अयोध्या राम मंदिर चोरी प्रकरण में मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह भी कूद पड़े हैं। उन्होंने 2 अक्टूबर से गांधी जयंती पर उज्जैन से अयोध्या की एक हज़ार किलोमीटर लंबी गैर राजनीतिक पदयात्रा का ऐलान किया है। इसमें पार्टी का झंडा, बैनर नहीं होगा।
दिग्विजय सिंह 2 अक्टूबर से उज्जैन से पदयात्रा शुरू करेंगे
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को ‘बचाने’ और अपने ही दल कांग्रेस को मुश्किलों में डालने के आरोपों में घिरे, पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने बड़ा दांव खेला है। दिग्विजय सिंह ने आने वाली 2 अक्टूबर गांधी जयंती के दिन, उज्जैन महाकाल मंदिर परिसर से रामलला मंदिर अयोध्या तक पदयात्रा का ऐलान किया है।
दिग्विजय सिंह के एलान को एक तीर से कई निशाने साध देने वाला करार दिया जा रहा है। उनके इस दांव से विपक्ष को कितना नुकसान होगा, ये बाद की बात है, लेकिन उनका ये कदम अपने ही दल से उठ रही आवाजों को बंद करने वाला जरूर माना जा रहा है।
राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का दान चोरी कांड, न केवल भारत बल्कि दुनिया भर के सनातनियों के बीच चर्चा का मुख्य केन्द्र है। तीन सप्ताह से ज्यादा का वक्त हो चुका है, लेकिन इस पूरे मसले पर राम को लाने का प्रपंच रचने वाले, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मौन हैं। संघ प्रमुख डॉ.मोहन भागवत का भी कोई बयान अब तक सामने नहीं आया है।
उज्जैन महाकाल मंदिर में भी घपले का आरोप
तमाम सुर्खियों और सवालों के बीच, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भाजपा पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने शुक्रवार को भोपाल में कुछ पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा, ‘उज्जैन के महाकाल मंदिर तीर्थ क्षेत्र में आरएसएस से जुड़े एक ट्रस्ट को सुंदरलाल पटवा के मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल में मंदिर से लगी बेशकीमती जमीन कौड़ियों के मोल अलॉट कर दी गई थी। बाद में जब मैं (दिग्विजय सिंह) मुख्यमंत्री बना था, तमाम आपत्तियां कीं थीं।’
दिग्विजय सिंह ने कहा, ‘पटवा द्वारा दी गई जमीन पर संघ से जुड़े ट्रस्ट ने धर्मशाला बनाई। सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना की। अब स्कूल तोड़कर 100 कमरों का एक आलीशान होटल इस भूमि पर बनाया जा रहा है। परिसर के मौजूदा निर्माण क्षेत्र में आरएसएस के लोग, आकर रूकते हैं। वीआईपी दर्शन करते हैं। किसी तरह का कोई हिसाब-किताब नहीं रखा जाता। ट्रस्ट में आने वाली राशि को ठिकाने लगा दिया जाता है।’
दिग्विजय सिंह ने कहा, ‘पटवा के दौर में आवंटित उज्जैन की इस प्राइम लैंड से जुड़े समस्त दस्तावेज उनके पास हैं।’
एक हजार किलोमीटर की पदयात्रा
दिग्विजय सिंह 79 साल के हो चुके हैं और 80वें बसंत की और अग्रसर हैं। उन्होंने एलान किया है, वे उज्जैन महाकाल परिसर से अयोध्या राममंदिर परिसर तक पदयात्रा करेंगे। दो अक्टूबर गांधी जयंती से आरंभ होने वाली यह पदयात्रा पूरी तरह से गैर राजनीतिक होगी। हर दिन 10 से 15 किलोमीटर वे पैदल चलेंगे।
दिग्विजय सिंह से जुड़े सूत्रों ने बताया, ‘यात्रा के लिए ग्रामीण, कस्बे एवं शार्ट रास्ता तय किया जा रहा है। यह यात्रा 50 दिनों के आसपास की होगी।’ दिग्विजय सिंह ने ये भी घोषणा की है कि ‘वे पूरी यात्रा के दौरान फेसबुक/ट्वीटर (एक्स) का उपयोग नहीं करेंगे।’ दिग्विजय सिंह की यात्रा को लेकर कांग्रेस संगठन की और से अभी किसी तरह की प्रतिक्रिया सामने नहीं आयी है। भाजपा का भी कोई रिएक्शन खबर लिखे जाने के वक्त तक नहीं आया था।
नर्मदा परिक्रमा कर चुके हैं दिग्विजय सिंह
शिवराज सिंह जब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तब दिग्विजय सिंह नर्मदा परिक्रमा किया था। उनकी यह यात्रा देश भर के मीडिया की सुर्खियां रही थी।
महात्मा गांधी-राहुल गांधी वाला बैनर लगाया
दिग्विजय सिंह ने भोपाल स्थित अपने सरकारी आवास के ठीक बाहर एक बैनर लगाया है। बैनर पर सबसे ऊपर ‘जय सिया राम’ लिखा है। जय सिया राम के बराबरी से, भगवान भोलेनाथ और मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम जी के चित्र हैं। इन चित्रों के ठीक नीचे, महात्मा गांधी और राहुल गांधी के चित्र अंकित हैं।
इस बैनर पर इबारद लिखी गई है, ‘हमारी आस्था के प्रतीक भगवान श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए समूचे देश के द्वारा दिए गए चंदा के चोरों एवं चढ़ावा चोरों का मेरे निवास पर प्रवेश निषेध है। आखिर में लिखा है, दिग्विजय सिंह।
हर सनातनी लगाए बैनर
मीडिया से बाचतीत में दिग्विजय सिंह ने मठ-मंदिर के पुजारियों और आमजनों से अपील की कि वे मठ-मंदिरों एवं अपने घरों के बाहर, इसी तरह के बैनर लगायें जो स्वयं दिग्विजय सिंह ने अपने सरकारी आवास के बाहर लगाया है।
राम जन्मभूमि ट्रस्ट पर करेंगे केस
दिग्विजय सिंह ने कहा है, ‘अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए उन्होंने 1 लाख 11 हजार रुपये चंदे के तौर पर दिए थे। चंदा चोरी, तमाम घपले-घोटाले और दान डकैती के बाद उन्होंने फैसला लिया है कि अपने वकीलों के जरिए अयोध्या में ट्रस्ट के खिलाफ केस करेंगे। अपनी दान की राशि लौटाने की मांग इस वाद में की जाएगी।’