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यूपी में बीजेपी को नुक़सान पहुंचाने की रणनीति है प्रियंका की

कांग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनने के बाद प्रियंका गांधी शनिवार को दूसरी बार लखनऊ में होंगी। उनकी सक्रियता और ज़मीनी स्तर पर तैयारियाँ साफ़ इशारा करती हैं कि सपा-बसपा गठबंधन का जूनियर पार्टनर बन कर उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के उतरने की संभावनाएँ ख़त्म होती जा रही हैं। 
कांग्रेस की ओर से जारी प्रत्याशियों की ताजा सूची ने इसे और पुख़्ता कर दिया। कांग्रेस की सूची में बदायूँ से सलीम इक़बाल शेरवानी को टिकट दिया गया है। वहाँ से सपा मुखिया अखिलेश के भाई धर्मेंद्र यादव वर्तमान में सांसद हैं। सपा के लिए एक और मजबूत सीट मानी जा रही मुरादाबाद से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर को उतारने के संकेत दे दिए गए हैं। सपा के बड़े नेताओं का कहना है कि महज 38 सीटों पर चुनाव लड़ने से उपजे बड़े पैमाने पर असंतोष को देखते हुए अब कांग्रेस के लिए कुछ सीट छोड़े जाने की गुंजाइश नही बची है। 
बीएसपी सुप्रीमो मायावती शुरु से ही कांग्रेस को गठबंधन में शामिल करने के ख़िलाफ़ हैं। ख़ुद कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि सपा-बसपा-रालोद गठबंधन में अपमानजनक तरीके से बेहद कम सीटों के साथ जाने का फ़ायदा नही है।

जातीय समूहों पर नज़र

प्रियंका के दो दिनों के दौरे में सपा-बसपा के कई बाग़ियों के कांग्रेस में शामिल होने की संभावना है। अपने इस दौरे में प्रियंका उत्तर प्रदेश में कई जातीय संगठनों के नेताओं के भी मुलाक़ात कर सकती हैं। टीम प्रियंका के सदस्य सपा-बसपा के कई एसे नेताओं से संपर्क साध रहे हैं, जिनका गठबंधन के चलते टिकट कटा है। इनमें मोहनलालगंज, सीतापुर, बलरामपुर, खीरी, सलेमपुर, राबर्ट्सगंज, आजमगढ़ और हमीरपुर-जालौन जैसी सीटों के क़द्दावर नेता शामिल हैं। ग़ैर यादव पिछड़े समुदायों पर भी प्रियंका की खास नज़र है। इसके लिए टीम प्रियंका इन जातियों के संगठनों के नेताओं से बात कर रही है। आने वाले दिनों में इनकी मुलाक़ात प्रियंका गांधी से करवाई जा सकती है।

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कांग्रेस के लिए तेज़ हुई दौड़

बीएसपी के 18, सपा के 9 और कांग्रेस के 11 प्रत्याशियों के एलान के साथ उत्तर प्रदेश की तसवीर काफ़ी साफ़ होने लगी है। जहां कांग्रेस ने 11 लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी तय किए थे, वहीं शुक्रवार को सपा ने पहले 6 फिर शाम को 3 और प्रत्याशियों के नामों का एलान कर दिया। इन 9 नामों में चार तो मुलायम परिवार के हैं। कन्नौज से डिंपल यादव, बदायूँ से धर्मेंद्र यादव, मैनपुरी से खुद मुलायम सिंह यादव और फिरोजाबाद से अक्ष्य यादव प्रत्याशी बनाए गए हैं।

तय है कि फ़िरोजाबाद में यादव परिवार के दो सदस्य आपस में ही टकराएंगे। यहाँ अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव अपनी पार्टी प्रगितशील लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के बैनर से तो चचेरे भाई रामगोपाल के बेटे वर्तमान सांसद अक्षय यादव सपा के टिकट पर एक बार फिर मैदान में होंगे। कांग्रेस ने इस सीट को ज्यादा तवज्जो नही दी है, जबकि 2009 में यहाँ से राज बब्बर अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव को हराकर सांसद चुने गए थे।  
कांग्रेस की निगाह सपा-बसपा के टिकट से वंचित कई नेताओं पर है। इनमें आजमगढ़ के चर्चित यादव बंधुओं में से एक, बीजेपी के कुछ टिकट कटने की पक्की ख़बर से घबराए नेता और बीएसपी के कई नेता शामिल हैं।
प्रदेश कांग्रेस के एक नेता बताते हैं कि प्रियंका के दो दिनों के प्रवास के दौरान एक दर्जन से  ज़्यादा बड़े नेता पार्टी का दामन थामते नज़र आएंगे।

लचर संगठन प्रियंका की परेशानी

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पहली बार यूपी के दौरे से वापस जाने के बाद प्रियंका के आने में लगी देर का कारण पूर्वी उत्तर प्रदेश में संगठन की कमज़ोरी और जिताऊ प्रत्याशियों का न होना है। पूर्वी उत्तर प्रदेश की ज्यादातर सीटों पर कांग्रेस को मजबूत प्रत्याशियों के लिए दूसरे दलों का सहारा लेना पड़ रहा है। संगठन की लचर हालत को देखते हुए प्रियंका को अपनी रणनीति पर दोबारा काम करना पड़ा है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कांग्रेस संगठन की खस्ता हालत से भी प्रियंका परेशान हैं। लखनऊ में शहर तक में कांग्रेस का संगठन शून्य है, लिहाजा किसी भी कार्यक्रम को आगे ले जाने से पहले कुछ अहम शहरों में तेज़ तरार्र नौजवान पदाधिकारियों को कमान सौंपी जा सकती है।

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