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बदहाल अर्थव्यवस्था: यात्री वाहन बिक्री में 1998 के बाद रिकॉर्ड गिरावट

बदहाल होती अर्थव्यवस्था में ऑटो इंडस्ट्री की हालत कितनी ख़राब है, यह ऑटो इंडस्ट्री की संस्था सोसाइटी ऑफ़ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफ़ैक्चरर्स यानी सियाम के ताज़ा आँकड़े ही बताते हैं। सियाम के अनुसार, भारत में यात्री वाहन की बिक्री में अगस्त महीने में गिरावट 1998 के बाद अब तक की सबसे बड़ी है। इस साल अगस्त में लगातार 10वें महीने ऑटो कंपनियों के सेल्स में गिरावट दर्ज की गई। अगस्त में ऑटो सेल्स 31.57 फ़ीसदी गिरी है। पिछले साल अगस्त में जहाँ क़रीब तीन लाख यात्री वाहन बिके थे वहीं इस साल क़रीब दो लाख ही बिके हैं। यह गिरावट तब है जब सरकार ऑटो इंडस्ट्री को मज़बूत करने के लिए लगातार प्रयासरत है और हाल ही में इसके लिए कई घोषणाएँ की हैं। इसके बावजूद ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में मंदी का दौर बरकरार है।

पिछले महीने ही ख़बर आयी थी कि साल भर में क़रीब 300 डीलर दुकानें बंद हो गई हैं और इसके बाद कुछ डीलरों के दिवालिया होने की स्थिति पैदा हो गई है। हाल के दिनों में ऐसी ख़बरें आती रही हैं ऑटो सेक्टर की हालत ख़राब है और ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों को बड़ी संख्या में लोगों को नौकरी से निकालना पड़ा है।

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ऐसी रिपोर्टें रही हैं कि यह गिरावट माँग में कमी आने के कारण है और लोगों की ख़रीदने की क्षमता कम हुई है। बहुत सारे लोगों की नौकरियाँ गईं हैं और जो लोग नौकरी में हैं वह भी पैसे ख़र्च नहीं करना चाहते हैं। व्यापार में लगे लोग भी पैसे बाजार में लगाने से डरते हैं। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने भी हाल ही में कहा था कि लोगों का एक दूसरे पर विश्वास नहीं रहा और वे पैसे अपनी जेब से निकालना नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा था कि इसीलिए देश में 70 साल में ऐसा नकदी संकट नहीं आया। इन सबका असर ऑटो इंडस्ट्री पर पड़ा।

सिर्फ़ कारों की बिक्री 41 फ़ीसदी गिरी

सियाम के अनुसार, बीते महीने कारों की घरेलू बिक्री में 41.09 फ़ीसदी से अधिक की ज़बरदस्त गिरावट आई है। दुपहिया वाहनों की बिक्री 22.24 फ़ीसदी गिर गई। सियाम के अनुसार, अगस्त माह में माल ढोने वाले वाहनों की बिक्री 38.71 फ़ीसदी गिरी है। यदि सभी तरह के वाहनों की कुल मिलाकर बिक्री की बात की जाए तो अगस्त में कुल वाहन बिक्री 23.55 फ़ीसदी की गिरावट आई है। 

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ऑटो सेक्टर में बेरोज़गारी

हाल ही में फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन ने कहा था कि बीते साल भर में डीलरों से जुड़े 2 लाख लोगों की नौकरियाँ चली गई हैं। अगस्त महीने में इंडियन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन ने कहा था कि बीते 3 महीने में 15 हज़ार लोगों को नौकरी से निकाला गया है।

अगस्त महीने में ऑटो इंडस्ट्री की ख़राब हालत पर सियाम ने कहा था कि यही हाल रहा तो इस सेक्टर में लगभग 10 लाख लोगों को बेरोज़गार होना पड़ सकता है। वाहनों की बिक्री कम हो रही है, इसे ज़्यादा टैक्स देना पड़ रहा है, इसे उत्पादन कम करना पड़ रहा है। इसका नतीजा यह है कि इस सेक्टर से जुड़े कल कारखानों में लोगों की नौकरियाँ जा रही हैं।

इससे पहले जुलाई महीने में तो एक रिपोर्ट आई थी कि कल-पुर्जे बनाने वाली कंपनियों में क़रीब 10 लाख लोगों की नौकरियाँ चली गई हैं। ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एसीएमए) के महानिदेशक विन्नी मेहता ने ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ से बताया था, ‘यह संकट है और हम पिछले एक साल से अधिक दबाव में हैं, जिसके परिणामस्वरूप कारख़ानों में उत्पादन में बड़ी कटौती हुई है। हमारा अनुमान है कि नौकरी का नुक़सान 8 लाख से 10 लाख के बीच है। ये नौकरियाँ हरियाणा, पुणे, चेन्नई, नासिक, उत्तराखंड और जमशेदपुर जैसे प्रमुख ऑटोमोबाइल विनिर्माण स्थानों से गई हैं।’

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सरकार का प्रयास कितना सकारात्मक?

हालाँकि, हाल में ऑटो सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कई घोषणाएँ की हैं। इसमें ऑटो इंडस्ट्री के लिए राहत पैकेज के साथ नियमों में छूट भी शामिल है। इसमें मार्च 2020 तक बीएस-4 वाहन ख़रीदने, सरकारी विभागों को नई गाड़ियाँ ख़रीदने पर बैन हटाने और वाहनों पर अतिरिक्त 15 फ़ीसदी छूट देने जैसे कुछ अहम फ़ैसले किए गए। इसके अलावा सरकार ने वन टाइम रजिस्ट्रेशन फ़ीस में बढ़ोतरी का फ़ैसला जून 2020 तक के लिए टाल दिया है। लेकिन सवाल यह है कि जब लोगों के पास नौकरियाँ नहीं होंगी और पैसे नहीं होंगे तो कारों की बिक्री कैसे बढ़ेगी?

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