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20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज से आप तक कितना पहुँचेगा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉकडाउन के प्रभावों से अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए जिस 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज का एलान किया, वह कितना सच है, उसका कितना पैसा आम जनता तक पहुँचेगा और उससे पस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को कितना सहारा मिलेगा, इस पर चर्चा होना स्वाभाविक है। 
पहला सवाल तो यह है कि क्या यह पैकेज वाकई 20 लाख करोड़ रुपए का है। स्वयं नरेंद्र मोदी ने इस पैकेज का एलान करते हुए कहा था कि इसमें से कुछ पैसे भारतीय रिज़र्व बैंक पहले ही दे चुका है।
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रिज़र्व बैंक ने कितना दिया है?

कितना है वह पैसा? रिज़र्व बैंक ने फ़रवरी, मार्च और अप्रैल में अलग-अलग समय बैंकों, वित्तीय कंपनियों और म्युचुअल फंडों को जो पैसे देने का एलान किया, वह कुल मिला कर 8.04 लाख करोड़  रुपए है। इस रकम का बड़ा हिस्सा तो सिर्फ नक़दी संकट से बचने के लिए अर्थव्यवस्था में डालने के लिए है। 

पहले पैकेज का 1.70 लाख करोड़

प्रधानमंत्री के लॉकडाउन का एलान करने के एक दिन बाद ही वित्त मंत्री ने एक विशेष पैकेज की घोषणा की थी। इसके तहत 1.70 लाख करोड़ रुपए की रकम आम जनता को दी जानी थी। नए पैकेज में इस पैसे को भी जोड़ दिया गया है। यानी प्रस्तावित पैकेज से यह रकम भी घटा दी जानी चाहिए। 
रिज़र्व बैंक के 8.04 लाख करोड़ और पहले पैकेज के 1.70 लाख करोड़ रुपए को 20 लाख करोड़ से घटाया जाए तो कुल मिला कर 10.26 लाख करोड़ रुपए की रकम बैठती है। यानी प्रधानमंत्री ने जिस 20 लाख करोड़ रुपए के पैकेज का एलान किया है, उसका एक हिस्सा वह दे चुके हैं और जो रकम अब मिलने वाली है वह 10.26 लाख करोड़ रुपए की है।
आसान भाषा में कहा जाए तो प्रधानमंत्री ने जिस आर्थिक पैकेज की घोषणा मंगलवार को की है, वह सिर्फ 10.26 लाख करोड़ रुपए का है, 20 लाख करोड़ रुपए का नहीं।

सरकार को कितने पैसे चाहिए?

इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक ख़बर में कहा है कि सरकार ने इस साल बॉन्ड मार्केट से 12 लाख करोड़ रुपए के क़र्ज़ लेने की योजना बनाई है। लेकिन इसमें से 7.8 लाख करोड़ रुपए की रकम पिछले वित्तीय वर्ष का ही है। यानी सरकार बॉन्ड मार्केट से नए खर्च के लिए सिर्फ 4.20 लाख करोड़ रुपए लेगी।
इसका मतलब साफ़ है कि इस नए आर्थिक पैकेज के लिए सरकार सिर्फ 4.20 लाख करोड़ रुपए का क़र्ज़ लेने जा रही है। इससे यह निष्कर्ष भी निकलता है कि सरकार दरअसल इस पैकेज में इतनी ही रकम डालेगी, क्योंकि  पैसे के और जुगाड़ का तो कोई रास्ता बचता ही नहीं है। बजट पारित हो चुका है, इस साल इसमें और कुछ सरकार नहीं कर सकती है। सरकार नए पैकेज के लिए यह पैसे उधार लेगी। यह रकम सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 2.1 प्रतिशत ही है।
कुल मिलाकर स्थिति यह है कि 47 दिन के लॉकडाउन के प्रभावों से उबारने के लिए सरकार 4.20 लाख करोड़ रुपए अर्थव्यवस्था में झोंकने जा रही है।

बैंक

यह रकम भी कोई छोटी नहीं है। अर्थव्यवस्था में जोड़ा जाने वाला हर रुपया मल्टीप्लाइ होता है, यानी उसका असर कई गुणा होता है, क्योंकि वह कई हाथों से गुजरता है और सबको इससे फ़ायदा मिलता जाता है। 
इसकी पूरी संभावना है कि इस रकम का बड़ा हिस्सा बैंकों को जाए। एक मोटे अनुमान के मुताबिक़, बैंकों को अलग-अलग क्षेत्रों से मिलने वाले पैसे में 10 प्रतिशत की कमी हुई है, सरकार को इसी अनुपात में पैसे देने होंगे।
इसके अलावा सरकार बैंकों को रिकैपिटलाइज़ कर सकती है, यानी सरकारी बैंकों में पूंजी निवेश बढ़ाया जा सकता है। सरकारी बैंक उस पैसे का इस्तेमाल नए क़र्ज़ देने में करेंगे।

क्या मिलेगा एमएसएमई को?

प्रधानमंत्री ने नए पैकेज का एलान करते वक़्त ही कह दिया था कि मझोले-लघु-सूक्ष्म उद्यम क्षेत्र को पैसे दिए जाएंगे। यह रकम कितनी होगी, यह तो अभी पता नहीं। लेकिन इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक ख़बर में कहा है कि इस विभाग के मंत्री नितिन गडकरी ने पहले ही एक पैकेज की रूपरेखा बना रखी है, जो लगभग एक लाख करोड़ रुपए की होगी।
लेकिन यहाँ बैंकों और सरकार के कामकाज को थोड़ा रुक कर समझना होगा। सरकार एमएसएमई को सीधे पैसे नहीं देती है, वह पैसे बैंक और वित्तीय संस्थाएँ देती हैं। सरकार सिर्फ इतना करती है कि बैंकों को क़र्ज़ देते समय एमएसएमई के उद्यम की ओर से गारंटी देती है।
सरकार जो पैसे देने जा रही है वह आईसीयू में बेहोश पड़े रोगी को दवा देने के समान ही है। उस दवा से रोगी ठीक हो जाएगा और बाहर निकल कर चलने लगेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है।

पहले पैकेज का हिस्सा

सरकार ने पहले पैकेज में जो 1.70 लाख करोड़ का एलान किया था, उसमें से 61,380 करोड़ रुपए की रकम सीधे खाते में डालने की थी और वह भी तीन महीने में। वह रकम इस नए पैकेज में जुड़ा हुआ है, उसका तीन महीना अभी पूरा भी नहीं हुआ है।
इसी तरह पीएम किसान फंड में 3,000 करोड़ रुपए देने जाने हैं, पर वह तो पहले के पैकेज का हिस्सा है, जिसकी घोषणा पिछले साल के बजट में ही की गई थी। बाद में सरकार ने वह पैसा किसानों के खाते में डालना बंद कर दिया था।
अंतर सिर्फ इतना है कि अब वह रकम किसानों के खाते में डाली जाएगी। एक साल पहले के बजट के पैसे को इसी पैकेज में जोड़ दिया गया। 
इसी तरह सरकार ने ग़रीब महिलाओं, विधवाओं को हर महीने 500 रुपए देने की स्कीम पहले ही चालू की थी। इसके तहत 10,000 करोड़ रुपए दिए जाने हैं। वह भी इसी पैकेज में जोड़ दिया गया गया है। 

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