Subash Chandra NCLAT Repayment Controversy: सुभाष चंद्रा के NCLAT रिपेमेंट प्लान को मंजूरी देने के फैसले को यूनियन बैंक, कैनरा बैंक और LIC हाउसिंग फाइनेंस चुनौती देने जा रहे हैं। हालांकि चंद्रा सारे मामले में लीपापोती की कोशिश कर रहे हैं।
ज़ी ग्रुप और एस्सेल ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवालिया कार्यवाही से जुड़ा विवाद अब और बढ़ गया है। LIC Housing Finance, Canara Bank और Union Bank of India ने NCLT के उस फैसले को चुनौती देने का फैसला किया है, जिसमें चंद्रा के रिपेमेंट प्लान को मंजूरी दी गई थी। इस प्लान के तहत करीब ₹22,006.57 करोड़ के स्वीकार किए गए दावों के मुकाबले महज ₹6.25 करोड़ का भुगतान प्रस्तावित है।
तीनों संस्थान NCLAT जाएंगे
तीनों वित्तीय संस्थानों ने कहा है कि उन्होंने NCLT में चंद्रा के रिपेमेंट प्लान का विरोध किया था और इसके खिलाफ वोट भी दिया था। इन तीनों की संयुक्त वोटिंग हिस्सेदारी महज 8.45 फीसदी थी। इसमें Canara Bank की हिस्सेदारी 1.60 फीसदी, Union Bank की 0.76 फीसदी और LIC Housing Finance की 6.09 फीसदी है।LIC Housing Finance ने कहा है कि वह अन्य सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) में तत्काल अपील दाखिल करेगी। उसका कहना है कि दूसरे वित्तीय कर्जदाताओं के 80.81 फीसदी वोट प्लान के पक्ष में जाने के कारण इसे मंजूरी मिल गई।
Canara Bank ने भी कहा है कि उसने प्लान का विरोध किया था और NCLT के आदेश को NCLAT में चुनौती देगा। बैंक ने मामले की फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग भी की थी, लेकिन उसकी अल्पमत वोटिंग हिस्सेदारी के कारण यह प्रस्ताव मंजूर नहीं हो सका।
Union Bank ने भी कहा कि उसने दूसरे सरकारी संस्थानों के साथ प्लान को खारिज किया था और NCLT में इसका विरोध किया था। बैंक के मुताबिक, कुछ निजी कर्जदाताओं के बहुमत के कारण योजना को मंजूरी मिल गई और अब वह इस फैसले को NCLAT में चुनौती देगा।
HDFC Bank भी कर सकता है अपील
इस मामले में सिर्फ सरकारी वित्तीय संस्थान ही असहमत नहीं हैं। HDFC Bank भी NCLT के आदेश के खिलाफ NCLAT जाने पर विचार कर रहा है। बैंक ने कहा था कि उसने भी रिपेमेंट प्लान के खिलाफ वोट दिया था, लेकिन बहुमत के कारण योजना मंजूर हो गई। HDFC Bank के मुताबिक, NCLT के आदेश में उसके कुल दावे का केवल 3.2 फीसदी हिस्सा स्वीकार किया गया है। बैंक ने यह भी बताया कि संबंधित लोन सुविधा उसे HDFC से विलय से पहले मिली थी।Indiabulls Housing Finance ने नहीं किया विरोध
दिलचस्प बात यह है कि जिस Indiabulls Housing Finance की याचिका से चंद्रा की व्यक्तिगत दिवालिया प्रक्रिया शुरू हुई थी, उसने NCLT के फैसले को चुनौती नहीं देने का फैसला किया है। कंपनी अब Samaan Capital के नाम से जानी जाती है। Samaan Capital का कहना है कि चंद्रा से जुड़ी विभिन्न संस्थाओं को दिए गए लोन सिक्योर्ड नेचर के थे और कंपनी ने अपनी वसूली तथा प्रवर्तन कार्रवाई के जरिए मूल रूप से वितरित रकम से अधिक राशि हासिल कर ली है।Indiabulls Housing Finance ने 2022 में करीब ₹170 करोड़ के Vivek Infracon लोन के मामले में चंद्रा के खिलाफ व्यक्तिगत दिवालिया प्रक्रिया शुरू की थी। इस लोन की व्यक्तिगत गारंटी चंद्रा ने दी थी। NCLT ने अप्रैल 2024 में उनके खिलाफ व्यक्तिगत insolvency proceedings स्वीकार की थीं।
₹22,000 करोड़ के दावे के बदले सिर्फ ₹6.5 करोड़
NCLT ने 25 अगस्त को सुभाष चंद्रा के रिपेमेंट प्लान को मंजूरी दी थी। आधिकारिक NCLT रिकॉर्ड में भी Indiabulls Housing Finance Ltd बनाम डॉ. सुभाष चंद्रा मामले में 25 अगस्त 2026 को रिपेमेंट प्लान की मंजूरी का आदेश दर्ज है।योजना के मुताबिक चंद्रा को स्वीकार किए गए करीब ₹22,006.57 करोड़ के कर्जदाताओं के दावों के निपटारे के लिए लगभग ₹6.25 करोड़, जबकि करीब ₹25 लाख प्रक्रिया की लागत के लिए देने हैं। इस तरह कुल रकम करीब ₹6.5 करोड़ बैठती है। यह स्वीकार किए गए दावों का लगभग 0.03 फीसदी है, यानी कर्जदाताओं के लिए करीब 99.97 फीसदी का 'हेयरकट' दिखाई देता है। हालांकि, इस रकम को लेकर सुभाष चंद्रा ने अलग तस्वीर पेश की है।
चंद्रा बोले- ₹22,000 करोड़ मेरा व्यक्तिगत कर्ज नहीं
सुभाष चंद्रा ने NCLT मामले पर जारी अपने वीडियो संदेश में कहा कि ₹22,000 करोड़ का आंकड़ा उनका व्यक्तिगत कर्ज नहीं है। उनके मुताबिक, यह उन कंपनियों के कर्ज से जुड़ा है जिनके लिए उन्होंने व्यक्तिगत गारंटी दी थी।चंद्रा का दावा है कि उनके खिलाफ वास्तविक व्यक्तिगत दावों की रकम करीब ₹3,900 करोड़ है। उन्होंने कहा कि करीब ₹620 करोड़ से जुड़े दावों का भुगतान पहले ही किया जा चुका है, जबकि लगभग ₹1,100 करोड़ का सेटलमेंट ऑफर कुछ कर्जदाताओं के सामने लंबित था। उन्होंने यह भी कहा कि जिन कंपनियों के कर्ज की उन्होंने व्यक्तिगत गारंटी दी थी, उन्होंने 2019 के वित्तीय संकट के बाद बड़ी मात्रा में कर्ज चुकाया है।
मुकेश अंबानी पर लगाए गंभीर आरोपः इस विवाद के बीच सुभाष चंद्रा ने Reliance Industries के चेयरमैन मुकेश अंबानी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। चंद्रा ने आरोप लगाया कि अंबानी ने कभी Zee को 'कब्जे में लेने' की कोशिश की थी और अब उनका मीडिया नेटवर्क NCLT मामले को लेकर उनके खिलाफ कथित तौर पर गलत खबरें चला रहा है। चंद्रा ने कहा कि उन्होंने अंबानी से सीधे संपर्क करने की कोशिश की, उन्हें फोन किया और एक पत्र भी भेजा, लेकिन उनके अनुसार कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने अंबानी से कथित 'प्रचार अभियान' रोकने की अपील की। उन्होंने मुकेश अंबानी को धमकी भी दी और कहा कि वो भी उनके बारे में बहुत कुछ जानते हैं।
चंद्रा ने कहा कि Zee एक ग्रुप कंपनी है और अब उनका उसमें व्यक्तिगत स्वामित्व नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि NCLT आदेश लागू होने के बाद उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं बचा है। हालांकि, अंबानी या रिलायंस की ओर से इन आरोपों पर इस रिपोर्ट में कोई जवाब दर्ज नहीं है, इसलिए चंद्रा के आरोपों को आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।