होर्मुज में बढ़ते तनाव और यूएस-ईरान वार्ता पर अनिश्चितता से कच्चे तेल के दाम फिर से बेतहाशा बढ़े हैं। क्या यह संकट और गहराएगा?
दुनिया भर में तेल के दाम एक बार फिर तेजी से बढ़ गए हैं। इसका कारण होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमले, अमेरिका द्वारा ईरानी जहाज जब्त करना और अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर दोनों तरफ़ से आ रहे मिले-जुले और उलटे संदेश हैं।
एशिया के बाजार में सोमवार को ब्रेंट क्रूड 7 प्रतिशत से ज्यादा उछल गया। बाद में थोड़ी गिरावट आई, लेकिन भारतीय समय के अनुसार दोपहर दो बजे तक 95.9 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। शुक्रवार को यह 90.40 डॉलर के आसपास था। ब्रेंट क्रूड को ही दुनिया का मुख्य मानक माना जाता है।
क्या हुआ जो कीमतें बढ़ीं?
तेल बाज़ार में यह ताज़ा हलचल होर्मुज में हलचल बढ़ने के बाद आई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नौसेना ने एक ईरानी झंडे वाला कार्गो जहाज जब्त कर लिया। यह जहाज अमेरिका के लगाए गए ब्लॉकेड यानी नाकेबंदी को चकमा देने की कोशिश कर रहा था। इसके पहले ब्रिटेन के यूके एमटीओ सेंटर ने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट में दो जहाजों पर हमले हुए। एक टैंकर पर ईरानी गनबोट्स ने गोलीबारी की, जबकि दूसरे कंटेनर जहाज पर अज्ञात गोला लगा। ईरान ने शुक्रवार को कहा था कि स्ट्रेट पूरी तरह खुला है, लेकिन 24 घंटे बाद ही अपना रुख बदल लिया। ईरान ने अमेरिका के ब्लॉकेड को इसकी वजह बताया।
वार्ता कहाँ तक पहुँची?
ट्रंप ने रविवार को कहा कि अमेरिकी टीम सोमवार को पाकिस्तान जाएगी और ईरानी अधिकारियों से दूसरे दौर के युद्धविराम के लिए वार्ता करेगी। लेकिन ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA ने साफ़ कहा कि तेहरान इन वार्ताओं में हिस्सा नहीं लेगा। ईरान ने अमेरिकी ब्लॉकेड और वाशिंगटन की बहुत ज्यादा मांगों को वजह बताया।
अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम बुधवार को ख़त्म होने वाला है। अगर दोनों पक्ष इसे बढ़ाने पर सहमत नहीं हुए तो युद्धविराम खत्म हो जाएगा और फिर तेल के दाम के और भी ज़्यादा बढ़ने की आशंका होगी।
इस महीने की शुरुआत में इस्लामाबाद में पहले दौर की बातचीत हुई थी, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। अब दूसरा दौर भी अनिश्चित लग रहा है।
पाकिस्तान की मुश्किल बढ़ गई
ईरान ने पाकिस्तान में होने वाली दूसरी वार्ता में दिलचस्पी नहीं दिखाई है। ऐसे में पाकिस्तान मुश्किल स्थिति में फंस गया है। इस्लामाबाद को मध्यस्थ की भूमिका निभानी थी, लेकिन अब बातचीत शुरू होने से पहले ही अनिश्चित हो गई है।
पाकिस्तानी मीडिया अब सरकार से सवाल पूछ रहा है कि क्या कोई ठोस फायदा निकाला जा सका। अप्रैल 22 की डेडलाइन नजदीक आ रही है और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट: ईरान का सबसे ताकतवर हथियार
होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के कुल तेल और गैस का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। ईरान ने दशकों से इसे बंद करने की धमकी दी है, लेकिन अब पहली बार इसे प्रभावी रूप से बंद कर दिया है।
अमेरिका का नौसैनिक ब्लॉकेड और ईरान का नियंत्रण, दोनों एक-दूसरे के सामने हैं। कुछ जहाज अभी भी गुजर रहे हैं। शनिवार को 19-20 जहाज गुजरे, जो सामान्य औसत 138 जहाज प्रतिदिन से बहुत कम है।
ईरान अब कह रहा है कि वह स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण नहीं छोड़ेगा। शांति वार्ता में भी उसने स्ट्रेट पर अपनी संप्रभुता को अपनी मांगों में शामिल किया है।
ईरान की टोल लगाने की योजना
ईरान ने घोषणा की है कि स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल टैंकरों से 1 डॉलर प्रति बैरल का टोल वसूलेगा। यह रकम क्रिप्टोकरेंसी में ली जाएगी।ईरान का कहना है कि इससे वह हथियारों की तस्करी रोक सकेगा और सीजफायर का उल्लंघन नहीं होगा। अगर ईरान लंबे समय तक स्ट्रेट पर नियंत्रण रख पाया तो उसे अरबों डॉलर का फायदा होगा और उसकी अंतरराष्ट्रीय हैसियत भी बढ़ेगी।
दुनिया पर असर
बहरहाल, इस ताज़ा संकट से पूरी दुनिया में तेल महंगा हो गया है। कई सरकारों को आपातकालीन तेल स्टॉक निकालना पड़ा है और ऊर्जा बचाने के उपाय करने पड़े हैं।
ईरान ने स्ट्रेट को अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। अगर स्थिति नहीं सुधरी तो पेट्रोल-डीजल, बिजली और कई चीजों की कीमतें और बढ़ सकती हैं। अब अगले कुछ दिनों में स्थिति साफ होगी। अगर युद्धविराम नहीं बढ़ा तो तेल और महंगा हो सकता है।