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महबूबा मुफ़्ती हिरासत में लिए जाने के एक साल बाद रिहा की गईं

जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती को रिहा कर दिया गया है। जम्मू कश्मीर में पिछले साल 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 में बदलाव के वक़्त से वह हिरासत में थीं। पहले उन्हें नज़रबंद रखा गया था लेकिन बाद में उन्हें सख़्त क़ानून जन सुरक्षा अधिनियम यानी पीएसए के तहत हिरासत में रखा गया था। महबूबा की रिहाई तब हुई जब सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय हिरासत की सीमा ख़त्म होने वाली थी। महबूबा मुफ़्ती के ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर रिहाई की जानकारी दी गई। अब तक महबूबा की बेटी इल्तिजा उनके ट्विटर हैंडल को संभाल रही थीं। महबूबा के ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया, 'चूँकि मुफ्ती का अवैध हिरासत आख़िरकार ख़त्म हुआ, मैं उन सभी को धन्यवाद देना चाहती हूँ जिन्होंने इन कठिन समय में मेरा साथ दिया। मैं आप सभी का आभार मानती हूँ। अब इल्तिजा विदा लेती है। ख़ुदा आपकी रक्षा करे।'

महबूबा मुफ़्ती की रिहाई पर पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ली में ख़ुशी जताई है। उन्होंने ट्वीट किया, 'मुझे यह सुनकर प्रसन्नता हुई कि महबूबा मुफ़्ती साहिबा को हिरासत में एक वर्ष से अधिक समय के बाद रिहा कर दिया गया है। उनकी लगातार हिरासत एक उपहास था और लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के ख़िलाफ़ था। महबूबा का स्वागत करते हैं।'
सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर महीने के आख़िर में सुनवाई के दौरान जम्मू कश्मीर प्रशासन से कहा था कि पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को हमेशा के लिए हिरासत में नहीं रखा जा सकता है। महबूबा की बेटी इल्तिजा मुफ्ती की ताज़ा याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा था। इल्तिजा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू- कश्मीर प्रशासन से पूछा था कि महबूबा को कब तक हिरासत में रखा जा सकता है? कोर्ट ने यह भी पूछा था कि क्या उनकी हिरासत एक साल से आगे बढ़ाई जा सकती है? कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से अपने रुख की जानकारी देने के लिए कहा था और अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को तय की थी। लेकिन इससे पहले इनकी रिहाई का फ़ैसला लिया गया है।  
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद इल्तिजा ने अपनी माँ महबूबा मुफ़्ती के ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया था, 'इस बात से कोई आश्चर्य नहीं कि सुश्री मुफ्ती की हिरासत को अंतहीन रूप से खींचा जा रहा है। अनुच्छेद 370 को अवैध रूप से निरस्त करने जैसा एक गंभीर मामला एक साल से अधिक समय से लंबित है, इसलिए किसी के पास निराश होने के अलावा कोई चारा नहीं है। फिर भी, मैं उनकी रिहाई के लिए लड़ती रहूँगी। इस बीच, गुपकर घोषणा से जुड़े दलों को अगले क़दम पर विचार-विमर्श करना चाहिए। शायद कोई देख सकता है कि लेह के लोग अदालतों पर निर्भर रहने के बजाय कैसे एकजुट होते हैं और ख़ुद को संगठित करते हैं।'
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जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाये जाने के बाद से ही पहले हिरासत और फिर राजनीतिक नज़रबंदी में रहे राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को मार्च महीने में ही रिहा किया गया था। उनसे पूर्व दो हफ़्ते पहले उमर के पिता फ़ारूक़ अब्दुल्ला को भी रिहा कर दिया गया था। जबकि राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती को नज़रबंद रखा गया था।

वीडियो में देखिए, फ़ारूक़ की अचानक रिहाई क्यों?

केंद्र की मोदी सरकार ने बीते साल 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा ख़त्म कर दिया था और उसे दो हिस्सों में बाँट दिया था। जम्मू कश्मीर और लद्दाख दो केंद्रशासित प्रदेश बना दिया गया था। 

उमर अब्दुल्ला पर सरकार ने पब्लिक सेफ़्टी एक्ट (पीएसए) लगाया था। उन पर बीती 5 फ़रवरी को पीएसए लगाया गया था। 

पीएसए के तहत आतंकवादियों, अलगाववादियों और जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंकने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाती रही है। यह पहली बार हुआ जब मुख्यधारा के राजनेताओं पर पीएसए लगाया गया।

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