मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने बड़ी जीत दर्ज करते हुए सीट अपने पास बरकरार रखी है। कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने बीजेपी के आशुतोष तिवारी को 6016 वोटों से हराया। यह चुनाव न सिर्फ कांग्रेस के लिए राजनीतिक बढ़त का संकेत माना जा रहा है, बल्कि बीजेपी के भीतर उम्मीदवार चयन को लेकर उठे असंतोष की भी परीक्षा थी। नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर इस बार बीजेपी ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था।

जिला निर्वाचन अधिकारी एवं दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े के अनुसार, मतगणना के सभी 15 राउंड पूरे होने के बाद कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह को 66757 वोट मिले, जबकि बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 60741 वोट प्राप्त हुए। आज़ाद समाज पार्टी के उम्मीदवार दामोदर यादव 22527 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। मतगणना के दौरान एक समय कांग्रेस उम्मीदवार की बढ़त 12607 वोटों तक पहुँच गई थी। हालाँकि अंतिम चरणों में बीजेपी ने अंतर कुछ कम किया, लेकिन वह हार टालने में सफल नहीं हो सकी। इस उपचुनाव में कुल 21 उम्मीदवार मैदान में थे।

दतिया चुनाव में कांग्रेस-बीजेपी को कितने वोट मिले

दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव इसलिए कराया गया क्योंकि कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को अप्रैल 2026 में दिल्ली की एक अदालत ने धोखाधड़ी के मामले में तीन साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता ख़त्म हो गई और सीट खाली हो गई।

नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटना बीजेपी पर भारी पड़ा?

इस चुनाव की सबसे बड़ी राजनीतिक चर्चा बीजेपी के उम्मीदवार चयन को लेकर रही। पार्टी ने पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को दोबारा टिकट नहीं दिया और उनकी जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया।

2023 के विधानसभा चुनाव में नरोत्तम मिश्रा इसी सीट से कांग्रेस के राजेंद्र भारती से लगभग 7700 वोटों से हार गए थे। टिकट कटने के बाद बीजेपी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आया। कई समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किए, सड़कें जाम कीं और कुछ नेताओं ने संगठनात्मक पदों से इस्तीफे तक की घोषणा कर दी।

नरोत्तम मिश्रा के बूथ पर भी कांग्रेस आगे

चुनाव परिणाम में एक दिलचस्प तथ्य यह भी सामने आया। नरोत्तम मिश्रा के पोलिंग बूथ नंबर 121 पर भी कांग्रेस को बढ़त मिली। यहां कांग्रेस को 291 वोट, जबकि बीजेपी को 264 वोट मिले।

दतिया उपचुनाव

परिणाम घोषित होते ही भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में कार्यकर्ताओं ने मिठाइयां बांटी और जीत का जश्न मनाया। जीत के बाद घनश्याम सिंह ने कहा कि यह परिणाम 'बीजेपी के अंत की शुरुआत' है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस 2028 में मध्य प्रदेश में सरकार बनाएगी और पार्टी देश में भी मज़बूत होकर उभरेगी।

घनश्याम सिंह ने बताईं अपनी प्राथमिकताएँ

जीत के बाद घनश्याम सिंह ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता दतिया में सांप्रदायिक सौहार्द को मज़बूत करना और राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति खत्म करना होगी। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में जुआ और सट्टे के नेटवर्क पर कार्रवाई की जाएगी।

जीत पर कांग्रेस का दावा

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस परिणाम को दतिया की जनता की जीत बताया। उन्होंने कहा कि मतदाताओं ने बीजेपी सरकार के 'भ्रष्टाचार, आतंक और अहंकार' को नकार दिया है। पटवारी ने दावा किया कि दतिया के मतदाताओं ने 2028 के विधानसभा चुनाव के लिए बदलाव की नींव रख दी है और यह परिणाम बीजेपी के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश है।

बीजेपी की हार के पीछे क्या रहे कारण?

बीजेपी की हार के पीछे कई वजहें रहीं-
  • नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटने से पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ा।
  • नया उम्मीदवार आशुतोष तिवारी पूरी तरह अपना नेतृत्व स्थापित नहीं कर पाए।
  • चुनाव प्रचार लगातार नरोत्तम मिश्रा की राजनीति के इर्द-गिर्द घूमता रहा।
  • टिकट कटने से नाराज़ कार्यकर्ताओं का उत्साह कम दिखाई दिया।
  • कम मतदान ने भी बीजेपी के बूथ प्रबंधन पर सवाल खड़े किए।
दतिया उपचुनाव में 71.44 प्रतिशत मतदान हुआ, जो 2023 विधानसभा चुनाव के लगभग 80 प्रतिशत मतदान से काफी कम रहा। माना जा रहा है कि कम मतदान का असर सत्तारूढ़ बीजेपी को अधिक झेलना पड़ा। महिला मतदाताओं की भागीदारी भी पुरुषों की तुलना में कम रही।

कांग्रेस के भीतर भी था विवाद

हालांकि कांग्रेस की जीत के बावजूद पार्टी के अंदर भी मतभेद सामने आए। पूर्व विधायक राजेंद्र भारती पर चुनाव के दौरान पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ काम करने के आरोप लगे। चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इसके बावजूद कांग्रेस दतिया सीट बचाने में सफल रही।