बीजेपी शासित मध्य प्रदेश सरकार के कामकाज को लेकर जो खबरें मीडिया में आ रही हैं, उनसे मुख्यमंत्री से लेकर पूरी बीजेपी परेशान है। शिवराज सिंह चौहान के ड्रीम प्रोजेक्ट 'स्टैच्यू ऑफ वननेस' से जुड़ी खबरों पर सरकार ने चुप्पी साध ली। संजीव श्रीवास्तव की रिपोर्टः
मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेताओं और पार्टी को नुकसान पहुंचाने वाली ‘खबरें’ - कौन लीक कर रहा है? क्यों लीक कर रहा है? ये और ऐसे सवालों की ‘खोजबीन’ तेज है। दरअसल, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और मोदी सरकार में मंत्री शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्रित्वकाल के एक बेहद ड्रीम प्रोजेक्ट में कथित गड़बड़ियों से जुड़ी एक बड़ी खबर ‘लीक’ हुई है। खबर की आंच मौजूदा नेतृत्व मोहन यादव एवं उनकी टीम पर आ रही है।
मसला, खंडवा जिले के ओंकारेश्वर धाम में नर्मदा किनारे बनी आदि गुरु शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ वननेस’ (एकात्मधाम) के पिलर में कथित खमियों का है। शिवराज सिंह चौहान जब मुख्यमंत्री थे तब एकात्मधाम की परिकल्पना की गई थी। लगभग ढाई हजार करोड़ रुपयों का ये प्रोजेक्ट था। अकेले प्रतिमा की स्थापना पर 200 करोड़ रुपये व्यय हुए।
इस परियोजना में गड़बड़ियों की छुटपुट शिकायतें तो शिवराज सिंह के मुख्यमंत्री रहते हुए भी हुईं। मगर बीते कुछ वक्त (मोहन यादव कार्यकाल में) शिकायतबाजी का क्रम तेज हुआ। बीती 12 मई को सीबीआई, मप्र के मुख्य सचिव और लोकायुक्त को इस पूरे मसले की गई शिकायत की गई थी। शिकायत में कहा गया था, ‘2300 करोड़ की इस परियोजना में सुरक्षा और तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई है।’ शिकायत प्रोजेक्ट से जुड़े तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर बिश्वजीत बनर्जी ने की।
आरोप रहा, जिस मुख्य पिलर पर पूरी प्रतिमा टिकी है, वह तय मानकों के अनुसार मजबूत नहीं है और उसमें झुकाव भी देखा गया है। इस प्रतिमा को 140 से 170 किमी प्रति घंटे तक तेज हवाओं को झेलने के हिसाब से डिजाइन किया गया था। लेकिन तकनीकी जांच में पता चला की यह 120 किमी रफ्तार की हवा भी नहीं झेल सकती है। 200 करोड़ लागत वाली यह प्रतिमा चीन निर्मित है। शिकायत के मुताबिक जब तकनीकी खामियों की रिपोर्ट सामने आई, तो फील्ड डायरेक्टर बिश्वजीत बनर्जी और प्रोजेक्ट डायरेक्टर कर्नल अनुपम गुप्ता को पद से हटा दिया गया।
मामले में एक और गंभीर आरोप यह भी है कि साइट पर मेजर एडमंड कीन नाम का व्यक्ति बिना किसी वैध सरकारी नियुक्ति के इंजीनियर-इन-चार्ज बनकर फैसले ले रहा था। उसने अधिकृत मुख्य इंजीनियरों के फैसलों को बार-बार बदला, जिससे निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा प्रभावित हुई।
आरोप यह भी रहा कि फील्ड डायरेक्टर ने कथित अनियमितताओं की जानकारी एमपीएसटीडीसी के तत्कालीन एमडी डॉ. इलैयाराजा टी और मध्य प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव संस्कृति विभाग शिव शेखर शुक्ला को भी दी थी। लेकिन किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं हुई।
शिकायत में यह भी बताया गया, संविदा नियमों के तहत ठेकेदार कंपनी से करीब 8 करोड़ रुपए की वसूली होनी थी, जो एक साल से लंबित है। इसके अलावा पीएमसी से ऑफिस, गाड़ी और बिजली खर्च के 28 लाख रुपए भी वसूले जाने थे, लेकिन इसे भी दबा दिया गया। वहीं, कंसलटेंट कंपनी को पूरा भुगतान कर दिया गया, लेकिन वहां काम करने वाले विशेषज्ञों का वेतन रोक लिया गया है।
बताया गया है, छह महीने से दे रहे थे चेतावनी जानकारी के अनुसार प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (पीएमसी) के फील्ड डायरेक्टर बिश्वजीत बनर्जी ने लगभग 6 महीने तक लगातार मप्र राज्य पर्यटन विकास निगम और ठेकेदार कंपनी एलएंडटी को इस खतरे को लेकर लिखित चेतावनियां दीं। इसके बावजूद समय रहते तकनीकी सुधार नहीं किए जाने का आरोप है।
शिकायतबाजी से जहां मुख्यमंत्री रहे शिवराज पर ऊंगलियां उठ रही हैं तो मौजूदा सरकार भी कठघरे में खड़ा की जा रही है। सवाल ये उठाया जा रहा है, यदि पूर्ववर्ती नेतृत्व के दौर में कुछ अनदेखियां हुईं थीं तो मौजूदा नेतृत्व एवं टीम, क्यों आंखें मूंदी रहीं? उनके अपने कार्यकाल में क्या-क्या गड़बड़ियां हुईं? क्यों हुईं? जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्यों बचाया जा रहा है?
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव वैसे भी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस की जमीन घोटाले संबंधी स्टोरी को पखवाड़ा हो रहा है। पूरे मसले पर वे अब तक कुछ नहीं बोले हैं। अनेक सवाल बरकरार हैं।
खबरों को लेकर जितने मुंह उतनी बातें!
अकेले मध्य प्रदेश भर नहीं, अन्य सूबों में भी भाजपा के नेतृत्व एवं पार्टी के बड़े नेताओं से जुड़ी डैमेजिंग खबरों का फ्लो बढ़ा है। मोदी सरकार में मंत्रियों एवं उनके विभागों में गड़बड़ियों की खबरें निरंतर तेज हुई हैं। बड़े नेताओं और संगठन के जिम्मेदारों ने इस सब पर चुप्पी साध रखी है।
नीट पेपर आउट मामले में केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में धरना चल रहा है। केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी सबसिडी मामले में कठघरे में आये। उनके बाद मोदी सरकार में वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव के विभाग से जुड़े चार अफसरों की छुट्टी का मामला सुर्खियों में है। अब शिवराज सिंह के मुख्यमंत्रित्वकाल का ड्रीम प्रोजेक्ट कठघरे में है।
सीनियर जर्नलिस्ट अरूण दीक्षित ने ‘सत्य हिन्दी’ से कहा, ‘कांग्रेस का ये कहना, आग तो कहीं लगी हुई है, धुंआ यूं ही नहीं उठता, बिलकुल सही है।’ दीक्षित, इस पूरे मसले को देश में कुछ बड़ा होने वाला है जैसी संभावनाओं से जोड़कर देख रहे हैं। अरूण दीक्षित का कहना है, ‘भाजपा मोदी और शाह की है। कैबिनेट में भी इनके अलावा किसी की कोई बिसात नहीं है। मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार की खबरों के चलते सब होना, कई तरह के संकेत दे रहा है। कांटे से कांटा निकालना मौजूदा नंबर वन-नंबर टू की पुरानी फितरत है।’
बगलामुखी मंदिर में दान फर्जीवाड़ा!
मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले के नलखेड़ा में प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में दान के नाम पर एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। खबरों के अनुसार फर्जी समिति बनाकर, श्रद्धालुओं से रुपये और सोने-चांदी के आभूषण दान प्राप्त किया जा रहा था। खुलासा होने के बाद जिला कलेक्टर प्रीति यादव ने जिला पंचायत सीईओ बीएस सोलंकी के नेतृत्व में जांच दल बनाया है। इसमें शामिल अधिकारियों को सात दिन में जांच प्रतिवेदन सौंपने को कहा गया है।
आरोप है कि मां बगलामुखी मंदिर का रजत सुंदरीकरण करने के लिए कुछ लोगों ने समिति बनाई और मंदिर परिसर में दान प्राप्त कर श्रद्धालुओं को रसीद दी। चूंकि मंदिर शासकीय है, ऐसे में अशासकीय लोगों द्वारा समिति बनाकर दान एकत्रित करने पर सवाल उठ रहे हैं। इसी के बाद जांच बैठाई गई है। कलेक्टर प्रीति यादव ने कहा है, ‘जांच में गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।’
आगर-मालवा जिले में लखुंदर नदी के तट पर स्थित मां बगलामुखी माता मंदिर प्रसिद्ध पांडवकालीन सिद्धपीठ है। मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना युधिष्ठिर ने महाभारत युद्ध में विजय के लिए श्रीकृष्ण भगवान के निर्देश पर की थी। यहां मां बगलामुखी के साथ मां लक्ष्मी और मां सरस्वती की स्वयंभू मूर्तियां हैं। यह स्थान तंत्र साधना, कोर्ट-कचहरी के मामलों में विजय के लिए प्रसिद्ध है।