राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस ‘बदल’ रही है, ये दावा बार-बार हो रहा है। ये दावा, केवल बातों तक या हवाई नजर नहीं आ रहा है। स्ट्रगल के दौर में पार्टी को ‘गच्चा’ देने वालों पर सख्त एक्शन जैसे बड़े कदम भी उठाये जा रहे हैं। देश के दिल, मध्य प्रदेश से इसी तरह का बड़ा एक्शन सामने आया है। दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को आयोजित कांग्रेस की ‘वोट चोरी’ रैली में शामिल नहीं होने पर मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस के 60 पदाधिकारियों की छुट्टी कर दी गई है।
कांग्रेस को लंबे समय से रिपोर्ट करने वाले एक सीनियर जर्नलिस्ट ने 48 घंटों में यूथ कांग्रेस के प्रदेश के 60 पदाधिकारियों पर एक्शन को लेकर ‘सत्य हिन्दी’ से कहा, ‘पार्टी को गच्चा देने वालों पर कार्रवाइयां होती रही हैं। मगर बल्क में एवं इतना ताबड़तोड़ एक्शन, कांग्रेस में बिरला कदम नजर आ रहा है।’ वे आगे जोड़ रहे हैं, ‘इस तरह के कदम उठाये जाने की निरंतर जरूरत है।’ वे यह भी फरमा रहे हैं, ‘बड़े स्लीपर सेलों पर कार्रवाइयां होना चाहिए। एक्शन होगा तो राहुल कांग्रेस और संवर जायेगी।’
यहां बता दें, राहुल गांधी, मध्य प्रदेश में कांग्रेस को कसने के लिए पूर्व में आये थे। संगठन को चाक-चैबंद करने के लिए बुलाई गई भोपाल की बैठक में राहुल गांधी ने कहा था, ‘कांग्रेस में कई प्रकार के घोड़े हैं।’ हालांकि इस बात को सबसे पहले उन्होंने गुजरात में कहा था।

राहुल का चर्चित ‘घोड़ा बयान’

पहला - रेस का घोड़ा

दूसरा - बारात का घोड़ा

तीसरा - लंगड़ा घोड़ा

ये सही है कि राहुल गांधी ने गुजरात में रेस और बारात के घोड़े की बात सबसे कही थी। मगर भोपाल में लंगड़ा घोड़ा उसमें जोड़ा था। राहुल गांधी यहीं नही रूके थे।
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बैठक में मौजूद आला नेताओं एवं पदाधिकारियों की और मुखातिब होते हुए राहुल बोले थे, ‘एक बार कमलनाथ जी ने कहा था कि कांग्रेस पार्टी कभी-कभी रेस के घोड़े को बारात में भेज देती है और कभी-कभी बारात के घोड़े को रेस की लाइन में खड़ा कर देती है। उसको पीछे से एक चाबुक पड़ता है और वह वहीं बैठ जाता है। मगर इन दो के अलावा एक तीसरी कैटेगरी भी होती है और वह है लंगड़े घोड़े की, तो इन्हें ही छांटना है हमें। लंगड़ा कौन है, बारात वाला कौन है और रेस का कौन है। बारात वाले को बारात में भेजना है, रेस वाले को रेस में डालना है और लंगड़े वाले को रिटायर करना है।’
राहुल गांधी ने रिटायर करने वाले लंगड़े घोड़े को लेकर ये भी कहा था, ‘भैया - ये लो थोड़ी सी घास चरो, घास खाओ, पानी पियो, आराम करो और बाकी लोगों को तंग मत करो। बाकी घोड़ों को डिस्टर्ब मत करो। नहीं तो फिर कार्रवाई करनी पड़ेगी। जो लंगड़ा घोड़ा होता है और जो बाकी को डिस्टर्ब करता है, उसके साथ क्या होता है, जानते हो? वो मैं नहीं कहूंगा।’

इन पर गिरी है गाज

मध्य प्रदेश में यूथ कांग्रेस के जिन 60 पदाधिकारियों पर कार्रवाई हुई है, उनमें 9 जिलाध्यक्ष, 5 उपाध्यक्ष, 14 महासचिव और 32 सचिव शामिल हैं। मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस ने तीन नवंबर को निलंबन आदेश जारी करते हुए इन सभी पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक सस्पेंड किया है। आदेश में कहा गया है, ‘दिल्ली में आयोजित रैली में अनुपस्थित रहने के कारण संगठनात्मक अनुशासनहीनता सामने आई है। भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशों के अनुपालन में यह कार्रवाई की गई है।’ आदेश पर मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस के पदाधिकारियों के हस्ताक्षर हैं।

मप्र में चौथी बड़ी कार्रवाई!

इस बड़ी कार्रवाई से पहले भी अनुशासनहीनता से जुड़ी हाल के दौर में कई कारवाइयां मध्य प्रदेश में हुई हैं। मध्य प्रदेश कांग्रेस के नये अध्यक्ष जीतू पटवारी की अगुवाई में, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के निकट माने जाने वाले मध्य कांग्रेस के एक नेता अजय चौरड़िया पर एक्शन हंगामाखेज रहा था। अनर्गल बयानबाजी की वजह से आलाकमान की अनुमति लेकर चौरड़िया की छुट्टी की गई थी।
ऐसे ही पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों को लेकर दिग्विजय सिंह के अनुज लक्ष्मण सिंह को निकाला गया था। हाल ही के दतिया उपचुनाव में कांग्रेस के विधायक रहे राजेन्द्र भारती को पार्टी विरोधी गतिविधियों की वजह से चलते उचचुनाव में छह सालों के लिए पार्टी से बाहर किया गया था। उपचुनाव कांग्रेस जीत गई थी।
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एमपी में जीरो है आंकड़ा

मध्य प्रदेश लोकसभा के 2024 के चुनाव में कांग्रेस का खाता नहीं खुला था। राज्य में कुल 29 लोकसभा सीटें हैं। चुनाव में कांग्रेस ने 28 उम्मीदवार उतारे थे। टिकिट के बाद इंदौर उम्मीदवार ने पर्चा वापस ले लिया था और बीजेपी में शामिल हो गया था। बाकी 27 सीटें कांग्रेस हार गई थी। खजुराहो सीट सपा को दी गई थी। सपा प्रत्याशी का पर्चा भी खारिज हो गया था।