भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 91.99 तक गिर गया। आख़िर इस गिरावट की वजह क्या है और सरकार इसको संभाल क्यों नहीं पा रही है? प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने तो कुछ ऐसा ही दावा किया था...।
भारतीय रुपया शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया है। दिन में लेनदेन के दौरान रुपया 41 पैसे टूटकर 91.99 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। कांग्रेस रुपये की गिरावट पर हमला कर रही है और पीएम पर चुप्पी साधने का आरोप लगा रही है। हालाँकि, यही नरेंद्र मोदी यूपीए सरकार के दौरान डॉलर के मुक़ाबले रुपया के 60 से ज़्यादा होने पर लगातार हमले करते रहे थे।
गुजरात के सीएम रहते नरेंद्र मोदी ने मनमोहन सरकार पर रुपये की गिरावट को लेकर क्या-क्या कहा था, यह जानने से पहले रुपये में आई मौजूदा गिरावट को जान लें। इस हफ्ते रुपया 1% से ज्यादा कमजोर हो चुका है। जनवरी में अब तक 2% से ज्यादा की गिरावट आई है। 2025 में भी यह 5% गिर चुका था। इससे पहले रुपया शुक्रवार सुबह 91.45 पर खुला। शुरुआत में थोड़ा मजबूत होकर 91.41 तक पहुंचा, लेकिन जल्द ही गिरावट शुरू हो गई। गुरुवार को यह 91.58 पर बंद हुआ था। यह गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता की बात है। इससे आयात महंगा होगा, महंगाई बढ़ेगी और कंपनियों के विदेशी कर्ज का बोझ बढ़ेगा। रुपया एशिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में से एक बन गया है। निवेशक अब सतर्क होकर बाजार देख रहे हैं।
रुपये पर दबाव की वजहें क्या?
इस महीने विदेशी संस्थागत निवेशक यानी एफआईआई ने भारतीय शेयर बाजार से क़रीब 3.5 अरब डॉलर निकाल लिए हैं। पिछले साल यह आँकड़ा रिकॉर्ड 18.9 अरब डॉलर था। गुरुवार को ही एफआईआई ने 2549 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इससे निफ्टी-50 जनवरी में लगभग 5% गिर चुका है। शुक्रवार को भी सेंसेक्स 798 पॉइंट गिरकर 81,509 पर और निफ्टी 241 पॉइंट गिरकर 25,049 पर बंद हुआ।
रुपये में गिरावट की दूसरी बड़ी वजह अडानी की कंपनियों में भारी गिरावट भी रही। अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन यानी एसईसी ने अदालत से अनुमति मांगी है कि वह गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी को ईमेल से समन भेज सके। यह 265 मिलियन डॉलर के कथित घूसखोरी मामले से जुड़ा है। भारत ने पहले दो बार समन भेजने से मना किया था। इस खबर से अडानी ग्रुप के शेयर 3% से 12% तक गिरे। इससे बाजार पर और दबाव पड़ा। जानकारों का कहना है कि यह डॉलर खरीदने का एक और कारण बन गया है।इंपोर्टरों द्वारा डॉलर की डिमांड ज़्यादा रही। सोने, तेल और अन्य आयातकों को डॉलर की ज़रूरत है। इससे डॉलर की मांग बढ़ी। ब्रेंट क्रूड ऑयल आज 1% से ज्यादा चढ़कर 64.76 डॉलर प्रति बैरल पर था। इसके अलावा विदेशी सट्टेबाज डॉलर खरीद रहे हैं।
आरबीआई का सपोर्ट भी काम न आया!
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई ने इस हफ्ते कम से कम दो बार डॉलर बेचकर रुपए को सपोर्ट किया है। इससे गिरावट की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है, लेकिन ट्रेंड को उलट नहीं पाई है। ट्रेडर्स कहते हैं कि आरबीआई वोलेटिलिटी कंट्रोल कर रहा है, लेकिन पूरी तरह रोक नहीं पा रहा।
जानकारों का कहना है कि जब तक अमेरिका के साथ ट्रेड एग्रीमेंट नहीं होता और भू-राजनीतिक जोखिम कम नहीं होते, रुपया कमजोर रह सकता है। पूंजी का बाहर जाना रुपए की सबसे बड़ी कमजोरी है।
रुपये की गिरावट का असर क्या?
इस गिरावट के भारतीय अर्थव्यवस्था पर मिलाजुला असर पड़ सकता है। रुपये की कमजोरी निर्यात वाले क्षेत्रों को फायदा पहुंचा सकती है, लेकिन आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाएगी। रुपये की गिरावट के अधिकांश प्रभाव नकारात्मक हैं, क्योंकि भारत आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था है।
ऐसा इसलिए क्योंकि आयातित सामान महंगे हो जाते हैं, खासकर कच्चा तेल, उर्वरक, खाद्य तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स। इससे महंगाई बढ़ती है। इससे आरबीआई को ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं, जो आर्थिक विकास को धीमा कर सकती है। आयात महंगे होने से व्यापार घाटा बढ़ सकता है, भले ही निर्यात बढ़े।
वैसे, रुपये की कमजोरी निर्यात वाले क्षेत्रों को फ़ायदा भी पहुँचा सकती है। कमजोर रुपये से भारतीय निर्यात सस्ते हो जाते हैं, जिससे आईटी सेवाएं, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल्स और विशेष रसायन जैसे क्षेत्रों की कंपनियां ज्यादा लाभ कमाती हैं। लेकिन आम तौर पर रुपये कमजोर होने का मतलब है कि अर्थव्यवस्था की सेहत सही नहीं है।मोदी ने पहले रुपये की गिरावट पर क्या कहा था?
नरेंद्र मोदी ने मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार के दौरान रुपये की गिरावट पर पर काफी तीखी आलोचना की थी। वे तब गुजरात के मुख्यमंत्री थे और विपक्षी नेता के रूप में यूपीए पर हमला बोलते थे। 2013 में एक भाषण में मोदी ने कहा था कि रुपया और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह दोनों 'मौन' हो गए हैं। उन्होंने रुपये को 'डेथबेड' पर बताया था और कहा था कि यह 'टर्मिनल स्टेज' में है, डॉक्टर की जरूरत है।
जब रुपया 60 के ऊपर पहुँचा था तब एक अन्य बयान में उन्होंने तंज कसा था कि रुपया मनमोहन सिंह की उम्र से होड़ लगा रहा है। उन्होंने यह भी कहा था कि कांग्रेस और रुपए के बीच होड़ है कि कौन ज्यादा नीचे गिरेगा। उन्होंने एक अन्य बयान में कहा था कि रुपया 'आईसीयू' में है और सरकार की नीतियों व भ्रष्टाचार से यह स्थिति बनी है। उन्होंने तंज में कहा था कि रुपया और यूपीए सरकार दोनों की वैल्यू ख़त्म हो गई है।
उन्होंने कहा था कि 'रुपया और केंद्र सरकार के बीच होड़ चल रही है कि कौन ज्यादा गिरेगा'। उन्होंने तंज कसा था कि 'रुपये की प्रतिष्ठा और दिल्ली सरकार की प्रतिष्ठा में से किसकी तेजी से गिर रही है, यह तय करना मुश्किल है।' उन्होंने एक भाषण में कहा था कि 'सरकार कुर्सी बचाने में लगी है, रुपये या अर्थव्यवस्था की चिंता नहीं है'।