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विधानसभा में पोर्न देखने वाले सावदी क्यों बने उपमुख्यमंत्री?

क्या कर्नाटक बीजेपी का चाल-चरित्र-चेहरा बदल गया है? पार्टी ने पहले महात्मा गाँधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे के पक्ष में बोलने वाले नलिन कुमार कतील को कर्नाटक बीजेपी का अध्यक्ष बनाया था और अब विधानसभा में पोर्न वीडियो देखने वाले लक्ष्मण सावदी को कर्नाटक का उपमुख्यमंत्री बनाया है। ये दोनों ऐसे मामले हैं जिस पर ख़ुद पार्टी ने पहले तो उनकी आलोचना की थी, लेकिन अब इन दोनों नेताओं को प्रोन्नति दे दी है। दोनों नेताओं की आम लोगों में 'ख़राब' इमेज जाने के बाद भी बीजेपी ने उन्हें आगे क्यों बढ़ाया? क्या पार्टी के लिए सरकार गठन और चुनावी जीत के आगे चाल-चरित्र और चेहरा कोई मायने नहीं रखता है?

मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा ने सोमवार को ही तीन उपमुख्यमंत्री बनाए हैं। इनमें लक्ष्मण सावदी, गोविंद एम करजोल और अश्वथ नारायण शामिल हैं। लक्ष्मण सावदी वही हैं जो 2012 में दो अन्य समकक्षों के साथ विधानसभा में ही पोर्न वीडियो देखते हुए पाए गए थे। हालाँकि बाद में उन्होंने सफ़ाई दी थी कि वे लोग इसे 'रेव पार्टी के बारे में जानने के उद्देश्य से देख रहे थे' क्योंकि विधानसभा में मंगलुरू में रेव पार्टी स्कैंडल पर बहस होनी थी।

जब यह मामला आया था तब सावदी, सी.सी. पाटिल और कृष्णा पालेमर, तीनों ने मंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। अब सावदी के उपमुख्यमंत्री बनाए जाने के साथ ही पाटिल भी मंत्री बनाए गए हैं।

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ज़ाहिर तौर पर सावदी को ईनाम इसलिए मिला है कि उन्होंने कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार को अस्थिर करने में बड़ी भूमिका निभाई है। सावदी कांग्रेस के बाग़ी नेता और विधायक पद से अयोग्य क़रार दिए गए रमेश जरकिहोली के क़रीबी रहे हैं और माना जाता है कि उन्होंने क़रीब आधा दर्जन विधायकों को गठबंधन से तोड़ने में मदद की थी।

बता दें कि कर्नाटक में सरकार बनाने की बीजेपी की हसरत हाल ही में तब पूरी हुई थी जब वह कांग्रेस और जेडीएस के गठबंधन वाले कई विधायकों को तोड़ने में सफल रही थी। जुलाई के आख़िर में येदियुरप्पा सरकार ने कर्नाटक विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर लिया था। कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन वाली सरकार विश्वास मत हासिल न कर पाने के कारण गिर गई थी। सरकार बनाने के लिए बीजेपी ने ‘ऑपरेशन लोटस’ भी चलाया था।

सावदी पिछले विधानसभा में चुनाव नहीं जीत पाए थे इसके बावजूद उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। येदियुरप्पा के क़रीबी नेता और बीजेपी विधायक एम.पी. रेनुकाचार्यन ने सावदी के उपमुख्यमंत्री बनाए जाने का विरोध भी किया था। उन्होंने शुक्रवार को कहा था, 'जब वह (सावदी) चुनाव हार गए थे तो इतनी जल्दी या ऐसी क्या ज़रूरत थी कि उनको मंत्री के रूप में शामिल किया जाए।' बता दें कि सावदी को काफ़ी शक्तिशाली लिंगायत नेता माना जाता है।

नलिन कतील कैसे बने कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष?

जिस नलिन कुमार कतील को महात्मा गाँधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे के पक्ष में बयान देने के लिए बीजेपी ने खिंचाई की थी उन्हें ही हाल में कर्नाटक बीजेपी का प्रमुख बना दिया गया है। जिस तरह से नलिन कुमार कतील ने गोडसे को लेकर बात की थी वह काफ़ी आपत्तिजनक थी। उन्होंने इसी साल मई महीने में ट्वीट किया था, 'गोडसे ने एक को मारा, कसाब ने 72 को और राजीव ने 17 हज़ार को, अब आप देखिए कौन सबसे ज़्यादा जालिम है।' तब पार्टी ने ख़ुद इसे ग़लत माना था और इसीलिए उनकी आलोचना की गई थी। जब काफ़ी विवाद हुआ तब बाद में ट्वीट के लिए उन्हें माफ़ी माँगनी पड़ी थी।

कतील को प्रोन्नति क्यों दी गई, उनके काम से ही यह समझा जा सकता है। कहा जाता है कि सबरीमला मंदिर विवाद मामले में बीजेपी और संघ की ओर से 2018 में उत्तरी केरल में प्रदर्शन करने की ज़िम्मेदारी कतील ही संभाल रहे थे। वह 2017 में कर्नाटक में सात हिंदू कार्यकर्ताओं की कथित हत्या के बाद हुए प्रदर्शन में अग्रणी रहे थे। पार्टी के बड़े नेताओं से उनके अच्छे संबंध हैं। इन्हीं परिस्थितियों में गोडसे पर बयान देने के बावजूद उन्हें पार्टी में पदोन्नति मिली है।

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गोडसे को देशभक्त बताने वाली प्रज्ञा भी बनीं बीजेपी सांसद 

इसी साल मई महीने में लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी नेता साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने भी महात्मा गाँधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया था। मालेगाँव बम धमाकों की अभियुक्त प्रज्ञा ने एक पत्रकार के सवाल पूछने पर कहा था, ‘नाथूराम गोडसे देशभक्त थे, हैं और रहेंगे। जो लोग उन्हें आतंकवादी कह रहे हैं, उन्हें अपने गिरेबान में झाँकना चाहिए। ऐसे लोगों को इस चुनाव में जवाब दे दिया जाएगा।’ बाद में किरकिरी होने और बीजेपी के दबाव के बाद उन्होंने अपने बयान पर माफ़ी माँगी थी। बीजेपी ने इसकी निंदा करते हुए उनसे स्पष्टीकरण माँगा था और सार्वजनिक तौर पर माफ़ी माँगने को कहा था।

तब बीजेपी के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान आया था। इसमें उन्होंने कहा था, ‘महात्मा गाँधी और नाथूराम गोडसे को लेकर जो भी बातें की गईं हैं, वो भयंकर रूप से ख़राब हैं। ये बातें पूरी तरह से घृणा के लायक हैं, सभ्य समाज के अंदर इस प्रकार की बातें नहीं चलती हैं। भले ही इस मामले में उन्होंने माफ़ी माँग ली हो, लेकिन मैं अपने मन से उन्हें कभी भी माफ़ नहीं कर पाऊँगा।’ बता दें कि साध्वी के ख़िलाफ़ पार्टी की ओर से अब तक वैसी कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

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चेतावनी दी, कार्रवाई नहीं हुई

तब इस मामले में प्रज्ञा के नाथूराम गोडसे के बयान की बीजेपी के वरिष्ठ नेता और और केंद्रीय मंत्री अनंत हेगड़े ने तारीफ़ की थी। उन्होंने साध्वी प्रज्ञा के बयान को सही ठहराते हुए कहा था, ‘मैं खुश हूँ कि क़रीब 7 दशक बाद आज की नई पीढ़ी इस मुद्दे पर चर्चा कर रही है और साध्वी प्रज्ञा को इस पर माफ़ी माँगने की ज़रूरत नहीं है।’ हालाँकि बाद में हेगड़े ने कहा था कि उनका ट्विटर अकाउंट हैक हो गया था और ट्वीट के लिए ख़ेद जताया था। 

अनंतकुमार हेगड़े, साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और नलीन कतील के इस पूरे मामले को अमित शाह ने अनुशासन समिति में भेज दिया था और 10 दिन में रिपोर्ट माँगी थी। हालाँकि, इसके बाद क्या कार्रवाई की गई, इसके बारे में जानकारी नहीं दी गई है।

ये कुछ गिने-चुने ही नेता नहीं हैं जो विवादों में रहे हैं और जिन्हें बीजेपी में न सिर्फ़ जगह मिलती है बल्कि प्रोन्नति भी मिलती है, बल्कि ऐसे कई नेता हैं। विवादित बयान देने के समय तो पार्टी की ओर से आलोचना कर दी जाती है, लेकिन बाद में ऐसे नेताओं को ही आगे भी बढ़ा दिया जाता है। माना जाता रहा है कि चुनाव में लाभ या पार्टी को फ़ायदा पहुँचाने के लिए ऐसा किया जाता रहा है। ऐसे में सवाल तो उठता ही है कि अक्सर चाल-चरित्र-चेहरा की बात करने वाली बीजेपी ख़ुद इस पर कितना अमल करती है?

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