मध्य प्रदेश में कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का अब नामांकन ही रद्द कर दिया गया है। चुनाव आयोग के अधिकारिक सूत्रों के अनुसार नामांकन रद्द किए जाने का कारण बताया गया है कि उन्होंने अपने हलफनामे में तेलंगाना के एक मामले की जानकारी छिपाई थी। लेकिन कांग्रेस ने इस दावे का खंडन किया है।

मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी रद्द किए जाने के इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद विवेक तन्खा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा, 'अब वोट चोरी से नेक्स्ट लेवल पर सीट चोरी का सिलसिला शुरू हो गया है। मीनाक्षी जी का राज्य सभा का नामांकन निरस्त नहीं हुआ है। प्रजातंत्र की हत्या हुई है। यह लोकतंत्र की हत्या के अलावा कुछ नहीं है।'

बीजेपी ने रद्द कराई उम्मीदवारी?

बीजेपी नेताओं ने रिटर्निंग अधिकारी के पास औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई थी। बीजेपी का आरोप था कि मीनाक्षी नटराजन ने तेलंगाना के एक लंबित कोर्ट केस की जानकारी हलफनामे में नहीं दी। चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार को हलफनामे में सभी ज़रूरी जानकारियां देना अनिवार्य होता है। बीजेपी ने इसे गंभीर जानकारी छिपाने का मामला बताते हुए नामांकन रद्द करने की मांग की।
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कोई एफआईआर नहीं: कांग्रेस

कांग्रेस का पलटवार कांग्रेस ने बीजेपी के आरोप को पूरी तरह खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि मीनाक्षी नटराजन पर कोई आपराधिक केस दर्ज नहीं है, इसलिए उन्हें कुछ भी छिपाने की जरूरत नहीं थी। विवेक तन्खा ने कहा है कि 'मीनाक्षी नटराजन जी के नॉमिनेशन के बारे में भ्रम फैलाया जा रहा है। कोई क्रिमिनल केस रजिस्टर्ड नहीं है। मात्र एक नोटिस आया है कि उनके और अन्य लोगों के ख़िलाफ़ 10 करोड़ कंपनसेशन की कार्यवाही क्यों ना की जाए। इस नोटिस का मीनाक्षी जी के वकील ने जवाब दिया है। FIR दर्ज नहीं है।' कांग्रेस ने इस खंडन के साथ ही आरोप मढ़ दिया कि 'अब वोट चोरी के बाद सीट चोरी शुरू' हो गई है।

दिल्ली में ECI के बाहर प्रदर्शन

केसी वेणुगोपाल के नेतृत्व में कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की और मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन रद्द किए जाने पर आपत्ति जताई। यह बैठक निर्वाचन सदन के बाहर हुए एक छोटे से विरोध-प्रदर्शन के बाद हुई, जहां कांग्रेस नेताओं ने तुरंत सुनवाई न होने पर धरना दिया था। शुरुआत में उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया क्योंकि ECI अधिकारियों ने कहा था कि शाम के 7 बज चुके और अधिकारी घर जा चुके है।

पुलिस के साथ बातचीत के बाद वेणुगोपाल और भूपेश बघेल को आयोग के मुख्यालय में जाने की अनुमति दी गई। कांग्रेस ने इस आपत्ति का कड़ा विरोध किया और इसे बेबुनियाद बताया। विपक्ष के नेता उमंग सिंघार और पार्टी के अन्य नेताओं का कहना था कि नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं है और इसलिए उन्हें उस मामले का खुलासा करने की कोई ज़रूरत नहीं थी जिसका ज़िक्र बीजेपी ने किया था।

MLA दूर हुए तो आई उम्मीदवारी रद्द होने की ख़बर!

नटराजन की उम्मीदवारी तब खारिज की गई है जब इससे पहले कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों को कर्नाटक शिफ्ट कर दिया। इसका मक़सद था कि वोटिंग से पहले कोई क्रॉस वोटिंग न हो और पार्टी के विधायक एकजुट रहें। ऐसा इसलिए कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस के पास एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए पर्याप्त विधायक हैं, लेकिन बीजेपी ने सीट जीतने की अपनी क्षमता से एक अधिक उम्मीदवार उतार दिया है।

विधायकों की क्या है स्थिति?

मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सदस्य हैं, लेकिन प्रभावी संख्या 229 है। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 58 फर्स्ट प्रेफरेंस वोट चाहिए। बीजेपी के पास 164 विधायक हैं, इसलिए वह दो सीटें आसानी से जीत सकती है। बीजेपी ने दो उम्मीदवारों राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और राज्य इकाई के सचिव राजनेश अग्रवाल को पहले ही मैदान में उतार दिया था। लेकिन सोमवार को आखिरी दिन भाजपा ने चौंकाने वाले अंदाज में तीसरे उम्मीदवार के रूप में मध्य प्रदेश मत्स्य कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट को भी नामांकन करा दिया। यह तीसरा उम्मीदवार भाजपा की तरफ से सरप्राइज था। पार्टी ने तीन दिन तक केंद्र की लीडरशिप से बात करके यह फ़ैसला लिया।
कांग्रेस ने अपनी उम्मीदवार के रूप में पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा। कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं, लेकिन एक विधायक सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण वोट नहीं डाल सकता। इसके साथ ही सागर की विधायक निर्मला सप्रे हाल के महीनों में बीजेपी नेताओं के साथ मंच साझा करती रही हैं और कांग्रेस की बैठक में नहीं आ रही हैं। इसके बावजूद कांग्रेस एक राज्यसभा सीट आसानी से जीत सकती थी। लेकिन बीजेपी ने तीसरे उम्मीदवार उतारकर कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी थी।

बीजेपी को कितने वोट चाहिए?

बीजेपी को तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए आठ और वोट चाहिए जिससे कि 58 विधायकों की संख्या पूरी हो सके। सप्रे और भारत आदिवासी पार्टी नेता कमलेश डोडियार का बीजेपी को समर्थन मान लेने के बाद भी ये संख्या ही चाहिए। कांग्रेस को डर था कि बीजेपी इन आठ विधायकों की कमी को पूरा करने के लिए क्रॉस वोटिंग कराने की कोशिश करेगी। चूँकि अब कांग्रेस उम्मीदवार की उम्मीदवारी ख़त्म हो गई है तो वह चुनाव से बाहर हो गई है।
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लोकतंत्र पर हमला: कांग्रेस

कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है। लीडर ऑफ अपोजिशन उमंग सिंघार और अन्य नेताओं का कहना है कि बीजेपी जानबूझकर बेवजह की आपत्ति उठाकर कांग्रेस की उम्मीदवारी को रोकना चाहती है। पार्टी अब इस फैसले के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाने पर विचार कर रही है। यह घटनाक्रम राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले आया है, जिससे मध्य प्रदेश की राजनीति में नया सस्पेंस और तनाव बढ़ गया है। कांग्रेस पहले ही अपने विधायकों को सुरक्षित जगह शिफ्ट करने की तैयारी कर रही थी, अब नामांकन रद्द होने से पार्टी की रणनीति प्रभावित होगी।