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एम. नागेश्वर राव पर सुप्रीम कोर्ट सख़्त, 1 लाख का जुर्माना

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई के अंतरिम निदेशक एम. नागेश्वर राव को अदालत की अवमानना का दोषी पाया है। राव को कोर्ट के उठने तक खड़ा रहना पड़ेगा और उन पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। मुज़फ़्फरपुर शेल्टर होम मामले में जाँच अधिकारी एके शर्मा के तबादले पर सुप्रीम कोर्ट ने सख़्त नाराज़गी जताई थी। 

सुप्रीम कोर्ट में दायर किए गए अपने हलफ़नामे में राव ने कहा कि वह इस बात को स्वीकार करते हैं कि उन्होंने जाँच अधिकारी एके शर्मा का ट्रांसफ़र करने के लिए कोर्ट से अनुमति न लेकर ग़लती की। राव ने कहा, 'मैं अपनी ग़लती के लिए बिना शर्त माफ़ी माँगता हूँ और मैं सपने में भी माननीय अदालत के आदेश का उल्लंघन करने के बारे में नहीं सोच सकता।' 

सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि जानबूझकर अदालत की अवमानना की गई है। राव का बचाव करते हुए अटॉर्नी जरनल केके वेणुगोपाल ने कहा कि राव का 32 साल का बेदाग करियर रहा है, राव ने ग़लती मान ली है, इसलिए अदालत उन पर नरम रुख दिखाए। वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार किया कि इस मामले में कई ग़लतियाँ की गईं। उन्होंने कहा कि राव ने ऐसा जानबूझकर नहीं किया। 

कोर्ट ने 7 फ़रवरी को हुई पिछली सुनवाई में कहा था कि पहली नज़र में यह लगता है कि राव ने बिना कोर्ट की अनुमति लिए सीबीआई के ऑफ़िसर एके शर्मा का ट्रांसफ़र करके अदालत की अवमानना की है। बता दें कि कोर्ट ने उससे पहले हुई सुनवाई में कहा था कि शर्मा का ट्रांसफ़र नहीं किया जाएगा। शर्मा मुज़फ़्फ़रपुर शेल्टर होम मामले की जाँच कर रहे थे। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में कहा था कि नागेश्वर राव आपने कोर्ट से खिलवाड़ किया है, भगवान आपकी मदद करे'।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राव को 12 फ़रवरी को अदालत के सामने पेश होने को कहा था। मुज़फ़्फरपुर शेल्टर होम मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट का रुख बेहद सख़्त रहा। कोर्ट ने राव के साथ ही एक अन्य अधिकारी को भी कोर्ट के सामने उपस्थित होने को कहा है। 

शेल्टर होम में 34 लड़कियों से दुष्कर्म होने के इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी बिहार सरकार की पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा की गिरफ़्तारी न होने पर  बिहार पुलिस को जमकर लताड़ लगाई थी। 

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