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क्या कश्मीर में स्थिति वाकई सुधर रही है?

क्या कश्मीर में स्थिति सुधर रही है? क्या वहाँ हालात पहले की तरह हो रहे हैं? प्रशासन के हाल में उठाए कदम से यही लगता है। बुधवार की रात जम्मू-कश्मीर के 80 अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और स्वास्थ्य विभाग के दफ़्तरों में ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवा शुरू कर दी गई है।
जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को ख़त्म करने के पहले 5 अगस्त को पूरे राज्य में इंटरनेट पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके तकरीबन 5 महीने बाद नए साल के मौके पर सरकार ने मोबाइल इंटरनेट सेवा बहाल कर दी। लेकिन यह सेवा कारगिल समेत कुछ इलाक़ों में ही बहाल हुई है, पूरे राज्य में नहीं।

 फिलहाल, अभी बीएसएनएल की ही मोबाइल सेवा चालू हुई है। एयरटेल और जियो रिलायंस की सेवाएँ बहाल नहीं हुई है, जिसके लाखों ग्राहक हैं। इसी तरह राज्य में एसएमएस सेवा बहाल हुई है, पर यह सिर्फ पोस्ट पेड कनेक्शन के लिए है।
केंद्र शासित क्षेत्र के मुख्य प्रवक्ता रोहित कंसल ने इसका भी एलान किया कि लखनपुर पोस्ट पर गुड्स ट्रक पर टोल नहीं लगेगा। ट्रक ऑपरेटरों की यह माँग लंबे समय से की रुकी हुई थी।
इसके पहले ही कश्मीर में यह दावा किया गया है कि पर्यटक आने लगे हैं, दुकान-बाजार सामान्य तौर पर ही खुलते और बंद होते हैं। कश्मीर के स्कूल-कॉलेज पहले ही खुल चुके हैं।

कश्मीर के लेफ़्टीनेंट गवर्नर के सलाहकार के. के. शर्मा ने दावा किया है कि जल्द ही एडवेंचर स्पोर्ट्स से जुड़ी चीजें शुरू की जाएंगी।
प्रशासन ने बीते दिनों नई नौकरियाँ निकालीं और उसके लिए पूरे देश से आवेदन माँगे गए। अनुच्छेद 35 ए ख़त्म करने के बाद यह पहला मौका है, जब कश्मीर में नौकरियाँ निकली हैं और आवेदन माँगे गए हैं। लेकिन इसे सरकार ने वापस ले लिया। कहा जा रहा है कि सरकार इस पर विचार कर रही है कि 15 साल तक राज्य में रहने वालों को ही नागरिक माना जाए। 

नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के 5 नेताओं को इसके पहले ही रिहा कर दिया गया। लेकिन अभी भी तीन मुख्यमंत्रियों फ़ॉरूक़ अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती समेत कई बड़े नेता जेल में बंद हैं।

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