मुंबई महानगर पालिका चुनाव के एग्जिट पोल में बीजेपी को बड़ी जीत के संकेत मिले हैं, जबकि उद्धव ठाकरे–राज ठाकरे की गठबंधन रणनीति प्रभावित नहीं कर पाई। पढ़िए, किस एग्ज़िट पोल ने क्या संकेत दिए हैं।
मुंबई महानगर पालिका यानी बीएमसी चुनाव के एग्जिट पोल ने बीजेपी के नेतृत्व वाली महायुति की बड़ी जीत के आसार बताए हैं। उद्धव और राज ठाकरे भाइयों वाला गठबंधन इन सर्वे में काफी पीछे नज़र आ रहा है। एग्जिट पोल बताते हैं कि बीजेपी अकेले या अपने सहयोगियों के साथ बहुमत हासिल कर सकती है, जो मुंबई की सत्ता पर दशकों से चले आ रहे ठाकरे परिवार के प्रभाव को बड़ा झटका दे सकता है। इस चुनाव में मुंबई की 227 सीटों पर वोटिंग हुई है।
एक्सिस माय इंडिया के एग्ज़िट पोल सर्वे के अनुसार बीजेपी और शिंदे सेना के गठबंधन को 131-151 सीटें मिलने के आसार हैं। उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी, राज ठाकरे की एमएनएस और शरद पवार की एनसीपी वाले गठबंधन को 58-68 सीटें मिलने की संभावना है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को 12-16 सीटें और अन्य को 6-12 सीटें मिल सकती हैं।
एक्सिस माय इंडिया एग्ज़िट पोल
वोट प्रतिशत पाने में भी बीजेपी गठबंधन आगे
एक्सिस माय इंडिया के एग्ज़िट पोल के अनुसार बीएमसी चुनाव में वोट प्रतिशत के मामले में भी बीजेपी गठबंधन बहुत आगे रहा। सर्वे के अनुसार बीजेपी गठबंधन को 42 प्रतिशत वोट, जबकि ठाकरे बंधुओं को 32 प्रतिशत वोट मिलने के आसार हैं। कांग्रेस को 13 प्रतिशत और अन्य को भी 13 प्रतिशत वोट मिलने की संभावना जताई गई है।जेवीसी के एग्ज़िट पोल में भी बीजेपी वाले गठबंधन को बड़ी जीत मिलने की संभावना जताई गई है। इसके अनुसार बीजेपी वाले गठबंधन को 138 सीटें मिल सकती हैं, जबकि शिवसेना यूबीटी वाले गठबंधन को 59 सीटें मिलने के आसार बताए गए हैं। कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को 23 सीटें मिल सकती हैं, जबकि अन्य को 7 सीटें मिलने की संभावना है।
बीएमसी चुनाव जेवीसी एग्ज़िट पोल
डीवी रिसर्च के एग्जिट पोल के मुताबिक़, बीजेपी की अगुआई वाली महायुति को 107 से 122 सीटें मिल सकती हैं, जबकि ठाकरे बंधुओं के गठबंधन को 68 से 83 सीटें मिलने के आसार हैं। कांग्रेस और वंचित बहुजन अघाड़ी को 18 से 25 सीटें मिल सकती है। अजित पवार की एनसीपी को 2 से 4 सीटें और अन्य को 8 से 15 सीटें मिलने की संभावना है।
बीजेपी की जीत के पीछे क्या कारण?
ज़्यादातर एग्ज़िट ने बीजेपी की बढ़त को विकास कार्यों, केंद्र सरकार की योजनाओं और मज़बूत संगठन का नतीजा बताया है। बीजेपी ने इस चुनाव में मुंबई को 'विश्व स्तरीय शहर' बनाने का वादा किया। पार्टी ने कोस्टल रोड, मेट्रो प्रोजेक्ट्स और स्लम पुनर्वास जैसी योजनाओं पर जोर दिया। देवेंद्र फडणवीस और अन्य नेताओं ने दावा किया कि पिछले कुछ सालों में महाराष्ट्र सरकार में बीजेपी की भागीदारी से मुंबई में बुनियादी सुविधाएं बेहतर हुई हैं।
उद्धव-राज का 'सिक्का' क्यों नहीं चला?
उद्धव ठाकरे ने चुनाव में भावनात्मक अपील की। उन्होंने बीएमसी को 'मुंबई की आत्मा' बताते हुए कहा कि बीजेपी मुंबई को दिल्ली के कंट्रोल में लाना चाहती है। लेकिन एग्जिट पोल दिखाते हैं कि वोटरों पर यह असर नहीं पड़ा। शिवसेना के विभाजन के बाद उद्धव गुट कमजोर हो गया और एकनाथ शिंदे गुट ने उनके वोट बैंक में सेंध लगाई।राज ठाकरे ने एमएनएस के जरिए मराठी भाषा, स्थानीय रोजगार और हिंदुत्व पर जोर दिया। उन्होंने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि वे 'गुजराती प्रभाव' बढ़ा रहे हैं। लेकिन लगता है कि वोटरों ने राज के आरोपों को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। वैसे, राज ठाकरे की पार्टी कभी बड़ी ताकत नहीं बन पाई। उनकी बातें सुनने में अच्छी लगती हैं, लेकिन वोट में नहीं बदलतीं। पिछले चुनावों में शिवसेना ने 2017 में 84 सीटें जीती थीं, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। ठाकरे परिवार का पारंपरिक वोट बैंक बंट गया, और युवा वोटर भी छिटक गए।
बीएमसी का बजट 50000 करोड़ से ज़्यादा
अगर एग्जिट पोल सही साबित हुए तो बीजेपी पहली बार बीएमसी पर कब्जा कर सकती है। यह महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव होगा, क्योंकि बीएमसी का बजट 50,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है, जो कई राज्यों से बड़ा है।