शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बीएमसी चुनाव नतीजों के बाद अपने पहली सार्वजनिक संबोधन में बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने शनिवार को मुंबई में कहा कि बीजेपी ने विश्वासघात करके चुनाव जीता है और मुंबई को गिरवी रखना चाहती है। मराठी मानुष इस पाप को कभी माफ नहीं करेगा। उद्धव का बयान इस घटनाक्रम के बाद आया है, जब शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने अपनी पार्टी के नए जीते हुए नगर सेवकों (पार्षदों) को बांद्रा के फाइव स्टार होटल में ठहरा दिया है। वे बीएमसी के मेयर का चयन होने तक वहां रहेंगे।

शुक्रवार को हुए बीएमसी चुनावों में महायुति गठबंधन (बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना) ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया। 227 सदस्यीय सदन में बहुमत के लिए 114 सीटें चाहिए थीं, जबकि महायुति ने 118 सीटें जीतीं। इसमें बीजेपी ने 89 और शिंदे गुट की शिवसेना ने 29 सीटें हासिल कीं। वहीं, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) ने 65 सीटें जीतीं, जबकि राज ठाकरे की एमएनएस को 6 सीटें मिलीं। कुल मिलाकर ठाकरे चचेरे भाइयों के गठजोड़ को 71 सीटें प्राप्त हुईं।

उन्होंने आगे कहा, "बीजेपी मुंबई को गिरवी रखना चाहती है, विश्वासघात से चुनाव जीता; मराठी मानुष इस पाप को कभी माफ नहीं करेगा।" उद्धव ने अपनी पार्टी के मेयर बनने का सपना दोहराया और कहा, "शिवसेना (यूबीटी) का मेयर हमारा सपना है। अगर भगवान ने चाहा तो यह सच होगा।"

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उद्धव ठाकरे ने मुंबई में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, "बीजेपी शिवसेना को जमीनी स्तर पर खत्म नहीं कर सकी। वे सारे साधनों का इस्तेमाल करके भी वफादारी नहीं खरीद सकते। विश्वासघातियों को पैसे, दबाव, एजेंसियों और चालों से खरीदा जा सकता है, लेकिन वफादारी बिकाऊ नहीं होती। हमारी जिम्मेदारी अब पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।"

ठाकरे ने कहा कि बीजेपी और उनके बीच स्पष्ट अंतर है। कागज पर शिवसेना को निशाना बनाया गया, लेकिन लोगों के दिलों से इसे कोई मिटा नहीं सकता।

चुनाव परिणामों के बाद शिवसेना (यूबीटी) ने सोशल मीडिया पर पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, "यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। यह तब तक जारी रहेगी जब तक मराठी व्यक्ति को वह सम्मान नहीं मिल जाता जो वह हकदार है।"

नतीजों में महायुति को गुजराती समुदाय का मजबूत समर्थन मिला, जिसने मुलुंड में सभी सीटें और घाटकोपर के एन वार्ड में 11 में से 7 सीटें जीतीं। वहीं, दक्षिण और मध्य मुंबई के मराठी बहुल इलाकों में ठाकरे गठबंधन ने अच्छा प्रदर्शन किया, जहां लगभग 20 वार्डों में अधिकांश सीटें जीतीं। वर्ली में 7 में से 6 सीटें ठाकरे चचेरे भाइयों को मिलीं। 

संजय राउत ने क्या कहा

शिवसेना यूबीटी के सांसद संजय राउत ने इशारा किया है कि- हमारे पास एक ऐसा फॉर्मूला है जिससे हम बीजेपी को बीएमसी में सत्ता में आने से रोक सकते हैं, लेकिन हम अभी ऐसा नहीं कर रहे हैं। राउत ने कहा- "भाजपा 'जयचंद' बनाकर चुनाव जीतती है। वरना भाजपा की ताकत क्या है? हर राज्य में, हर शहर में, वे हर पार्टी को तोड़कर 'जयचंद' खड़ा करते हैं और चुनाव जीतते हैं। उनकी ताकत शून्य है। उपमुख्यमंत्री (एकनाथ शिंदे) की ताकत क्या है? जब तक वे सत्ता में हैं, लोग उन्हें सलाम करेंगे; वरना लोग उनकी गाड़ियों पर जूते फेंकेंगे।"

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लगभग तीन दशकों तक भारत के सबसे अमीर नगर निकाय पर कब्जा रखने के बाद ठाकरे परिवार को बीएमसी की सत्ता से हाथ धोना पड़ा है। एकनाथ शिंदे ने तीन साल पहले पार्टी से अलग होकर बीजेपी के साथ गठबंधन किया था, जिसके बाद यह चुनाव ठाकरे बनाम शिंदे-बीजेपी के बीच की बड़ी जंग बन गया था। उद्धव ठाकरे ने कार्यकर्ताओं से कहा कि अब जिम्मेदारी और बढ़ गई है और मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) का प्रभाव बरकरार रहेगा।