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जीडीपी वृद्धि दर 4.7%, सुस्ती से बाहर निकलने का संकेत?

भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर अक्टूबर-दिसंबर के तिमाही में 4.7 प्रतिशत थी। नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफ़िस ने यह जानकारी दी है। यह विकास दर तमाम एजेन्सियों के पूर्वानुमानों के अनुकूल ही है।
यह जीडीपी वृद्धि दर ऐसे समय आई है जब सरकार ने पूरे वित्तीय वर्ष के लिए 5 प्रतिशत विकास की उम्मीद जताई और वित्तीय वर्ष अब ख़त्म होने को है। यह वृद्धि दर 2008-09 के बाद से अब तक की न्यूनतम दर है।
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कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अब सुस्ती से बाहर निकलना शुरू करने ही वाली है। जुलाई-सितंबर के लिए जीडीपी वृद्धि दर को 4.5 प्रतिशत से बढ़ा कर 5.1 प्रतिशत कर दिया गया था।
इसके पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि ‘अर्थव्यवस्था में विकास की नई कोपलें फूटने लगी हैं।’

इसके पहले सेंट्रल स्टैटिस्टिक्स ऑफ़िस (सीएसओ) ने कहा था कि चालू वित्तीय वर्ष में जीडीपी वृद्धि दर 5 प्रतिशत रहेगी। पिछले वित्तीय वर्ष में यह 6.8 प्रतिशत थी। 
एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर बीते तीन साल में लगातार गिरी है। भारत की जीडीपी वृद्धि दर जहाँ 2016 में 8 प्रतिशत थी, 2018 में गिर कर 6.8 प्रतिशत हो गई। लेकिन 2019 में यह 5 प्रतिशत तक पहुँच जाएगी।

क्या होती है मंदी? 

दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकनॉमिक्स के प्रोफ़ेसर पम्मी दुआ ने अपने एक शोध पत्र में कहा कि जब आर्थिक गतिविधियाँ इतनी कम हो जाएँ कि उसका असर दूसरी चीजों पर पड़ने लगे तो मान लेना चाहिए कि मंदी शुरू हो गई है। इसे हम ऐसे समझ सकते हैं। जब आर्थिक गतिविधियाँ कम होती हैं तो लोगों के खर्च करने की क्षमता कम होती है, इससे माँग कम होती है, मांग कम होने से उत्पादन कम होता है, उत्पादन कम होने से दूसरे लोगों की आय कम होती है और यह चक्र चलने लगता है।
क्या भारत में मंदी आ चुकी है, यह सवाल लाज़िमी है।  हम इसे जीडीपी के लिहाज से देखें तो भारत में जीडीपी वृद्धि दर लगातार गिरती आ रही है। वित्तीय वर्ष 2018-19 की दूसरी छमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत से गिर कर 7 प्रतिशत पर आ गई, उसके बाद की छमाही यानी वित्तीय वर्ष 2019-20 की पहली छमाही में यह 4.5 प्रतिशत पर आ गई।
इसके पहले चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 5 प्रतिशत थी। दूसरी तिमाही में कुल मिला कर सकल घरेलू उत्पाद 49.64 लाख करोड़ रुपए दर्ज किया गया। सबसे तेज़ गति से विकास कृषि, वाणिकी और मत्स्य पालन में रहा, जहाँ 7.4 प्रतिशत वृद्धि देखी गई। लेकिन सबसे बुरा हाल खनन क्षेत्र का रहा, जिसमें विकास दर -4.4 प्रतिशत देखी गई। इसी तरह उत्पादन क्षेत्र में -1.1 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई। बिजली, गैस, जल आपूर्ति में 2.3 प्रतिशत तो निर्माण में 4.2 प्रतिशत विकास देखा गया।  
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