जमीन घोटाले के आरोपों के बीच सीएम मोहन यादव की मुश्किलें बढ़ीं। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के वायरल लेटर में इंदौर की उपेक्षा और भेदभाव का आरोप लगाया है। भोपाल से संजीव श्रीवास्तव की रिपोर्टः
कैलाश विजयवर्गीय के साथ सीएम मोहन यादव (दाएं)
जमीन घोटाले के आरोपों में बुरी तरह घिरे, मुख्यमंत्री मोहन यादव की मुसीबतें क्या और बढ़ने जा रही हैं? मोहन मंत्रिमंडल के सहयोगी वरिष्ठ मंत्री, कैलाश विजयवर्गीय की सीधे आरोपों वाली एक वायरल चिट्ठी से इस सवाल की गूंज मध्य प्रदेश में हो रही है। नगरीय प्रशासन विकास एवं संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की एक कथित चिट्ठी दैनिक भास्कर ने बुधवार को प्रमुखता से छापी है। चिट्ठी में आधा दर्जन सवाल हैं। चिट्ठी का मजमून है (विजयवर्गीय फरमा रहे हैं), ‘इंदौर की उपेक्षा से आहत हूं। ढाई वर्षों से सिर्फ असहयोग, उपेक्षा और विरोध मिल रहा है।’
खबर के अनुसार विजयवर्गीय ने खत 20 जून को मुख्यमंत्री को लिखा है। इस बारे में उनसे जब पूछा गया तो विजयवर्गीय ने कहा, ‘ये हमारा आंतरिक विषय है। इस पर पार्टी स्तर पर बात चल रही है। अभी मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। मुझे नहीं पता ये आप तक कैसे पहुंचा।’
विजयवर्गीय ने पांच बड़े सवाल उठाये
मास्टर प्लान - इंदौर का मास्टर प्लान दो वर्ष पूर्व आपको भेजा चुका है। विभागीय एवं मुख्य सचिव स्तर पर कई बार इस पर विस्तृत चर्चा हो चुकी है, परंतु आज तक इसे जारी नहीं किया गया है। पहले भी पत्र लिखा, लेकिन न तो चर्चा की गई और न ही जवाब दिया गया।
इंदौर का अवमूल्यन - इंदौर प्रदेश का सबसे बड़ आर्थिक गतिविधियों का केन्द्र है। मेट्रोपॉलिटन रीजन की हर चर्चा इंदौर केन्द्रित रही है, पर अधिसूचना में इसका नाम उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन कर दिया गया, जबकि रीजन में इंदौर का हिस्सा शत-प्रतिशत है और उज्जैन का सिर्फ 59 प्रतिशत।
विभाजन में अनदेखी - राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को तीन भागों में बांटने के प्रस्ताव में भोपाल, उज्जैन एवं जबलपुर में इकाई प्रस्तावित हे। इंदौर में 1952 में स्थापित एसजीएसआईटीएस की उपेक्षा की गई है। 50 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेज हैं फिर भी यह मौका इंदौर को नहीं दिया गया है।
इंदौर-पीथमपुर क्षेत्र की उपेक्षा - पीथमपुर में 650 से अधिक एमएसएमई और 176 से अधिक बड़े कारखाने हैं। इसके बाद भी राष्ट्रीय स्तर की टेस्टिंग लैब, प्रोडक्ट सर्टिफिकेशन सेंटर लंबे समय से लंबित है। अपेक्षाकृत नए विक्रमपुरी उज्जैन औद्योगिक क्षेत्र में सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। पीथमपुर उपेक्षित है।
सिंहस्थ में अनदेखी - इंदौर एयरपोर्ट के विस्तार के लिए जमीन उपलब्ध कराने और सिंहस्थ के कार्यों में अनदेखी हो रही है। जल संकट के दौरान इंदौर शहर को कोई विशेष राहत नहीं दी गई है।
कैलाश विजयवर्गीय की चिट्ठी को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव अथवा संगठन की और से अभी किसी तरह की प्रतिक्रिया सामने नहीं आयी है। विजयवर्गीय की चिट्ठी को लेकर ‘सत्य हिन्दी’ ने जिम्मेदारों से संपर्क साधा, लेकिन रिस्पांस नहीं मिला।
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल थे विजयवर्गीय
साल 2023 के विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा खेमे में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री उम्मीदवार के तौर पर कैलाश विजयवर्गीय का नाम भी सुर्खियों में रहा था। उन्हें इस कुर्सी के उम्मीदवार के तौर पर देखा गया था। चुनाव नतीजों के बाद पर्ची मोहन यादव के नाम खुली थी। मोहन यादव के मुख्यमंत्रित्वकाल को हाल ही में ढाई साल पूरे हुए हैं। ढाई सालों के दौरान न केवल विजयवर्गीय बल्कि प्रहलाद पटेल, राकेश सिंह, जगदीश देवड़ा और राजेन्द्र शुक्ल के सुरों में तल्खियत नजर आती रही है।
कैबिनेट बैठकों से फैसलों के मुखर विरोध की खबरें निकलती रहीं। सिंहस्थ से जुड़े कामकाज को लेकर सीधा टकराव और विरोध बाहर आया। कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र इंदौर एक में बीते साल दूषित पेयजल कांड हुआ। तीन दर्जन लोग मारे गए। ठीकरा विजयवर्गीय के सिर फूटा। खबरें सामने आयीं, स्थानीय अफसरों का सहयोग विजयवर्गीय को नहीं मिला। विजयवर्गीय की जमकर बदनामी हुई।
उज्जैन के बाद इंदौर से बागी सुर!
मुख्यमंत्री मोहन यादव को लेकर उज्जैन के भाजपा विधायक सवाल उठाते रहे हैं। विधानसभा में सवाल पूछे गए थे। बीते दिनों चिंतामणि मालवीय ने बाकायदा प्रेस कांर्फ्रेंस करके संकेतों में मुख्यमंत्री और उनके परिजनों पर निशाने साधे थे। उन्होंने कहा था, ‘जमीनों का खेल बहुत बड़ा है।’
मालवीय की प्रेस कांफ्रेंस के बाद ही इंडियन एक्सप्रेस ने मुख्यमंत्री और उनके परिजनों के जमीन सौदों से जुड़ी बड़ी स्टोरी की है। इंडियन एक्सप्रेस की स्टोरी के बाद, मुख्यमंत्री का कोई बयान नहीं आया है। अलबत्ता भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडलेवाल भर ने वीडियो बयान जारी करके कांग्रेस को निशाने पर लिया था। दरअसल एक्सप्रेस की स्टोरी के अंशों और स्वयं की जानकारियों पर कांग्रेस ने भोपाल में पीसी की थी। खंडेलवाल के बयान के बाद दिल्ली की पीसी में कांग्रेस ने आरोप दोहराते हुए कुछ नए आरोप भी लगाए हैं। नए आरोपों पर भाजपा और सरकार मौन बनी हुई है।
विजयवर्गीय भाजपा के दिग्विजय सिंह!
कैलाश विजयवर्गीय की ‘वायरल’ चिट्ठी और उसमें उठाये गये सवालों के बारे में पूछे जाने पर सीनियर जर्नलिस्ट अरूण दीक्षित ने ‘सत्य हिन्दी’ को बेहद दिलचस्प प्रतिक्रियाएं दीं। उन्होंने कहा, ‘लगता है कैलाश विजयवर्गीय की आत्मा जाग गई है। केन्द्र ने उन्हें उपयोग करके किनारे लगाया। मोहन यादव लगातार उनका अपमान करते जायें तो वे चुप कैसे और क्यों रह सकते हैं?’
अरूण दीक्षित ने ये भी कहा, ‘जैसे दिग्विजय सिंह कांग्रेस की गलितयों को पाइंट आउट कर रहे हैं, उसी अंदाज में विजयवर्गीय ने सरकार की त्रुटियों को उजागर कर दिया है।’ दीक्षित ने ये भी कहा, ‘विजयवर्गीय जनाधार वाले नेता हैं। मोहन यादव पर्ची और आलाकमान की कृपा से नेता बने हैं। जनाधार वाले नेता की आत्मा जागना दिल्ली के लिए भी अलार्म है।’