईवी की कुल लागत का एक तिहाई से ज्यादा हिस्सा होती है। अगर बैटरी महंगी हुई तो कंपनियों की कमाई पर असर पड़ेगा। या तो वे अपना मुनाफा कम करेंगी या ग्राहकों पर अतिरिक्त खर्च डालकर वाहन की कीमत बढ़ा देंगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, जो कंपनियाँ छोटे-मोटे या अल्पकालिक कॉन्ट्रैक्ट से बैटरी खरीदती हैं, उन पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। एक कंपनी के अधिकारी ने मिंट को बताया कि अगले दो हफ्तों में बाजार पर इसका असर दिखने लगेगा। कंपनियाँ अभी से ज़्यादा से ज़्यादा स्टॉक जमा करने की कोशिश कर रही हैं ताकि रिबेट घटने से पहले सस्ती बैटरी ले सकें।

पिछले एक साल में लिथियम की क़ीमतें भी बहुत बढ़ गई हैं। चीन का यह फ़ैसला बैटरी की लागत को और ऊपर ले जाएगा।

भारत में ईवी को पहले से ही पेट्रोल-डीजल वाहनों पर टैक्स में कम फ़ायदा मिल रहा है, क्योंकि सरकार ने कुछ बदलाव किए हैं। ऐसे में क़ीमत बढ़ने से ईवी की बिक्री पर असर पड़ सकता है।

भारत सरकार ईवी को बढ़ावा देने के लिए PM E-DRIVE जैसी स्कीम चला रही है, लेकिन सब्सिडी धीरे-धीरे कम हो रही है। अब चीन के इस क़दम से ईवी महंगे होने का ख़तरा बढ़ गया है। विशेषज्ञ कहते हैं कि भारत को अपनी बैटरी बनाने पर ज़्यादा जोर देना होगा ताकि चीन पर निर्भरता कम हो।
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क्या यह भारत के खिलाफ चीन की नीति का हिस्सा है?

यह मुख्य रूप से चीन की आंतरिक आर्थिक नीति का हिस्सा लगता है। चीन ईवी इंडस्ट्री में ओवरसप्लाई से जूझ रहा है, सब्सिडी कटौती का उद्देश्य इंडस्ट्री को मजबूत बनाना और सरकारी खर्च कम करना है। 2009-2023 में चीन ने ईवी पर 230 बिलियन डॉलर सब्सिडी दी, लेकिन अब इसे चरणबद्ध तरीके से खत्म कर रहा है। कुल मिलाकर टैक्स छूट में कटौती सिर्फ भारत को लेकर नहीं है, बल्कि वैश्विक है।

यह बदलाव वैश्विक स्तर पर भी चर्चा में है। चीन ने सोलर प्रोडक्ट्स पर भी रिबेट खत्म करने का फ़ैसला लिया है। लेकिन भारत के लिए बैटरी सबसे अहम है क्योंकि ईवी मार्केट तेजी से बढ़ रहा है। अगर क़ीमतें बढ़ीं तो आम लोग ईवी खरीदने से हिचकिचा सकते हैं। कंपनियाँ अब यह देख रही हैं कि कितना खर्च ग्राहक पर डाला जाए। आने वाले दिनों में ईवी की नई क़ीमतों का ऐलान हो सकता है।