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महाराष्ट्र: सीएम ठाकरे के घर तक पहुंचा कोरोना वायरस, बिगड़ रहे हालात

महाराष्ट्र और मुंबई में दिन-प्रतिदिन कोरोना वायरस के संक्रमित मरीजों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है और अब प्रदेश की सत्ता का एक महत्वपूर्ण केंद्र मातोश्री भी अब इस वायरस की चपेट में आ गया है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सरकारी आवास के बजाय अपने पैतृक आवास मातोश्री से ही कामकाज करते हैं। लिहाजा कोरोना की यहां तक पहुंच ने खलबली मचा दी है। महाराष्ट्र में इस वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 1 हज़ार से ज्यादा हो गयी है और अब तक 64 लोगों की मौत हो चुकी है। 

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मातोश्री के सामने शारदा संगीत विद्यालय से करीब 50 मीटर की दूरी पर वर्षों से एक चाय का ठेला है। इस ठेले पर मातोश्री में तैनात रहने वाले वाहन चालक, टेलीफोन ऑपरेटर आदि चाय पीते हैं। चार दिन पहले चाय विक्रेता में जब कोरोना वायरस के लक्षण दिखाई दिए तो उसे जोगेश्वरी स्थित बालासाहब ठाकरे ट्रॉमा केयर हॉस्पिटल में जांच के लिए भेजा गया था। 

उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर पूरे क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया गया। मातोश्री में उद्धव ठाकरे के रहने की वजह से वर्तमान में यहां क़रीब 180 कर्मचारी ड्यूटी रहते हैं। इनमें बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी भी हैं, जो इस चाय की दुकान पर नियमित रूप से चाय पीने के लिए आते-जाते हैं। 

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मातोश्री के सूत्रों से जो ख़बर मिली है, उसके अनुसार विगत 14 दिनों से पूरे ठाकरे परिवार ने स्वयं को घर के दायरे में ही रखा हुआ है और बाहर के लोगों से मिलने या किसी सार्वजनिक स्थान पर आना-जाना भी बंद किया हुआ है। यह भी बताया गया है कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सोशल डिस्टेंसिंग पर बहुत ध्यान रखा हुआ है और अगर उन्हें कहीं जाना भी हो तो वह ख़ुद ही गाड़ी चलाकर जाते हैं। 

चाय विक्रेता के संक्रमित होने की ख़बर के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि मातोश्री पर तैनात सभी कर्मचारियों की जांच की जाएगी और उनके स्थान पर नए कर्मचारी तैनात किये जायेंगे। मुंबई महानगरपालिका के आयुक्त प्रवीण परदेशी ने बताया कि पूरे कला नगर क्षेत्र को, जहां मातोश्री स्थित है, वहां पर दवाओं का छिड़काव करने के बाद इसे सील कर दिया गया है। 

परदेशी ने बताया कि इसके अतिरिक्त तब्लीग़ी जमात के 150 लोगों के ख़िलाफ़ क़ानून का उल्लंघन करने को लेकर मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि मुंबई में जो नए मामले सामने आ रहे हैं उनमें 90 प्रतिशत जमात के लोगों या उनसे संपर्क में आने वालों के हैं। 

शिवसेना के मुखपत्र सामना में लिखे संपादकीय में उन लोगों को भी कठघरे में खड़ा किया गया है जिन्होंने थाली, ताली या दीपक जलाने के नाम पर क़ानून तोड़े हैं। संपादकीय में कहा गया है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो संदेश लोगों को देते हैं, वह सही तरीके से उन तक नहीं पहुंचता है या कुछ लोग जानबूझकर नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं? 

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संजय राय
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