एनसीपी प्रमुख अजित पवार ने बीजेपी पर सिंचाई परियोजना में घोटाले का गंभीर आरोप लगाया तो बीजेपी ने भी उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से भटकाने का आरोप लगाया? आख़िर गठबंधन के साथी ही एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप क्यों लगा रहे हैं?
महाराष्ट्र में अब पुरानी सिंचाई योजना में घोटाले पर सियासी बवाल मच गया है। यह घमासान अजित पवार की एनसीपी और इसके सहयोगी दल बीजेपी के बीच ही है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने 25 साल पुराने एक सिंचाई प्रोजेक्ट में अपने ही सहयोगी दल बीजेपी के कार्यकाल में बड़ा घोटाला होने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि 1999 में भाजपा-शिवसेना की सरकार के समय पुरंदर लिफ्ट सिंचाई योजना के फाइल में लागत को 100 करोड़ रुपये से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया था, ताकि पार्टी फंड जुटाया जा सके। बीजेपी ने उनके दावे पर सवाल उठाया है और कहा है कि अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से ध्यान भटकाने के लिए अजित पवार ऐसा आरोप लगा रहे हैं।
बीजेपी ने क्या जवाब दिया है, यह जानने से पहले यह जान लीजिए कि अजित पवार ने क्या आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया है, 'जब 1999 में पुरंदर लिफ्ट सिंचाई योजना की फाइल मेरे पास आई थी, तब उसकी लागत 330 करोड़ रुपये दिखाई गई थी। मैंने फाइल को खारिज कर दिया। जांच करने पर पता चला कि असली लागत सिर्फ 220 करोड़ रुपये थी। यानी 100 करोड़ रुपये पार्टी फंड के नाम पर और 10 करोड़ रुपये संबंधित अधिकारियों के लिए जोड़े गए थे। अगर ये बढ़ाई गई रकम मंजूर हो जाती तो राज्य को बड़ा आर्थिक नुकसान होता। वो फाइल आज भी मेरे पास है।'
भ्रष्टाचार पर बीजेपी ने अजित पवार को ही घेरा
इस आरोप पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। इसने कहा है कि अजित पवार से ऐसी उम्मीद नहीं थी। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार बीजेपी मंत्री और महायुति समन्वय समिति के सदस्य चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा, 'अगर उस समय फाइल अजित पवार के पास आई थी और उन्होंने ऐसे आरोप लगाए होते तो ये उनकी ईमानदारी को दिखाता। लेकिन इतने साल बाद ये बात कहना ठीक नहीं है। लोग ऐसी बातों पर भरोसा नहीं करेंगे। हमने अजित पवार से ऐसी उम्मीद नहीं की थी।'
बावनकुले ने आगे कहा, 'अजित पवार वरिष्ठ मंत्री हैं, लेकिन जिस तरह से वो बोल रहे हैं, वो अप्रत्याशित है।' बीजेपी की ओर से कहा गया कि अजित पवार अब ऐसे आरोप इसलिए लगा रहे हैं क्योंकि वह खुद सिंचाई विभाग के भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे हैं।
अजित क्या 25 साल तक भ्रष्टाचार को बचा रहे थे: खडसे
महाराष्ट्र में तब 1995 से 1999 तक भाजपा-शिवसेना की सरकार थी और उस समय सिंचाई मंत्री एकनाथ खडसे थे। खडसे ने अजित पवार के आरोपों का सीधा खंडन किया। उन्होंने कहा, 'अजित पवार खुद सिंचाई विभाग में भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे हैं। इसलिए वो जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसी बातें कर रहे हैं।'
खडसे ने आगे कहा, 'मैं 1999 में जल संसाधन मंत्री था। उस समय ऐसी कोई बात नहीं हुई। प्रोजेक्ट की लागत पार्टी फंड के लिए बढ़ाना कभी नहीं हुआ। अजित पवार ने 25 साल तक ये बात क्यों छिपाई? क्या वो 25 साल तक भ्रष्टाचार की रक्षा कर रहे थे? जनता के हित में मैं उनसे अनुरोध करता हूं कि वो अपनी फाइल खोलें और सच सामने लाएं।'
पुरंदर लिफ्ट सिंचाई योजना क्या है?
पुरंदर लिफ्ट सिंचाई योजना महाराष्ट्र के पुणे क्षेत्र में पानी की आपूर्ति के लिए बनाई गई एक अहम परियोजना है। सिंचाई प्रोजेक्ट में अक्सर लागत बढ़ाने और घोटाले के आरोप लगते रहे हैं।
ये आरोप महाराष्ट्र में भाजपा, अजित पवार गुट की एनसीपी और शिंदे शिवसेना की महायुति सरकार में नए विवाद पैदा कर रहे हैं। अजित पवार और बीजेपी नेताओं के बीच अब तल्खी बढ़ गई है। अजित पवार का दावा है कि उन्होंने उस समय फाइल खारिज कर भ्रष्टाचार रोका था, जबकि बीजेपी और खडसे इसे पुरानी बात बताकर खारिज कर रहे हैं और अजित पवार पर ही उल्टा आरोप लगा रहे हैं।
तो क्या ये मामला अब और गरमाने वाला है, क्योंकि सभी नेता जनता के सामने एक-दूसरे पर इल्जाम लगा रहे हैं या फिर स्थानीय निकाय चुनाव ख़त्म होते ही यह मामला भी दब जाएगा?