झारखंड में दो राज्यसभा सीटों के लिए वोटिंग से एक दिन पहले बुधवार तक एनडीए ने अपने सभी विधायकों को होटल में शिफ्ट कर लिया। इंडिया गठबंधन के भी सभी विधायकों की बैठक झारखंड सीएम हेमंत सोरेन के आवास पर हुई। राज्यसभा सीट के लिए होने वाली वोटिंग में हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका से रिसॉर्ट पॉलिटिक्स हो रही है। ऐसी स्थिति इसलिए भी आ गई है कि राज्य में राज्यसभा के लिए दो सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं, लेकिन तीन उम्मीदवार मैदान में हैं।

दरअसल, राज्य में राज्यसभा की दूसरी सीट पर मुकाबला कड़ा हो गया है क्योंकि बीजेपी ने निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को समर्थन दे दिया है। इंडिया गठबंधन के पास 56 विधायक हैं और एक सीट जीतने के लिए 28 वोट चाहिए। हर वोट बहुत कीमती है। यदि इंडिया गठबंधन के एक भी विधायक ने क्रॉस वोटिंग की तो इसके दूसरे उम्मीदवार का जीतना मुश्किल हो जाएगा। बीजेपी के निर्दलीय को समर्थन दे देने से कांग्रेस के लिए अब और भी एहतियात बरतने की नौबत आ गई है।
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राज्य में इन दोनों राज्यसभा सीटों के लिए गुरुवार यानी 18 जून को मतदान होना है। वोटिंग से एक दिन पहले ही दोनों गठबंधन अपने-अपने विधायकों को दूसरे पक्ष के पास जाने से बचाने के लिए सतर्क हो गए हैं। एनडीए ने अपने सभी विधायकों को रांची के एक होटल में शिफ्ट कर दिया है। वहीं, इंडिया गठबंधन के विधायक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के घर पर डिनर मीटिंग में जुटे।

एनडीए का प्लान

एनडीए ने निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को समर्थन दिया है। नाथवानी खुद रांची के एक होटल में ठहरे हुए हैं। मंगलवार दोपहर से एनडीए ने अपने विधायकों को उसी होटल में ले जाना शुरू कर दिया। सूत्रों के अनुसार, सभी विधायकों के लिए कमरे बुक कर लिए गए हैं। कुछ विधायक मंगलवार को ही शिफ्ट हो गए, बाकी बुधवार को पहुंचे। एनडीए ने विधायकों के लिए खास ट्रेनिंग सेशन भी रखा है, जिसमें उन्हें वोट कैसे डालना है, इसकी जानकारी दी जा रही है।

बीजेपी का दावा है कि इंडिया गठबंधन के कुछ विधायक नाथवानी को समर्थन देंगे। झारखंड बीजेपी के प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा ने कहा, 'एनडीए के सभी विधायक सुरक्षित हैं। नाथवानी के पिछले काम को देखते हुए कुछ विधायक उन्हें वोट देंगे। हम नाथवानी की जीत के पूरी तरह आश्वस्त हैं।'

इंडिया गठबंधन की बैठक

दूसरी तरफ़, इंडिया गठबंधन के सभी विधायक मंगलवार शाम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास पर डिनर मीटिंग में इकट्ठा हुए। बैठक में गठबंधन की रणनीति पर चर्चा हुई। मीटिंग में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अलावा गठबंधन के सभी विधायक, झामुमो के राज्यसभा उम्मीदवार बैद्यनाथ राम और कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणव झा भी मौजूद रहे।

एनडीए विधायकों की संख्या

एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 28 वोट चाहिए। लेकिन बीजेपी के पास 21 विधायक हैं। इसके सहयोगी दलों जदयू, आजसू और एलजेपी आरवी के पास 1-1 विधायक हैं। यानी एनडीए के पास कुल मिलाकर 24 विधायक हैं। ऐसे में एनडीए को 4 अतिरिक्त वोट चाहिए।

'इंडिया' विधायकों की संख्या

सीएम हेमंत सोरेन की पार्टी झामुमो के पास 34 विधायक हैं। इसकी सहयोगी कांग्रेस के पास 16, आरजेडी के पास 4 और सीपीआई(एम) के पास 2 विधायक हैं। यानी इंडिया गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं। ये संख्या दो सीटें जीतने के लिए बिल्कुल पर्याप्त है। प्रणव झा सोमवार को पटना गए थे, जहां उन्होंने आरजेडी नेता तेजस्वी यादव से मुलाकात कर अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन मांगा था।

मतदान कल

18 जून को दो राज्यसभा सीटों के लिए वोटिंग होगी। दोनों गठबंधन अंतिम समय तक विधायकों को अपने पाले में बनाए रखने की कोशिश में जुटे हैं। क्रॉस वोटिंग इस चुनाव का बड़ा फैक्टर बन सकता है।
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कर्नाटक में भी रिसॉर्ट पालिटिक्स

इधर, कर्नाटक में 18 जून को होने वाले विधान परिषद यानी एमएलसी चुनाव से पहले अब जेडीएस ने भी 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' शुरू कर दी है। कांग्रेस के बाद अब एच.डी. कुमारस्वामी की पार्टी जेडीएस ने क्रॉस वोटिंग के डर से अपने विधायकों को बेंगलुरु के बाहर रिसॉर्ट में भेजने का फैसला किया है। इंडिया टुडे ने पार्टी सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि जेडीएस के विधायकों को देवनहल्ली के पास प्रेस्टीज गोल्फ क्लब रिसॉर्ट में शिफ्ट किया जा रहा है। रिसॉर्ट में रहते हुए वरिष्ठ नेता विधायकों को ब्रिफिंग देंगे और बैठकें करेंगे।

कांग्रेस ने पहले ही किया था शिफ्ट

कर्नाटक में कांग्रेस ने मंगलवार को अपने विधायकों को मैसुरु रोड पर टेरिया रिसॉर्ट में शिफ्ट कर दिया था। कांग्रेस के विधायकों को वोटिंग के दिन सीधे विधानसभा ले जाया जाएगा।

कर्नाटक विधानसभा के सदस्य विधान सौधा में 7 एमएलसी सीटों के लिए वोट डालेंगे। कुल 8 उम्मीदवार मैदान में हैं। हर उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 28 वोट चाहिए। कांग्रेस 5 सीटें जीतने की कोशिश कर रही है। अनुमान है कि कांग्रेस 4 और बीजेपी 2 सीटें आराम से जीत सकती है। सातवीं सीट पर रोचक मुकाबला होने वाला है, क्योंकि कांग्रेस और जेडीएस दोनों ने अपना उम्मीदवार उतारा है, जबकि दोनों के पास अकेले जीतने लायक ताकत नहीं है।