आयकर विभाग ने सोमवार को देशभर में कथित फ़र्ज़ी कर कटौती और छूट के दावों के ख़िलाफ़ एक बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया है। यह कार्रवाई उन व्यक्तियों और संस्थाओं के ख़िलाफ़ है, जो आयकर रिटर्न यानी आईटीआर में फ़र्ज़ी दावों के ज़रिए कर चोरी में लिप्त पाए गए हैं। विभाग ने 200 से अधिक स्थानों पर छापेमारी की, जिसमें विशेष रूप से कर्मचारी, बहुराष्ट्रीय कंपनियों यानी एमएनसी, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों यानी पीएसयू, सरकारी निकायों, शैक्षणिक संस्थानों और उद्यमियों के दावों पर फोकस किया गया है।

कार्रवाई की वजह क्या?

आयकर विभाग ने इस कार्रवाई को आयकर अधिनियम, 1961 के तहत लाभकारी प्रावधानों के दुरुपयोग के बाद शुरू किया। विभाग ने एआई उपकरणों, तीसरे पक्ष से मिले वित्तीय डेटा और जमीनी खुफिया जानकारी का उपयोग करके संदिग्ध दावों की पहचान की। जांच में पाया गया कि कई करदाता, खासकर वेतनभोगी कर्मचारी, पेशेवर मध्यस्थों की मदद से फर्जी कटौतियों का दावा कर रहे थे, जिसमें मकान किराया भत्ता यानी एचआरए, राजनीतिक चंदा, शिक्षा ऋण ब्याज, स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम और गंभीर बीमारियों के लिए चिकित्सा व्यय शामिल हैं।
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केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी सीबीडीटी के एक बयान के अनुसार, 'जांच में संगठित रैकेट का खुलासा हुआ है, जिसमें कुछ आईटीआर तैयार करने वाले और मध्यस्थ फर्जी कटौतियों और छूट के दावों के साथ रिटर्न दाखिल कर रहे थे। कुछ मामलों में, करदाताओं के नाम पर फर्जी टीडीएस रिटर्न जमा करके अत्यधिक रिफंड का दावा किया गया।'

80जीजीसी और अन्य प्रावधानों का दुरुपयोग

इस अभियान का एक प्रमुख फोकस आयकर अधिनियम की धारा 80जीजीसी के तहत फर्जी दावों पर है, जो पंजीकृत राजनीतिक दलों या निर्वाचन ट्रस्ट को दिए गए चंदे के लिए कटौती की अनुमति देता है। 

जांच में पाया गया कि कई इंटरमीडियरी फर्जी चंदे की व्यवस्था कर रहे थे, जिनमें कुछ मामलों में फंड को काल्पनिक संगठनों के माध्यम से भेजा गया, ताकि करदाताओं की कर देनदारी को कम दिखाया जा सके।

इसके अलावा धारा 10(13ए) यानी मकान किराया भत्ता, 80ई यानी शिक्षा ऋण ब्याज, 80डी यानी स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम, 80ईई और 80ईईबी (पहले घर और इलेक्ट्रिक वाहन ऋण ब्याज), 80जी यानी परोपकारी दान, 80जीए यानी वैज्ञानिक अनुसंधान, और 80डीडीबी यानी गंभीर बीमारी उपचार जैसी धाराओं के तहत भी दुरुपयोग की जानकारी मिली। कई मामलों में, करदाताओं ने बिना सही दस्तावेज के इन कटौतियों का दावा किया।

कर्मचारियों पर असर

इस कार्रवाई का प्रभाव विशेष रूप से वेतनभोगी कर्मचारियों पर पड़ा है, जिनमें एमएनसी, पीएसयू, सरकारी निकायों और निजी क्षेत्रों के कर्मचारी शामिल हैं। विभाग ने पाया कि कुछ मामलों में, करदाताओं को उनके ज्ञान के बिना फर्जी दावे किए गए, जिसमें जाली ईमेल आईडी का उपयोग करके आईटीआर दाखिल किया गया। ऐसे मामलों में, मध्यस्थों ने कमीशन के बदले बढ़े हुए रिफंड का वादा करके कर्मचारियों को इस रैकेट में शामिल किया। सीबीडीटी के बयान में कहा गया, "वेतनभोगी व्यक्तियों को 5 से 10 प्रतिशत कमीशन के बदले फर्जी दावों के लिए लुभाया गया। कई मामलों में, ट्यूशन फीस, चिकित्सा व्यय और राजनीतिक चंदे के लिए फर्जी बिल दिए गए।'
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आयकर विभाग का अभियान

आयकर विभाग ने पिछले एक साल में संदिग्ध करदाताओं को उनके रिटर्न को संशोधित करने और सही कर का भुगतान करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए व्यापक आउटरीच प्रयास किए। इनमें एसएमएस और ईमेल सलाह, साथ ही कैंपस और ऑफ़-कैंपस फिजिकल आउटरीच कार्यक्रम शामिल थे। नॉन-इंट्रूसिव यूज ऑफ़ डेटा टू गाइड एंड एनेबल अभियान के तहत, विभाग ने करदाताओं को पहले विश्वास करने की नीति अपनाई और उन्हें बिना तत्काल दंड के रिटर्न संशोधित करने का अवसर दिया।

इसके परिणामस्वरूप पिछले चार महीनों में लगभग 40,000 करदाताओं ने अपने रिटर्न को अपडेट किया और 1,045 करोड़ रुपये की फर्जी दावों को स्वेच्छा से वापस ले लिया। हालाँकि, जिन करदाताओं ने इस अवसर का लाभ नहीं उठाया, उनके ख़िलाफ़ अब सख़्त कार्रवाई की जा रही है।
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कहाँ कहाँ हुई छापेमारी?

विभाग ने महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली, गुजरात, पंजाब और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में तलाशी और जब्ती अभियान चलाए। इन अभियानों में विभिन्न समूहों और संस्थाओं द्वारा फर्जी दावों के सबूत मिले। एक मामले में, कई शहरों में संचालित एक संगठित सिंडिकेट ने 1,045 करोड़ रुपये के फर्जी दावे वापस लिए। विभाग ने चेतावनी दी है कि फर्जी दावों में शामिल करदाताओं को आयकर अधिनियम की धाराओं के तहत दंड, ब्याज और यहां तक कि मुक़दमों का सामना करना पड़ सकता है।

आयकर विभाग ने साफ़ किया है कि यह कार्रवाई कर चोरी को रोकने और वैध कटौती प्रावधानों के दुरुपयोग को सीमित करने के लिए उसकी प्रतिबद्धता का हिस्सा है। विभाग ने करदाताओं को सलाह दी है कि वे अपने रिटर्न की समीक्षा करें, खासकर यदि कटौतियां बिना सही दस्तावेज के दावा की गई हों। इस अभियान ने करदाताओं और मध्यस्थों को एक कड़ा संदेश दिया है कि फर्जी दावों को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।