चुनाव आयोग के एक दस्तावेज पर बीजेपी की सील! केरल में यह मामला सामने आने पर हंगामा मच गया है। चुनाव आयोग और बीजेपी में साठगांठ होने का जो आरोप विपक्षी दल लगातार लगाते रहे हैं, उसको पुष्ट बताने का मौक़ा अब उन्हें चुनाव आयोग के इस आधिकारिक ख़त से ही मिल गया। यह ख़त सभी राजनीतिक दलों को भेज दिया गया। चुनाव आयोग ने इसे ग़लती मान भी लिया है। लेकिन केरल में सत्ताधारी सीपीआई(एम) और केरल कांग्रेस ने इसे गंभीर मामला बताते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। हालाँकि, चुनाव आयोग ने इस पर सफ़ाई जारी की और इसे एक क्लेरिकल एरर यानी दफ़्तर की छोटी-मोटी ग़लती बताया, लेकिन राज्य में 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इस पर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।

चुनाव आयोग के ख़त पर बीजेपी का ठप्पा कैसे?

दरअसल, चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक पार्टियों, जिला चुनाव अधिकारियों और रिटर्निंग अधिकारियों को एक पत्र भेजा था। यह पत्र 20 मार्च को भेजा गया। इसमें 19 मार्च 2019 का एक पुराना दस्तावेज संलग्न था। यह दस्तावेज उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने के बारे में सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फ़ैसले पर आधारित FAQ यानी अक्सर पूछे जाने वाले सवाल था।
लेकिन इस पत्र के नीचे चुनाव आयोग की सील नहीं थी, बल्कि बीजेपी केरल यूनिट की सील लगी हुई थी। आरोप है कि ईमेल भी किसी प्राइवेट एड्रेस से भेजा गया था, न कि आधिकारिक चुनाव आयोग के एड्रेस से। सीपीआई(एम) ने इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कीं और कहा कि कई पार्टियों को यह मिला है। उन्होंने इसे 'क्लेरिकल एरर' नहीं, बल्कि बड़ी साजिश बताया।

'ईसीआई, बीजेपी का नियंत्रण करने वाला एक ही'

सीपीआई(एम) ने एक्स पर पोस्ट किया, "यह कोई राज नहीं कि एक ही पावर सेंटर चुनाव आयोग और बीजेपी दोनों को कंट्रोल करता लगता है। फिर भी कम से कम दो अलग डेस्क तो रखते। अब तो वह भी ज़रूरी नहीं लगता। सील आसानी से बदल दी जाती हैं। चुनाव आयोग के पत्र पर बीजेपी की सील! जैसे पुराना आरोप था कि कोई भी बटन दबाओ, कमल ही निकलता है, वैसे ही एक और 'संयोग'।"
केरल कांग्रेस ने भी सवाल उठाए लिखा, "प्रिय चुनाव आयोग, आपने सभी राज्यों को जो पत्र भेजा, उसमें केरल बीजेपी की सील है। क्या आप बीजेपी के ऑफिस से काम कर रहे हैं? उनकी सील कैसे मिल गई? या यह बीजेपी का पत्र है आपके लेटरहेड पर? कृपया सफ़ाई दें।"

चुनाव आयोग, सीईओ की सफाई

केरल के मुख्य चुनाव अधिकारी यानी सीईओ रथन यू. खेलकर ने आधिकारिक बयान जारी कर इस पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह 'क्लेरिकल एरर' यानी दफ्तर के काम वाली गलती था, जिसे तुरंत पकड़ लिया गया और ठीक कर दिया गया।
केरल सीईओ ने कहा, 'बीजेपी की केरल इकाई ने हाल ही में सीईओ कार्यालय से संपर्क कर उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड के प्रकाशन से जुड़े 2019 के दिशानिर्देशों पर सफ़ाई मांगी थी। अपने अनुरोध के साथ पार्टी ने 2019 के मूल निर्देश की एक फोटोकॉपी जमा की थी। उनके द्वारा दी गई उस प्रति पर पार्टी की मुहर लगी हुई थी। एक चूक के कारण कार्यालय में जमा किए गए दस्तावेज़ पर पार्टी की सील को देख नहीं पाया और अनजाने में उसे अन्य राजनीतिक दलों को भी भेज दिया। विचाराधीन दिशानिर्देशों में 2019 के बाद से संशोधन किए गए हैं, जिनकी सूचना पहले ही सभी राजनीतिक संस्थाओं को दी जा चुकी है।'
सीईओ द्वारा जारी बयान में कहा गया है, 'मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने इस चूक का पता चलते ही उसे मान लिया। इसके बाद 21 मार्च को उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने एक औपचारिक पत्र जारी कर उस ग़लत दस्तावेज़ को वापस ले लिया। वापसी की सूचना सभी राजनीतिक दलों, जिला निर्वाचन अधिकारियों और रिटर्निंग अधिकारियों को भेज दी गई थी।'

विपक्षी दल क्यों हैं चुनाव आयोग पर हमलावर?

कांग्रेस, टीएमसी, आरजेडी, समाजवादी पार्टी, आप जैसे विपक्षी दलों ने हाल में चुनाव आयोग और बीजेपी के बीच साठगांठ के कई गंभीर आरोप लगाए हैं। ये आरोप मुख्य रूप से मतदाता सूची में धांधली, वोट चोरी, और चुनाव प्रक्रिया में पक्षपात पर आधारित हैं।
विपक्ष का दावा है कि चुनाव आयोग बीजेपी के फायदे के लिए विपक्षी समर्थकों के नाम मतदाता सूची से मनमाने ढंग से हटा रहा है, जबकि बीजेपी समर्थक फर्जी वोटरों को जोड़ रहा है। राहुल गांधी ने 2025 में कई बार कहा कि चुनाव आयोग और बीजेपी की सांठगांठ से वोट चोरी हुई। उन्होंने कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में 1 लाख से ज्यादा फर्जी वोट का आरोप लगाया। ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर के बाद मतदाता सूची से नाम हटाने को बीजेपी की मदद के लिए साजिश बताया।
कांग्रेस और अन्य दलों ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग बीजेपी की सुविधा के अनुसार ही चुनाव की तारीखें घोषित करता है। 5 राज्यों के चुनाव ऐलान पर कांग्रेस सांसदों ने कहा कि बीजेपी जब चाहती है तभी आयोग ऐलान करता है। विपक्ष ने दावा किया है कि ईवीएम में गड़बड़ी, वोटर लिस्ट में डुप्लिकेट, फेक एड्रेस, एक ही पते पर कई वोटर और फॉर्म 6 का दुरुपयोग करके बीजेपी को फायदा पहुंचाया जा रहा है। हालाँकि, चुनाव आयोग ने इन सभी आरोपों को बार-बार बेबुनियाद, गलत और राजनीतिक हताशा करार दिया है। बीजेपी ने भी विपक्ष पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया।

केरल में चुनाव से पहले हंगामा

बहरहाल, केरल में अभी चुनावी माहौल गरम है। सीपीआई(एम) का एलडीएफ़ सत्ता में है। विपक्ष में कांग्रेस का यूडीएफ़ और बीजेपी का एनडीए है। हाल में वोटर लिस्ट की एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भी कई विवाद हुए हैं, जहां पार्टियां एक-दूसरे पर धांधली के आरोप लगा रही हैं। यह ताज़ा घटना चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है, खासकर जब चुनाव नजदीक हैं।