जिस चुनाव में बीजेपी नेता कांग्रेस को शून्य सीटें मिलने का ताना दे रहे थे, उसी चुनाव में कांग्रेस ने RSS के गढ़ माने जाने वाले नागपुर की स्नातक सीट पर जीत दर्ज कर ली। महाराष्ट्र में विधान परिषद की पांच सीटों के चुनाव में कांग्रेस ने नागपुर स्नातक सीट जीतकर बीजेपी को बड़ा झटका दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नतीजे आने से पहले कांग्रेस पर चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाने को लेकर तंज कसा था। लेकिन नागपुर में कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी की सरप्राइज जीत के बाद महाराष्ट्र कांग्रेस ने फडणवीस पर निशाना साधते हुए कहा कि ट्वीट हटाकर उन्होंने एक बार फिर सावरकर की विरासत बचा ली! इन चुनावों में महाविकास अघाड़ी ने पांच में से तीन सीटें जीतीं, जबकि सत्तारूढ़ महायुति को दो सीटों से संतोष करना पड़ा।
कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने बीजेपी के सुधाकर कोहले को 3271 वोटों से हराकर नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीट बरकरार रखी। मतगणना करीब 40 घंटे से ज्यादा समय तक चली और इस सीट के नतीजे पर खास नजर रखी जा रही थी। खास बात यह रही कि नतीजे आने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोशल मीडिया पर कांग्रेस पर तंज कसे थे। लेकिन नागपुर में कांग्रेस की जीत ने विपक्ष को पलटवार का मौक़ा दे दिया।
महाराष्ट्र कांग्रेस ने फडणवीस के उस पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा किया, जिसे बाद में हटा दिया गया। कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि ट्वीट हटाकर फडणवीस ने एक बार फिर वीर सावरकर की विरासत बचा ली। यह सावरकर को लेकर बीजेपी की राजनीति पर कांग्रेस का हमला है।

घमंड का तीर सीधा सीने में लगा: कांग्रेस

महाराष्ट्र कांग्रेस ने एक्स पर फडणवीस के हटाए गए पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए उन पर निशाना साधा। कांग्रेस के मुताबिक फडणवीस ने नतीजे पूरी तरह आने से पहले ही पोस्ट कर दिया था कि कांग्रेस को चुनाव में बड़ी हार मिली है और उसके खाते में एक भी सीट नहीं आई। नागपुर में कांग्रेस की जीत के बाद पार्टी ने कहा कि मुख्यमंत्री का घमंड उन्हीं पर भारी पड़ गया।
महाराष्ट्र कांग्रेस ने अपने पोस्ट में लिखा कि फडणवीस ने नतीजे आने से पहले ही ट्वीट कर दिया था, लेकिन उनका घमंड भरा तीर लौटकर सीधे उनके सीने में लगा। आखिरकार उन्हें अपना ट्वीट हटाना पड़ा। कांग्रेस ने आगे तंज कसते हुए कहा कि फडणवीस अभी से डर गए हैं और यह तो केवल ट्रेलर है। पार्टी ने दावा किया कि 2029 में महाराष्ट्र की जनता ऐसा राजनीतिक झटका देगी कि आज का यह ट्वीट भी उन्हें याद आएगा।
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कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, "प्रवचनमंत्री जी को आत्मविश्लेषण की ज़रूरत है, लेकिन वे दूसरों को प्रवचन दे रहे हैं! कांग्रेस की सीटें गिनने से पहले काश यह भी विचार कर लेते कि उनके अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी की दोनों सीटों पर भाजपा क्यों हारी और RSS के गढ़ नागपुर में कांग्रेस ने भाजपा को कैसे हराया? मोदी जी, ट्रोलिंग बंद कीजिए। करोड़ों परिवार कमरतोड़ महंगाई से त्रस्त हैं, युवा बेरोज़गार हैं और निजी निवेश ठप पड़ा है। अहंकार छोड़कर इन मुद्दों पर विचार करिए! वाराणसी और नागपुर से लेकर लखनऊ, प्रयागराज, पटना की जनता ने स्पष्ट रूप से आपकी नीतियों के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव पारित किया है।"

मोदी ने भी कांग्रेस पर कसा था तंज

इस राजनीतिक विवाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा में रहा। बुधवार को चुनाव नतीजों के बीच प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा था कि पार्टी को विधान परिषद चुनावों में एक भी सीट नहीं मिली है। बीजेपी नेताओं ने इस चुनाव को कांग्रेस के लिए बड़ी राजनीतिक हार के तौर पर पेश करने की कोशिश की। लेकिन नागपुर सीट पर कांग्रेस की जीत ने इस दावे को बदल दिया और विपक्ष को बीजेपी के खिलाफ जवाबी हमला करने का मौका मिल गया।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी कांग्रेस पर व्यंग्य किया। नागपुर में कांग्रेस की जीत सामने आने के बाद उन्होंने पार्टी को एक सीट जीतने की बधाई देते हुए अपने पहले के ‘जीरो सीट’ वाले पोस्ट के लिए व्यंग्यात्मक अंदाज में माफी मांगी।

RSS के गढ़ नागपुर में बीजेपी की हार क्यों अहम?

नागपुर में कांग्रेस की जीत इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह शहर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय होने के साथ-साथ बीजेपी के मजबूत राजनीतिक आधार वाले इलाकों में शामिल है। यह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र भी है। दोनों नेताओं ने नागपुर में बीजेपी उम्मीदवार सुधाकर कोहले के पक्ष में प्रचार किया था।
इसके बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने जीत दर्ज की। इससे बीजेपी को अपने मजबूत माने जाने वाले क्षेत्र में झटका लगा है। हालांकि, विधान परिषद की स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीट के नतीजे को पूरे महाराष्ट्र के राजनीतिक माहौल का सीधा संकेत मानना उचित नहीं होगा। फिर भी नागपुर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में जीत ने कांग्रेस को राजनीतिक रूप से उत्साहित किया है और बीजेपी के दावों पर सवाल उठाने का अवसर दिया है।

गडकरी 24 साल तक इसी सीट से रहे विधान परिषद सदस्य

नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की राजनीतिक अहमियत का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी लंबे समय तक इसी सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। गडकरी जुलाई 1990 से मई 2014 तक करीब 24 साल महाराष्ट्र विधान परिषद में नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से सदस्य रहे थे। इस सीट पर बीजेपी का लंबे समय तक मजबूत प्रभाव रहा है। ऐसे में कांग्रेस का यहां जीतना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि है।

अभिजीत वंजारी ने सुधाकर कोहले को 3,271 वोटों से हराकर इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा बरकरार रखा। नतीजे ने बीजेपी के उस दावे को भी कमजोर किया, जिसके तहत पार्टी चुनाव में कांग्रेस की पूरी तरह हार की बात कह रही थी।

महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी ने जीतीं तीन सीटें

महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था। नतीजों में विपक्षी महाविकास अघाड़ी यानी MVA ने तीन सीटें जीतीं, जबकि बीजेपी के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन को दो सीटें मिलीं। महायुति में शामिल बीजेपी और शिवसेना ने एक-एक सीट जीती। इस तरह कुल पाँच सीटों में से तीन पर विपक्षी गठबंधन की जीत हुई। इन नतीजों ने महाविकास अघाड़ी को सरकार के ख़िलाफ़ राजनीतिक हमला तेज करने का मौक़ा दिया।
कांग्रेस ने नागपुर की जीत को बीजेपी के लिए खास झटका बताया, क्योंकि यह सीट मुख्यमंत्री फडणवीस और केंद्रीय मंत्री गडकरी के गृह क्षेत्र से जुड़ी है। विपक्ष ने वाराणसी में बीजेपी की हार को भी इसी राजनीतिक संदर्भ में उठाया। वाराणसी की संबंधित सीट समाजवादी पार्टी ने जीती थी, जो विपक्षी गठबंधन की सहयोगी है।
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रोहित पवार ने भी फडणवीस पर साधा निशाना

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने भी नागपुर में बीजेपी की हार को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तंज कसा। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि फडणवीस ने खुद नागपुर में प्रचार किया था, इसके बावजूद बीजेपी उम्मीदवार जीत नहीं सका। रोहित पवार ने चुनाव में बैलेट पेपर के इस्तेमाल का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि नतीजा ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से मतदान होने का परिणाम है।
विपक्षी दल लंबे समय से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों यानी EVM के इस्तेमाल पर सवाल उठाते रहे हैं और बीजेपी को चुनावी लाभ मिलने के आरोप लगाते हैं। बीजेपी और चुनाव आयोग इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं।

NCP उम्मीदवार की हार पर प्रफुल्ल पटेल ने उठाए सवाल

दूसरी ओर, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता प्रफुल्ल पटेल ने चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन पर चिंता जताई। NCP का एकमात्र उम्मीदवार चुनाव हार गया। इसके बाद पटेल ने पार्टी की प्राथमिकताओं और संगठनात्मक ढाँचे की तत्काल समीक्षा करने की ज़रूरत बताई। जहां कांग्रेस और महाविकास अघाड़ी नागपुर की जीत को बीजेपी के लिए झटके के तौर पर पेश कर रहे हैं, वहीं NCP के भीतर संगठन और चुनावी रणनीति पर पुनर्विचार की बात सामने आई है।

नागपुर की जीत से कांग्रेस को नई ताकत मिलेगी?

नागपुर में कांग्रेस की जीत ने पार्टी को बीजेपी के मजबूत गढ़ में चुनौती देने का मौका दिया है। यह जीत ऐसे समय आई है, जब बीजेपी के बड़े नेता चुनाव के नतीजों को कांग्रेस की हार के रूप में पेश कर रहे थे। प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री फडणवीस के तंज के बाद कांग्रेस ने नागपुर के नतीजे को राजनीतिक पलटवार का आधार बनाया। फडणवीस के हटाए गए पोस्ट को लेकर ‘सावरकर की विरासत’ वाला व्यंग्य भी इसी रणनीति का हिस्सा है।
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फिर भी नागपुर में जीत कांग्रेस के लिए प्रतीकात्मक रूप से अहम है। इससे पार्टी यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि बीजेपी के सबसे मजबूत माने जाने वाले क्षेत्रों में भी उसे चुनौती दी जा सकती है।

फिलहाल इस चुनाव का सबसे दिलचस्प पहलू यही है कि कांग्रेस को शून्य सीट मिलने का दावा करने वाले बीजेपी नेताओं को नागपुर में हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस ने इस नतीजे को अपनी राजनीतिक जीत के साथ-साथ बीजेपी नेतृत्व के अहंकार पर चोट के रूप में पेश किया है। वहीं, महाराष्ट्र के पांच विधान परिषद चुनावों में महाविकास अघाड़ी की तीन सीटों की जीत ने विपक्ष को राज्य की राजनीति में नया उत्साह दिया है।