मध्य प्रदेश के जिस राज्यसभा उपचुनाव में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी खड़े हैं वहाँ से उनके प्रतिद्वंद्वी दो निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन खारिज हो गए हैं। इनमें से एक को कांग्रेस का समर्थन प्राप्त था। कांग्रेस इस फैसले को अदालत में चुनौती देगी।
मध्य प्रदेश के जिस राज्यसभा उपचुनाव में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी खड़े हैं वहाँ से उनके प्रतिद्वंद्वी दो निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन खारिज होने पर बड़ा विवाद हो गया है। दोनों प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों के नामांकन खारिज होने के बाद केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का निर्विरोध चुना जाना तय माना जा रहा है। मंगलवार को नामांकन पत्रों की जांच के दौरान दो निर्दलीय उम्मीदवारों कांतें सयन्ना और कांग्रेस समर्थित राजकुमार लोहानी के पर्चे खारिज कर दिए गए। दोनों उम्मीदवारों ने हरदीप पुरी के नामांकन पर भी आपत्ति जताई थी। लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर ने पुरी के नामांकन को वैध ठहराया है। कांग्रेस ने इस फैसले को भारतीय लोकतंत्र पर हमला बताते हुए अदालत में चुनौती देने का ऐलान किया है।
नामांकन पत्रों की जांच के अंतिम दिन मंगलवार को निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन रद्द कर दिए जाने के फैसले के बाद कांग्रेस नेताओं ने रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश को अदालत में चुनौती देने की बात कही है। अधिकारी के मुताबिक, उपचुनाव का परिणाम 5 नवंबर को घोषित किया जाएगा। यह नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख भी है। यह राज्यसभा सीट केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। बीजेपी ने इस सीट के लिए हरदीप सिंह पुरी को उम्मीदवार बनाया है।
हरदीप पुरी के नामांकन पर कांग्रेस की आपत्तियाँ
हरदीप सिंह पुरी के नामांकन पत्रों को लेकर कांग्रेस और दो निर्दलीय उम्मीदवारों ने गंभीर सवाल उठाए थे। कांग्रेस नेता हेमंत कटारे, कांतें सयन्ना और राजकुमार लोहानी ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने पुरी के नामांकन पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। उनका कहना था कि पुरी की ओर से जमा किया गया चुनावी हलफनामा यानी फॉर्म 26 अधूरा और वैधानिक रूप से अमान्य है। आपत्तियों में मुख्य रूप से हलफनामे में संपत्ति के विवरण और नोटरी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए थे।रिटर्निंग ऑफिसर उमेश शर्मा ने इन आपत्तियों की जांच की। उन्होंने अपने आदेश में कहा कि हरदीप सिंह पुरी ने जनप्रतिनिधित्व कानून के किसी प्रावधान का उल्लंघन नहीं किया है। रिटर्निंग ऑफिसर के मुताबिक, पुरी के नामांकन पत्रों में कोई ऐसी कमी नहीं मिली जिसके आधार पर उन्हें खारिज किया जा सके।
कांग्रेस के सवाल
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने हरदीप सिंह पुरी के नामांकन को लेकर गंभीर वैधानिक सवाल उठाए हैं। पटवारी ने कहा कि बीजेपी के राज्यसभा उम्मीदवार हरदीप सिंह पुरी के नामांकन पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं और कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
कांग्रेस की ओर से उठाए गए प्रमुख सवाल हैं-
- कांग्रेस का आरोप है कि हलफनामे में पुरी की पत्नी के नाम और उनकी संपत्ति का पूरा विवरण नहीं दिया गया।
- जेनेवा स्थित अपार्टमेंट की संपत्ति के विवरण और उसके मूल्यांकन पर सवाल उठाए गए हैं।
- कांग्रेस ने विदेशी बैंक खातों से संबंधित संपत्ति के विवरण पर आपत्ति जताई है।
- नामांकन के साथ जमा किए गए शपथ पत्र की नोटरी प्रक्रिया की वैधानिकता पर भी सवाल उठाए गए हैं।
जीतू पटवारी ने सवाल किया कि जिस उम्मीदवार को बीजेपी राज्यसभा भेजना चाहती है उसके हलफनामे में इतनी गंभीर विसंगतियां क्यों हैं? उन्होंने बीजेपी से इन सवालों का जवाब देने की मांग की। पटवारी ने चुनाव आयोग से सभी आपत्तियों की निष्पक्ष और गंभीर जांच कराने की मांग भी की।
'यह भारतीय लोकतंत्र पर हमला'
नामांकन पत्र खारिज किए जाने के फैसले के बाद कांग्रेस नेता हेमंत कटारे और कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने अदालत जाने का ऐलान किया। दोनों नेताओं ने एक बयान में कहा, 'यह भारतीय लोकतंत्र पर हमला है। इतनी महत्वपूर्ण गलतियां होने के बावजूद नामांकन खारिज नहीं किया गया।' कांग्रेस नेताओं का कहना है कि हरदीप सिंह पुरी के नामांकन में उठाई गई आपत्तियों को गंभीरता से नहीं लिया गया। वे रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश को अदालत में चुनौती देंगे। इस तरह राज्यसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक विवाद अब कानूनी चुनौती की ओर बढ़ रहा है।
रिटर्निंग ऑफिसर ने क्या कहा?
नामांकन पत्रों की जांच करने वाले रिटर्निंग ऑफिसर उमेश शर्मा ने हरदीप सिंह पुरी के खिलाफ दर्ज आपत्तियों पर विचार किया। उन्होंने अपने आदेश में कहा कि पुरी ने जनप्रतिनिधित्व कानून के किसी प्रावधान का उल्लंघन नहीं किया है। उनके नामांकन पत्रों में कोई दोष नहीं पाया गया। इसी आधार पर पुरी का नामांकन वैध माना गया, जबकि दोनों निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन खारिज कर दिए गए। इस फैसले के बाद राज्यसभा उपचुनाव में पुरी के निर्विरोध चुने जाने का रास्ता साफ हो गया है।5 नवंबर को घोषित होगा परिणाम
अधिकारी के मुताबिक, राज्यसभा उपचुनाव का परिणाम 5 नवंबर को घोषित किया जाएगा। यह नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख है। दोनों निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन खारिज होने के बाद हरदीप सिंह पुरी के सामने कोई अन्य उम्मीदवार नहीं बचा है। ऐसे में उनका निर्विरोध चुना जाना तय माना जा रहा है। हालांकि, कांग्रेस ने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को अदालत में चुनौती देने की बात कही है। इससे चुनाव प्रक्रिया से जुड़ा विवाद आगे कानूनी रूप ले सकता है।
इससे पहले बीजेपी ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के निवर्तमान सांसद हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया था। अब मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट के उपचुनाव में हरदीप सिंह पुरी को उम्मीदवार बनाए जाने और उनके नामांकन को वैध ठहराए जाने के बाद उनका संसद के उच्च सदन में पहुंचना लगभग तय हो गया है।
नामांकन विवाद ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी
मध्य प्रदेश के इस राज्यसभा उपचुनाव में दो निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन खारिज होने और हरदीप सिंह पुरी के पर्चे को वैध ठहराए जाने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने पुरी के हलफनामे में कथित विसंगतियों का मुद्दा उठाया है और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। दूसरी ओर, रिटर्निंग ऑफिसर ने जांच के बाद उनके नामांकन को वैध घोषित किया है।