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खुदरा महंगाई फिर बढ़ी, तीन माह के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँची

खुदरा महंगाई जनवरी में फिर से बढ़ गई। यह तीन महीने के उच्च स्तर 6.52 प्रतिशत पर पहुँच गई है। यह दिसंबर महीने में एक साल के निचले स्तर 5.72 प्रतिशत पर आ गई थी। दिसंबर का यह आँकड़ा रिज़र्व बैंक द्वारा तय महंगाई की ऊपरी सीमा से कम था, लेकिन जनवरी में फिर से यह पार कर गया है। 

भारतीय रिजर्व बैंक ने मार्च 2026 को समाप्त होने वाली पाँच साल की अवधि के लिए खुदरा मुद्रास्फीति को 2 प्रतिशत के मार्जिन के साथ 4 प्रतिशत पर बनाए रखने का लक्ष्य रखा है। यानी सीधे कहें तो महंगाई को 2-6 फ़ीसदी के दायरे में रखने का लक्ष्य है। लेकिन यह लक्ष्य पाया जाता हुआ नहीं दिखता है। नवंबर और दिसंबर 2022 को छोड़ दिया जाए तो खुदरा मुद्रास्फीति जनवरी 2022 से आरबीआई के 6 प्रतिशत की ऊपरी सीमा के पार बनी हुई है।

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उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति जनवरी 2022 में 6.01 प्रतिशत थी। सितंबर महीने की खुदरा महंगाई का जब आँकड़ा आया था तो यह पाँच महीने के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गयी थी। तब खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 7.41 प्रतिशत हो गई थी जो अप्रैल के बाद से सबसे अधिक थी।

अगस्त महीने में यह महंगाई 7 प्रतिशत थी। इस बीच जब तीन महीनों में महंगाई कम होती हुई दिखी थी तब सरकार ने दावा किया था कि महंगाई को धीरे-धीरे काबू करने का प्रयास किया जा रहा है और उसे तय सीमा के अंदर ला दिया जाएगा। नवंबर और दिसंबर में ऐसा होता हुआ दिखा भी, लेकिन अब जनवरी में फिर से यह तय सीमा को पार कर गई है।

ग्रामीण और शहरी भारत के लिए खुदरा मुद्रास्फीति की दर क्रमशः 6.85 प्रतिशत और 6.00 प्रतिशत रही। जनवरी में अनाज, अंडे और मसालों की बढ़ी हुई कीमतों से खाद्य मुद्रास्फीति में वृद्धि हुई। हालाँकि जनवरी में सब्जियों की कीमतों में गिरावट आई। 
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय यानी एनएसओ द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, खाद्य क्षेत्र में मुद्रास्फीति की दर जनवरी में 5.94 प्रतिशत थी, जो पिछले महीने में 4.19 प्रतिशत थी और एक साल पहले इसी महीने में 5.43 प्रतिशत थी।
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पिछले हफ्ते आरबीआई ने महंगाई को रोकने के उपाय के तहत ही रेपो रेट यानी जिस ब्याज पर बैंकों को रिजर्व बैंक कर्ज देता है उसको 25 आधार अंकों से बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया। आरबीआई जिस रेट पर दूसरे बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहा जाता है। रेपो रेट कम होने का मतलब होता है कि बैंक से मिलने वाले सभी तरह के लोन सस्ते हो जाते हैं जबकि रेपो रेट ज्यादा होने का मतलब है कि लोन चुकाने के लिए आपको ज्यादा पैसे देने पड़ेंगे।

बता दें कि रिजर्व बैंक ने जनवरी-दिसंबर तिमाही में 5.7 फीसदी और 2022-23 में खुदरा महंगाई दर 6.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। यानी आगे महंगाई कम होने की गुंजाइश कम ही लगती है। 

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क़मर वहीद नक़वी
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