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सीएम पद के दावेदारों की दिल्ली दौड़; लिंगायत संत बोले- साज़िश कर रहा आरएसएस

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा के 26 जुलाई तक इस्तीफ़ा देने की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री पद के दावेदारों की दिल्ली दौड़ तेज़ हो गई है। बीजेपी हाईकमान और आरएसएस नए मुख्यमंत्री के चयन के लिए कई फ़ैक्टर्स को ध्यान में रख रहा है। उधर, लिंगायत समुदाय के संतों का विरोध जारी है। लिंगायत संतों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कुछ दिन पहले येदियुरप्पा से मुलाक़ात भी की थी। 

नए मुख्यमंत्री के चयन के लिए किन फ़ैक्टर पर विचार हो रहा है। इसे देखते हैं। 

लिंगायत समुदाय का फ़ैक्टर 

‘द हिंदू’ के मुताबिक़, पहला फ़ैक्टर यह है कि येदियुरप्पा की जगह पर लिंगायत समुदाय के ही किसी नेता को जगह दी जाए। इससे लिंगायत समुदाय की नाराज़गी का ख़तरा कम होगा। हालांकि लिंगायत समुदाय व इसके संतों के बीच येदियुरप्पा जैसी स्वीकार्यता दूसरे नेताओं की नहीं है। 

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बीजेपी हाईकमान को याद है कि येदियुरप्पा के पार्टी छोड़ने के बाद 2013 के विधानसभा चुनाव में लिंगायतों की नाराज़गी के कारण पार्टी चुनाव हार गई थी। इसलिए इस बात को ध्यान में रखा जा रहा है। 

कर्नाटक में लिंगायत समुदाय की आबादी 17 फ़ीसदी है। 224 सीटों वाले कर्नाटक में इस समुदाय का असर 90-100 विधानसभा सीटों पर है। कहा जाता है कि येदियुरप्पा की वजह से ही लिंगायत समुदाय के ज़्यादातर लोग बीजेपी का समर्थन करते हैं। 

संघ परिवार का फ़ैक्टर 

दूसरा फ़ैक्टर संघ परिवार का है। इस फ़ैक्टर की हिमायत करने वालों का कहना है कि बीजेपी को एक समुदाय तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि हिंदुत्व की विचारधारा पर आगे बढ़ना चाहिए। 

‘द हिंदू’ के मुताबिक़, इस फ़ैक्टर के तहत जो नाम चर्चा में हैं, उनमें वोक्कालिगा समुदाय से आने वाले राष्ट्रीय सचिव सीटी रवि और उप मुख्यमंत्री सीएन अश्वथ नारायण का नाम शामिल है। वोक्कालिगा लिंगायत के बाद प्रमुख समुदाय है और इसका बड़ा हिस्सा कांग्रेस का समर्थन करता है। 

पार्टी में कुछ लोगों का मानना है कि इस पद पर आरएसएस से जुड़े किसी शख़्स को बिठाया जाना चाहिए जैसे नरेंद्र मोदी को 2001 में गुजरात में मुख्यमंत्री बनाया गया था। ऐसे लोगों में पार्टी के महासचिव (संगठन) बीएल संतोष का नाम चल रहा है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी का नाम भी चर्चा में है।

युवा फ़ैक्टर 

एक और फ़ैक्टर युवाओं को वरीयता देने का है। ‘द हिंदू’ के मुताबिक़, हाईकमान 50 साल तक के किसी नेता को मुख्यमंत्री बनाना चाहता है जो आगे 10 साल तक राज्य में पार्टी का नेतृत्व कर सके। 

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इन नामों की चर्चा 

जिन दावेदारों के नाम की सबसे ज़्यादा चर्चा है, उनमें राज्य के खनन मंत्री मुरूगेश निरानी का भी नाम है। क्योंकि हालिया दिनों में निरानी ने कई बार दिल्ली का दौरा कर अमित शाह सहित कई बड़े नेताओं के साथ मुलाक़ात की है। निरानी का भी लिंगायत समुदाय में अच्छा प्रभाव माना जाता है। इसके अलावा लिंगायत समुदाय के विधायक अरविंद बेल्लाड ने भी दिल्ली में डेरा डाला हुआ है। 

इसके अलावा जिन नेताओं ने दिल्ली की परिक्रमा बीते दिनों में की है, उनमें लिंगायत समुदाय से आने वाले उद्योग मंत्री जगदीश शेट्टार, आदिवासी समाज से आने वाले मंत्री बी. श्रीरामुलु का भी नाम शामिल है। 

मुरूगेश निरानी की उम्र 56 साल, प्रहलाद जोशी की उम्र 58 साल, सीटी रवि की उम्र 54 साल. अश्वथ नारायण की उम्र 52 साल और बीएल संतोष और अरविंद बेल्लाड की उम्र 51 साल है। इनमें से किसी एक नाम पर हाईकमान मुहर लगा सकता है। 

आरएसएस पर हमला

इस बीच, लिंगायत समुदाय के संत श्री संगना बसवा स्वामी ने कहा है कि बीएस येदियुरप्पा को हटाए जाने के पीछे आरएसएस की साज़िश है क्योंकि यह जाति आधारित संगठन है और इसके बाद उदार मन वाले नेता नहीं हैं। उन्होंने चेताया है कि अगर बीजेपी येदियुरप्पा को हटाती है तो वह कर्नाटक में अपना वजूद खो देगी और इसका फ़ायदा जेडी(एस) या कांग्रेस को होगा। 

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में मराठी युवाओं ने बीजेपी को सत्ता में लाने के लिए मेहनत की लेकिन आरएसएस ने ब्राह्मण समुदाय से आने वाले देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बना दिया। 

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येदियुरप्पा ने की थी अपील

येदियुरप्पा ने हाल ही में ट्वीट कर अपने समर्थकों से अपील की थी कि वे उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने की ख़बरों को लेकर किसी तरह का प्रदर्शन न करें। इस ट्वीट में येदियुरप्पा ने ख़ुद को पार्टी का समर्पित कार्यकर्ता बताया था। 

बीते शुक्रवार को मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने दिल्ली आकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात की थी। इसके बाद येदियुरप्पा बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी मिले थे। 

इन मुलाक़ातों के बाद मीडिया में ऐसी चर्चा है कि येदियुरप्पा अपने पद से इस्तीफ़ा देंगे और बीजेपी हाईकमान नए मुख्यमंत्री का नाम तय करने में जुटा है। 

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क़मर वहीद नक़वी
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