दिशा सालियान FIR मामले पर पहली बार आदित्य ठाकरे ने सफाई दी है। उन्होंने कहा, "मैं दिशा सालियान से न तो कभी मिला और न ही उन्हें जानता था। इस दुखद मामले से लगातार मेरा नाम जोड़ना कुछ व्यक्तियों द्वारा चरित्र हनन का एक सोचा-समझा प्रयास है।'
दिशा सालियान और आदित्य ठाकरे
दिशा सालियान की मौत के मामले में सीबीआई की एफ़आईआर के बाद शिवसेना यूबीटी नेता आदित्य ठाकरे ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर सफाई दी है। आदित्य ठाकरे ने साफ कहा है कि वह न तो दिशा सालियान को जानते थे और न ही कभी उनसे मिले थे। उन्होंने मामले में अपना नाम लगातार जोड़े जाने को राजनीतिक और व्यक्तिगत मकसद से किया जा रहा चरित्र हनन बताया है।
आदित्य ठाकरे ने बुधवार को सोशल मीडिया पर कहा कि पिछले क़रीब छह वर्षों से कुछ लोग बिना किसी सबूत के उनका नाम दिशा सालियान की मौत से जोड़ रहे हैं। उनके मुताबिक, यह उनके खिलाफ एक सोची-समझी मुहिम है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मकसद से चलाया जा रहा ऐसा प्रचार उन्हें सच्चाई की लड़ाई से पीछे नहीं हटा सकता।
आदित्य ठाकरे ने अपने बयान में कहा कि वह दिशा सालियान से कभी नहीं मिले और न ही उन्हें जानते थे। उन्होंने कहा कि इस दुखद मामले से उनका नाम लगातार जोड़ना कुछ लोगों की ओर से किया जा रहा सोचा समझा प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस अभियान के पीछे राजनीतिक और निजी हित जुड़े हुए हैं और इसका मक़सद उनकी छवि को नुक़सान पहुँचाना है।
आदित्य ने कहा कि मामले की आधिकारिक दोबारा जांच होने दी जानी चाहिए और जांच को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के प्रयास उन्हें और उनकी पार्टी को सच्चाई के लिए आवाज़ उठाने से रोक नहीं सकते।
सीबीआई की FIR में क्या है?
आदित्य ठाकरे की यह प्रतिक्रिया सीबीआई की ओर से दिशा सालियान की मौत के मामले में एफ़आईआर दर्ज किए जाने के दो दिन बाद आई है। सबीआई ने यह कार्रवाई बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद की है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़, एफ़आईआर में हत्या, आपराधिक साजिश, सबूत मिटाने या छिपाने और कथित तौर पर झूठी कहानी तैयार करने जैसे अपराधों से जुड़ी धाराओं के तहत जांच शुरू की गई है। एफ़आईआर में आदित्य ठाकरे, उनके पिता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, अभिनेता डिनो मोरिया, सूरज पंचोली, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, रोहन रॉय और कुछ पुलिस अधिकारियों समेत कई लोगों की भूमिका की जांच की बात कही गई है।
हालाँकि, कहा गया है कि एफ़आईआर में किसी व्यक्ति को आरोपी या मुख्य संदिग्ध के तौर पर नामित नहीं किया गया है। जिन लोगों के नाम हैं, उनके संबंध में एफ़आईआर में कहा गया है कि उनकी भूमिका की जांच की ज़रूरत है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी अपने आदेश में कहा था कि किसी व्यक्ति को तब तक आरोपी नहीं माना जाना चाहिए जब तक जाँच के दौरान उसके ख़िलाफ़ पर्याप्त सामग्री से उचित संदेह पैदा न हो। इसलिए एफ़आईआर में आदित्य ठाकरे का नाम होना अपने आप में उनके खिलाफ अपराध साबित होने के बराबर नहीं है। उनकी भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।
दिशा के पिता ने क्या आरोप लगाए हैं?
दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने अपनी बेटी की मौत की जाँच को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने मुंबई पुलिस की पहले की जाँच पर गंभीर सवाल उठाए और अपनी बेटी की मौत को आत्महत्या मानने पर भी आपत्ति जताई।सीबीआई की एफ़आईआर सतीश सालियान की ओर से दिए गए बयान और हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद दर्ज की गई है। उन्होंने जांच एजेंसी के सामने कई लोगों के नाम रखे और आरोप लगाया कि उनकी बेटी की मौत के मामले में साज़िश और बाद में कथित तौर पर मामले को दबाने की कोशिश हुई।
एफ़आईआर में उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे समेत कुछ लोगों की भूमिका की जाँच किए जाने की बात भी इसी संदर्भ में दर्ज है। ये आरोप जाँच का विषय हैं और अभी अदालत या सीबीआई की ओर से इनके सही पाए जाने का कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश
दिशा सालियान की मौत के मामले में 2 सितंबर 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया था। अदालत ने मुंबई पुलिस की अब तक की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे।
अदालत ने इस बात को गंभीरता से लिया कि दिशा की मौत के करीब छह साल बाद तक इस मामले में एफ़आईआर दर्ज नहीं की गई थी। अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस की जांच कई सवाल खड़े करती है और मामले में कई गड़बड़ियाँ दिखाई देती हैं।अदालत के सामने यह मुद्दा भी आया कि दिशा सालियान के परिवार को उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एक्सिडेंटल डेथ रिपोर्ट यानी एडीआर की प्रतियां लंबे समय तक नहीं दी गई थीं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही सीबीआई ने मामले को अपने हाथ में लेकर एफ़आईआर दर्ज की।
2020 में हुई थी दिशा सालियान की मौत
दिशा सालियान की 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक ऊंची इमारत से गिरने के बाद मौत हो गई थी। मुंबई पुलिस ने शुरुआत में इसे एक्सिडेंटल डेथ रिपोर्ट यानी एडीआर के तौर पर दर्ज किया था। बाद की पुलिस जाँच में उनकी मौत को आत्महत्या बताया गया था।
दिशा की मौत के कुछ ही दिन बाद 14 जून 2020 को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत अपने बांद्रा स्थित फ्लैट में मृत पाए गए। दोनों घटनाओं के बीच कुछ ही दिनों का अंतर होने के कारण सोशल मीडिया और सार्वजनिक बहस में दोनों मामलों को जोड़कर कई तरह के दावे किए गए।हालाँकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी आपराधिक संबंध को लेकर अलग-अलग दावे सार्वजनिक रूप से किए जाते रहे हैं। अब सीबीआई की नई जाँच का एक अहम हिस्सा दिशा सालियान की मौत की परिस्थितियों की दोबारा जाँच करना है।
दिशा सालियान का मामला पिछले कई वर्षों से महाराष्ट्र की राजनीति में भी चर्चा का विषय रहा है। आदित्य ठाकरे का नाम इस मामले से जोड़कर विपक्षी नेताओं और अलग-अलग राजनीतिक समूहों की ओर से कई आरोप लगाए जाते रहे हैं। आदित्य ठाकरे और शिवसेना यूबीटी इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं।
अब सीबीआई की जांच शुरू होने के बाद यह विवाद एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। आदित्य ठाकरे ने अपनी पहली विस्तृत प्रतिक्रिया में कहा है कि उन्हें इस मामले से जोड़ना राजनीतिक मकसद से किया जा रहा चरित्र हनन है। दूसरी तरफ, दिशा के पिता की याचिका और उनके आरोपों के आधार पर हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का रास्ता खोला है। इसलिए अब मामले में सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि नई जांच में सीबीआई को क्या तथ्य और सबूत मिलते हैं।