loader

कर्नाटक : कोरोना रोगियों के शव गड्ढे में फेंके, प्रशासन ने दिया जाँच का आदेश

कर्नाटक में मन को झकझोड़ने वाली एक घटना सामने आई है, जिससे यह पता चलता है कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण के दौर में हम कितने संवेदनहीन हो गए हैं। बेल्लारी ज़िले में कोरोना से मारे गए 8 लोगों के शवों को प्लास्टिक में लपेट कर एक बड़े गड्ढे में फेंक दिया गया। 

प्रशासन ने की पुष्टि

इस घटना की पुष्टि करते हुए बेल्लारी के उपायुक्त एस. एस. नकुल ने कहा कि शवों को प्लास्टिक में लपेटना कोरोना दिशा-निर्देशों के अनुकूल ही है, पर इसका एक मानवीय पहलू भी है और उस पक्ष की जाँच की जा रही है। 

उन्होंने एनडीटीवी से कहा, ‘हम इस मामले की जाँच कर रहे हैं। आप वीडियो को देखें तो पाएंगे कि शवों को ठीक से पैकेज किया गया है। नकुल ने इसके आगे कहा, 

‘हमें मानवीय पहलू पर विचार करना है। इसलिए ही जाँच का आदेश दिया गया है। यह सच है कि हमें शवों से मानवीय व्यवहार करने के बारे में भी जागरुकता बढ़ाने की ज़रूरत है।’


एस. एस. नकुल, उपायुक्त, बेल्लारी

जाँच का आदेश

उन्होंने कहा कि ‘हर शव की अंत्येष्टि अलग-अलग की जानी चाहिए थी। शवों के इस तरह अंतिम संस्कार करने वाली टीम को हटा दिया गया है, प्रशिक्षित किए गए लोगों की नई टीम बनाई जा रही है।’
इसके साथ ही ज़िला प्रशासन ने इन मृतकों के परिजनों से माफ़ी भी माँगी है।
मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा ने इस व्यवहार को ‘अमानवीय और दर्दनाक’ क़रार दिया और अपील की कि वे कोरोना से मारे गए लोगों के शवों से अच्छा सलूक करें और उनकी अंत्येष्टि ठीक से करें।

विपक्ष का हमला

इस घटना पर राजनीति भी शुरू हो चुकी है। मुख्य विपक्ष जनता दल सेक्युलर ने सरकार की तीखी आलोचना करते हुए ट्वीट किया, ‘सावधान! यदि आपकी या आपके किसी परिजन की मौत कोरोना से हुई तो बीजेपी की सरकार शव के साथ ऐसा ही सलूक करेगी, आपके शव को दूसरे कई शवों के साथ एक ही गड्ढे में फेंक देगी।’ 

जनता दल सेक्युलर ने तंज करते हुए कहा, ‘सरकार मीडिया में रोज़ाना अच्छी तरह से नियोजित जिस कोरोना प्रबंधन की बात करती है, वह यही है।’
इसके पहले आंध्र प्रदेश का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें देखा ज सकता था कि एक शव को मिट्टी काटने वाली बड़ी मशीन से घसीट कर ले जाया जा रहा है।
इसी तरह पुड्डुचेरी के एक वीडियो में देखा गया था कि पीपीई पहने हुए चार लोगों ने एक शव को गड्ढे में फेंक दिया और उसके बाद एक दूसरे आदमी ने ‘थम्स अप’ कर इस पर शाबाशी दी थी। 

केंद्र सरकार ने मार्च महीने में ही कोरोना से जुड़े दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसमें कहा गया था कि कोरोना से मारे गए लोगों के शवों को प्लास्टिक के बॉडी बैग में रख कर ले जाया जाए। 

'सत्य हिन्दी'
की ताक़त बनिए

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

कर्नाटक से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें