कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने मोहन भागवत के उस बयान पर पलटवार किया है जिसमें उन्होंने कहा था कि 'आरएसएस को रजिस्ट्रेशन की ज़रूरत नहीं है'। प्रियांक ने कहा कि संवैधानिक लोकतंत्र में किसी भी संस्था को यह विशेषाधिकार प्राप्त नहीं है।
प्रियांक खड़गे और मोहन भागवत
कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने RSS के रजिस्ट्रेशन और फंडिंग का हिसाब देने से इनकार करने वाले संघ प्रमुख मोहन भागवत से पूछा है कि संघ का पैसा कहाँ से आता है? संघ क़ानून की पड़ताल से परे क्यों है? प्रियांक ने आरएसएस की कानूनी स्थिति पर अपना रुख दोहराते हुए कहा कि संवैधानिक लोकतंत्र में कोई भी संस्था क़ानूनी जाँच से ऊपर नहीं है। उन्होंने आरएसएस को कानून के दायरे में आने और जवाबदेही मानने को कहा है। मंत्री ने क़ानून का पालन करने और अपने अधिकारियों या क़ानूनी सलाहकारों को जवाब देने के लिए भेजने को कहा है। प्रियांक ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भागवत और आरएसएस से बड़े कई सवाल किए हैं।
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "मोहन भागवत ने कहा- 'क्या हम कुछ गुप्त रूप से कर रहे हैं? हम संघ के नाम पर खुलेआम ऐसा कर रहे हैं।' मैं भी यही पूछ रहा हूँ। अगर यह संघ के नाम पर किया जा रहा है, तो असल में संघ क्या है? इसके पीछे कौन लोग हैं? आपका पैसा कहां से आता है? मैं भी यही पूछ रहा हूं। वह भी यही कह रहे हैं और हम भी यही कह रहे हैं।"
आरएसएस से कौन-कौन लोग जुड़े हैं, इसको लेकर प्रियांक का यह सवाल बेहद अहम इसलिए है क्योंकि जब कभी भी संघ से कथित तौर पर जुड़े लोगों को लेकर सवाल उठता है तो संघ उनसे किनारा करता हुआ दिखता है। ऐसे आरोप इस पर लगातार लगते रहे हैं।
प्रियांक की यह प्रतिक्रिया तब आई है जब केरल में एक कार्यक्रम में भागवत ने कहा, 'आरएसएस को रजिस्ट्रेशन की ज़रूरत नहीं है क्योंकि यह सरकार से कोई फंड नहीं लेता। पिछले 100 साल से संगठन बिना रजिस्ट्रेशन के काम कर रहा है। पहले किसी ने भी यह सवाल नहीं उठाया। हिंदू धर्म भी रजिस्टर्ड नहीं है। कई अन्य संस्थाएं भी बिना रजिस्ट्रेशन के काम करती हैं। 100 साल से ज़्यादा समय में किसी ने हमसे नहीं कहा कि हमें रजस्टर्ड होना ही होगा।'
गृहमंत्री हूँ, आधिकारिक तौर पर पूछ रहा हूँ: प्रियांक
भागवत के जवाब वाला यह वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद प्रियांक ने कहा, "मेरा उनसे (आरएसएस) पुराना नाता है। मैं अभी एक हफ़्ते पहले ही गृह मंत्री बना हूं। पहले मैं अनौपचारिक रूप से पूछ रहा था; अब मैं आधिकारिक तौर पर पूछ रहा हूं। मोहन भागवत ने इस पत्र का जवाब नहीं दिया है। उनका जवाब 13 जून को त्रिशूर में आया था, और ज़ाहिर है, मेरा पत्र भी 13 जून का ही था। हालाँकि, इसे कल जारी किया गया और कल यानी 15 जून को भेजा गया।"
'आरएसएस की जवाबदेही ज़रूरी'
इससे पहले प्रियांक खड़गे ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि आरएसएस को सांस्कृतिक संगठन बनकर रहने का पूरा अधिकार है। यह उनकी पसंद है। लेकिन वे जब देश की सामाजिक और राजनीतिक जिंदगी पर इतना बड़ा असर डाल रहे हैं तो जवाबदेही से मुंह नहीं मोड़ सकते। उन्होंने याद दिलाया कि बीजेपी खुद आरएसएस को अपना आइडियोलॉजिकल पैरेंट मानती है। आरएसएस का प्रभाव बहुत बड़ा है, इसलिए उनका कहना कि हमारा कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं, इसलिए जवाबदेही नहीं चाहिए, यह बात सही नहीं है।
चंदा, दफ्तर और टैक्सपेयर का पैसा...
प्रियांक खड़गे ने आरएसएस की गतिविधियों का ज़िक्र करते हुए कहा कि उनके 2500 से ज़्यादा सहयोगी संगठन हैं, जिनके ज़रिए देश और विदेश से चंदा आता है। दिल्ली समेत कई राज्यों की राजधानियों में उनके बड़े-बड़े दफ्तर हैं। आरएसएस प्रमुख को एडवांस्ड सिक्योरिटी लायसन प्रोटोकॉल मिला हुआ है और दूसरे आरएसएस कार्यकर्ताओं को भी सरकारी सुरक्षा प्रोटोकॉल टैक्सपेयर के पैसे से मिलते हैं। उन्होंने कहा, जनता का हक है कि यह पता चले कि क्या आरएसएस हर नागरिक की तरह कानून का पालन कर रहा है या नहीं। कानूनी मान्यता ले लेने से यह सारी दुविधा ख़त्म हो जाएगी। प्रियांक खड़गे
कर्नाटक के गृह मंत्री
'धर्म की तुलना गलत और बेतुकी'
मोहन भागवत ने आरएसएस की तुलना हिंदू धर्म से की थी और कहा था कि धर्म को रजिस्ट्रेशन की ज़रूरत नहीं होती। प्रियांक खड़गे ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, 'यह दलील पूरी तरह ग़लत और बेतुकी है। आरएसएस सिर्फ 100 साल पुराना संगठन है। यह किसी धर्म का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता। किसी भी सरकार ने कभी किसी धर्म को रजिस्टर करने को नहीं कहा।'
प्रियांक खड़गे ने जोर देकर कहा कि उन्हें आरएसएस की सांस्कृतिक, सामाजिक, राजनीतिक या कोई भी क़ानूनी गतिविधि पर कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा, 'वे स्कूल चला सकते हैं, सेवा संगठन चला सकते हैं, थिंक टैंक बना सकते हैं या संगीत अकादमी भी खोल सकते हैं। बस एक ही शर्त है- बाकी हर संगठन की तरह पारदर्शिता से काम करें और कानून का पालन करें। इसी वजह से उन्होंने लिखित जवाब मांगा है।'
'सवाल का जवाब नहीं देना' चिंता की बात: प्रियांक
प्रियांक खड़गे ने कहा कि सबसे ज़्यादा चिंता की बात है मोहन भागवत का यह कहना कि हमें किसी सवाल का जवाब देने की जरूरत नहीं है। खासकर तब जब वे टैक्सपेयर के पैसे से सुरक्षा सुविधाएं ले रहे हैं। उन्होंने कहा, 'यह सोच कि जवाबदेही वैकल्पिक है और हम कानून से ऊपर हैं- संवैधानिक लोकतंत्र में स्वीकार नहीं की जा सकती। चाहे कोई संगठन कितना भी पुराना या प्रभावशाली क्यों न हो। प्रियांक ने आगे कहा, "भारत में, गृह मंत्री, विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री को ऐसी सुरक्षा दी जाती है। मोहन भागवत जी को सुरक्षा कौन देता है? और किसके पैसे से यह सुरक्षा दी जाती है? टैक्स देने वालों के पैसे से, है ना?... खतरे का आकलन मैं नहीं करता; यह केंद्र सरकार करती है। अगर उन्हें लगता है कि सुरक्षा जारी रहनी चाहिए, तो रहने दें। लेकिन मैं यह पूछ रहा हूँ कि खतरे का स्तर असल में क्या है?"
प्रियांक खड़गे ने आरएसएस को खुला पत्र लिखकर उसके क़ानूनी दर्जे, वित्तीय पारदर्शिता और संवैधानिक जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। आरएसएस की ओर से इन सवालों के जवाब नहीं दिए गए हैं।