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एमपी विधानसभा में नेहरू का चित्र हटाने से विवाद, जानें कांग्रेस का आरोप

मध्य प्रदेश विधानसभा में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की पेंटिंग हटाये जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। नेहरू के चित्र की जगह संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर का चित्र लगाया गया है। कांग्रेस हमलावर हो गई है। सदन एवं सड़क पर इस मामले को उठा रही है और भाजपा को आड़े हाथों ले रही है।

बता दें कि मध्य प्रदेश विधानसभा में सदन के भीतर अध्यक्ष की कुर्सी के ठीक पीछे दो बड़ी पेंटिंग बीते 27 सालों से (विधानसभा 1996 में नये भवन में शिफ्ट होने के बाद से) टंगी थीं। एक पेंटिंग राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की थी और दूसरी पंडित जवाहर लाल नेहरू की।

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मध्य प्रदेश की 16वीं विधानसभा का पहला विशेष सत्र सोमवार से आरंभ हुआ है। चार दिवसीय सत्र में अध्यक्ष की कुर्सी के ठीक पीछे लगी दो पेंटिंगों में से एक पंडित जवाहर लाल नेहरू जी की पेंटिंग न होने और उनकी पेंटिंग के स्थान पर डॉ. आंबेडकर की पेंटिंग नज़र आयी।

मध्य प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष अब्बास हाफिज़ ने सदन के भीतर से नेहरू जी पेंटिंग हटाने को इतिहास से छेड़छाड़ करार दिया है। उन्होंने कहा है, ‘बीजेपी और उसके आका, देश के पहले प्रधानमंत्री युगदृष्टा पंडित नेहरू से किस कदर चिढ़ते हैं, मध्य प्रदेश विधानसभा से पेंटिंग हटाना उसी नफ़रत का द्योतक है।’

मध्य प्रदेश विधानसभा में आज दूसरे दिन कांग्रेस इस मामले को उठाने के मूड में थी, लेकिन विधायकों की शपथ ग्रहण के बाद विधानसभा की कार्रवाई कल 20 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दी गई।

‘...तो गोडसे की तस्वीर लगा देंगे’

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस के वरिष्ठ उमंग सिंघार ने नेहरू जी की पेंटिंग हटाये जाने को लेकर अपनी प्रतिक्रिया में कहा, ‘घटनाक्रम दुःखद है। भाजपा कुछ भी कर सकती है।’ उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, ‘भाजपा के शासनकाल और उसके इतिहास से खिलवाड़ करने वाले निर्णयों के मद्देनज़र किसी दिन सदन में हमें नाथूराम गोडसे की पेंटिंग देखने को मिल जाये।’

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मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेहरू के सम्मान से जुड़ा वृतांत शेयर किया है। पटवारी ने स्मरण कराते हुए कहा है, '1977 में जब अटल बिहारी वाजपेयी जी ने विदेश मंत्री के रूप में अपना कार्यभार संभाला था और साउथ ब्लॉक के अपने दफ़्तर गए तो उन्होंने नोट किया कि दीवार पर लगा पंडित नेहरू का चित्र ग़ायब है। वाजपेयी ने तुरंत अपने सचिव से पूछा था कि नेहरू जी का चित्र कहाँ है जो यहां लगा रहता था। उनके अधिकारियों ने ये सोचकर उस चित्र को वहां से हटवा दिया था कि इसे देखकर शायद वाजपेयी जी ख़ुश नहीं होंगे।

पटवारी ने आगे कहा, ‘वाजपेयी जी ने आदेश दिया कि उस चित्र को वापस लाकर उसी स्थान पर लगाया जाए जहां वह पहले लगा हुआ था।’ पटवारी ने कहा है, ‘आज की भाजपा ने पंडित नेहरू का चित्र मध्यप्रदेश की विधानसभा से निकाल कर अपने ही पुरोधा वाजपेयी की विरासत को ललकारा है।’

पटवारी का आरोप है, ‘आज भाजपा भारत की गौरवशाली और वैभवशाली विरासत से प्रतिशोध ले रही है।’ पटवारी ने तंज कसते हुए कहा है, ‘भाजपा के वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण आडवाणी जी ने 2013 में ठीक ही लिखा था कि अब भाजपा नाना जी देशमुख, दीनदयाल उपाध्याय और अटलबिहारी वाजपेयी की विरासत वाली पार्टी नहीं रह गई है। इसमें कुछ लोग अपना निजी हित साधने के लिए घुस आए हैं।’

जीतू पटवारी ने कहा है, ‘मध्यप्रदेश विधानसभा में राष्ट्र निर्माता पंडित जवाहरलाल नेहरू की तस्वीर हटाने के बजाय साथ में अगर संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर की तस्वीर लगा दी जाती तो सदन की शोभा बढ़ जाती।’

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पटवारी ने आक्रोश व्यक्त करते हुए यह भी कहा, ‘ये लोग सदन से बाबा साहेब की तस्वीर हटा कर हिटलर और मुसोलिनी की तस्वीर सदन में टांग दें तो उसमें भी आश्चर्य नहीं होना चाहिए। मैं प्रार्थना करता हूं कि भगवान भाजपा को सद्बुद्धि प्रदान करें।’

विधानसभा परिसर का ‘मालिक’ स्पीकर होता है। राज्य विधानसभा में फिलहाल प्रोटम स्पीकर हैं। इस पद पर नौ बार के विधायक गोपाल भार्गव को बैठाया गया है। सदन का संचालन वे ही कर रहे हैं।

पूर्व केन्द्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को विधानसभा अध्यक्ष घोषित किया गया है। तोमर का नामांकन हो गया है। स्पीकर के निर्वाचन से जुड़ी प्रक्रिया में प्रतिपक्ष भी सम्मत है। नामांकन हो गया है। कल 20 दिसंबर को तोमर की विधिवत ताजपोशी (निर्वाचन की प्रक्रिया) विधानसभा के स्पीकर के रूप में हो जायेगी।

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संजीव श्रीवास्तव
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