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लाख कोशिशों के बाद भी नहीं हो सका आप-कांग्रेस का गठबंधन

लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) के बीच आख़िरकार गठबंधन नहीं हो पाया। गठबंधन को लेकर दोनों दलों के नेताओं के बीच लंबे समय तक जुबानी जंग के साथ कोशिशें भी चलती रहीं। दिल्ली में 16 अप्रैल से नामांकन शुरू हो चुके हैं और कल यानी 23 अप्रैल को नामांकन का अंतिम दिन है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि दोनों दल अंतिम समय तक गठबंधन की कोशिश में लगे रहे लेकिन यह नहीं हो सका। दिल्ली में छठे चरण में 12 मई को वोट डाले जाने हैं।
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बता दें कि कुछ दिन पहले ही पीसी चाको ने कहा था कि 'आप' के साथ गठबंधन के सभी दरवाजे बंद हो चुके हैं और चाको ने कहा था कि कांग्रेस दिल्ली की सातों सीटों पर जल्द उम्मीदवार घोषित करेगी।

उससे कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने गठबंधन करने से इनकार कर दिया है। लेकिन फिर भी ख़बरें सामने आ रही थीं कि दोनों दलों के नेता गठबंधन को लेकर कोशिश कर रहे हैं। 

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कुछ दिन पहले इस मसले पर कांग्रेस के भीतर ही लेटर वॉर छिड़ गया था और पार्टी दो गुटों में बँट गई थी। एक लेटर लिखा गया था अजय माकन के नेतृत्व में दिल्ली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्षों की ओर से जबकि दूसरा लेटर लिखा गया था प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित के नेतृत्व में दिल्ली कांग्रेस के तीन कार्यकारी अध्यक्षों की ओर से। 

दिल्ली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्षों अरविंदर सिंह लवली, सुभाष चोपड़ा की ओर से अजय माकन के नेतृत्व में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को लिखे गए लेटर में ‘आप’ के साथ गठबंधन की वकालत की गई थी। साथ ही इस बात का भी दावा किया गया था कि दिल्ली में कांग्रेस के 14 जिला अध्यक्षों में से 12 जिला अध्यक्ष ‘आप’ के साथ गठबंधन चाहते हैं। 

यहाँ यह बताना ज़रूरी है कि यही अजय माकन प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए ‘आप’ से गठबंधन का खुलेआम विरोध करते थे। दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के नेतृत्व में लिखे गए लेटर में कहा गया था कि ‘आप’ के साथ क़तई गठबंधन नहीं होना चाहिए। इस लेटर में दिल्ली कांग्रेस के प्रभारी पीसी चाको की ओर से दिल्ली में कराए गए सर्वे का भी विरोध किया गया था। 

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