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डीडीसी चुनाव: गुपकार-बीजेपी में रही टक्कर, निर्दलीयों ने दिखाया दम 

जम्मू-कश्मीर में डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट काउंसिल (डीडीसी) के चुनाव में बीजेपी और पीपल्स अलायंस फ़ॉर गुपकार डेक्लेरेशन या गुपकार गठबंधन के बीच कड़ा मुक़ाबला देखने को मिला लेकिन अंतत: गुपकार गठबंधन आगे रहा है। निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी बेहतर प्रदर्शन किया और तीसरे नंबर पर रहे जबकि कांग्रेस चौथे नंबर पर रही। इस चुनाव की अहम बात यह रही कि बीजेपी का कश्मीर में भी खाता खुला है और उसे 3 सीटें मिली हैं। 

जम्मू-कश्मीर से धारा 370 के ख़त्म होने के बाद यह पहला लोकतांत्रिक चुनाव था। इस चुनाव में 280 सीटों पर 4,181 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। डीडीसी चुनाव के लिए 28 नवंबर से लेकर 19 दिसंबर तक 8 चरणों में मतदान हुआ था। इस चुनाव में 51 फ़ीसदी मतदान हुआ था।

अब तक के नतीजों के मुताबिक़ गुपकार गठबंधन को 112 सीटों पर जीत मिली है जबकि बीजेपी को 74 और कांग्रेस को 26 सीटों पर जीत मिली है। इस चुनाव में बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवारों ने बाज़ी मारी है और वे 64 सीटों पर जीत हासिल कर चुके हैं। 

जम्मू संभाग में बीजेपी ने 71 सीटें जीती हैं जबकि गुपकार गठबंधन को 35 और कांग्रेस को 17 सीटें मिली हैं। जबकि कश्मीर में गुपकार गठबंधन ने 72, बीजेपी ने 3 और कांग्रेस ने 10 सीटें हासिल की हैं।

डीडीसी चुनाव को लेकर गुपकार गठबंधन का गठन किया गया था। गुपकार गठबंधन जम्मू-कश्मीर के कुछ राजनीतिक दलों का संगठन है जो राज्य में 5 अगस्त, 2019 से पहले की स्थिति की बहाली के लिए बनाया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्ला इसके प्रमुख हैं। 

इसमें पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी), नेशनल कॉन्फ्रेन्स, जम्मू-कश्मीर पीपल्स कॉन्फ्रेन्स, आवामी नेशनल कॉन्फ्रेन्स और सीपीआईएम शामिल हैं। इस गठबंधन ने राज्य में डीडीसी के चुनाव में मिलकर ताल ठोकी।

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पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, ‘चुनाव नतीजे हमारे लिए उत्साहजनक हैं। कुछ महीने पहले तक हम लोग जेल में थे। सब कुछ जल्दी में हुआ। उन्होंने हमारे ख़िलाफ़ राज्य की मशीनरी, हर एजेंसी का इस्तेमाल किया लेकिन फिर भी हमारा प्रदर्शन बेहतर रहा।’ 

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने कहा, ‘नतीजों ने साफ कर दिया है कि बड़ी संख्या में राज्य के लोगों ने गुपकार गठबंधन को वोट दिया है। उन्होंने ऐसा करके बता दिया है कि वे राज्य के विशेष दर्जे को लौटाने के समर्थन में हैं।’ 

बीजेपी प्रवक्ता शाहनवाज़ हुसैन ने कहा कि कश्मीर में तीन सीट जीतना बीजेपी के लिए उपलब्धि की तरह है और यह दिखाता है कि कश्मीर के लोग विकास चाहते हैं। 

डीडीसी चुनाव पर देखिए चर्चा-  

बीजेपी का गुंडा राज: महबूबा

मंगलवार को काउंटिंग से पहले राज्य के कई नेताओं को हिरासत में ले लिया गया था। पीडीपी ने कहा है कि उसके तीन नेताओं को हिरासत में ले लिया गया है। पीडीपी मुखिया और राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने इसे गुंडा राज कहा था। महबूबा ने कहा कि इससे पता चलता है कि बीजेपी नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। 

हिरासत में लिए गए नेताओं में पूर्व मंत्री नईम अख़्तर, महबूबा मुफ़्ती के चाचा सरताज मदनी और उनके पूर्व राजनीतिक सलाहकार पीरज़ादा मंसूर हुसैन शामिल हैं। इसके अलावा पीडीपी के गंदरबल जिले के अध्यक्ष बशीर अहमद के बारे में कुछ पता नहीं चला है। पीडीपी नेताओं का कहना है कि उनकी पार्टी के नेताओं को हिरासत में लेने के पीछे महबूबा मुफ़्ती पर दबाव बनाना मक़सद है। बता दें कि जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद फ़ारूक़ अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती को लंबे वक़्त तक राजनीतिक हिरासत में रखा गया था। 

डीडीसी चुनाव के बीच ही राज्य में गुपकार गठबंधन को लेकर ख़ासी गहमा-गहमी रही। अमित शाह के इसे गुपकार गैंग बताए जाने पर उमर अब्दुल्ला, महबूबा और कांग्रेस ने भी पलटवार किया।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले महीने गुपकार गैंग पर हमला बोला था और कहा था कि कांग्रेस और गुपकार गैंग जम्मू-कश्मीर को आतंकवाद और उथल-पुथल वाले दौर में वापस ले जाना चाहता है।

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शाह ने कहा था कि गुपकार गैंग ग्लोबल होता जा रहा है और ये लोग चाहते हैं कि विदेशी ताक़तें जम्मू-कश्मीर में दख़ल दें। शाह ने कांग्रेस से पूछा था कि क्या वे गुपकार गैंग के क़दमों का समर्थन करते हैं, उन्हें भारत के लोगों के सामने इस मुद्दे पर अपना स्टैंड साफ करना चाहिए। 
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इस पर कांग्रेस ने कहा था कि वह इस गठबंधन में शामिल नहीं है। पार्टी ने पूछा था कि जिस पीडीपी की अमित शाह आलोचना कर रहे हैं, उसके साथ मिलकर उसने जम्मू-कश्मीर में सरकार क्यों बनाई थी।

शाह को पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी जवाब देते हुए कहा था, ‘अमित शाह जी, हम कोई गैंग नहीं हैं। हम एक क़ानूनी रूप से वैध राजनीतिक गठबंधन हैं और चुनाव लड़ना जारी रखेंगे।’ महबूबा और उमर ने अमित शाह से पूछा था कि चुनाव लड़ना कब से एंटी नेशनल हो गया है। महबूबा ने कहा था, ‘बीजेपी सत्ता की भूख के लिए मर्जी जितने गठबंधन बना सकती है लेकिन हमारे यूनाइटेड फ़्रंट बनाने से न जाने किस तरह राष्ट्रीय हित कमजोर हो रहे हैं।’

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