महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में आंतरिक कलह सामने आ रही है। बीजेपी और उपमुख्यमंत्री अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव एक साथ नहीं लड़ेंगी। बीजेपी ने एनसीपी के साथ गठबंधन से साफ इनकार कर दिया है, जिसका मुख्य कारण एनसीपी की मुंबई इकाई के अध्यक्ष नवाब मलिक हैं। मलिक पर मनी लॉन्डरिंग और अंडरवर्ल्ड से संबंधों के गंभीर आरोप लगे हैं। लेकिन किसी केस में सजा नहीं हुई है। नवाब वर्तमान में जमानत पर हैं।

बीजेपी के वरिष्ठ मंत्री और मुंबई इकाई प्रमुख आशीष शेलार ने स्पष्ट कहा कि पार्टी ने बीएमसी चुनाव में एनसीपी के साथ किसी भी गठबंधन से इनकार कर दिया है। इसकी जानकारी हाईकमान को दे दी गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों में भी अलग-अलग लड़ने की बात कही, लेकिन इसे 'फ्रेंडली लड़ाई' करार दिया। उन्होंने कहा कि दोनों दल राजनीतिक स्थिति को अच्छी तरह समझते हैं, इसलिए यह लड़ाई तीसरे पक्ष को फायदा पहुंचाने वाली नहीं होगी। अजित पवार ने भी फडणवीस की बात मानते हुए कहा कि मुख्यमंत्री महाराष्ट्र में बीजेपी के सर्वोच्च नेता हैं और उनका फैसला अंतिम है।

यह फैसला महायुति के लिए नई चुनौती पेश कर रहा है। 2017 में बीजेपी ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ जैसे एनसीपी के गढ़ों पर अकेले कब्जा किया था। अब बीजेपी इन नगर निगमों को अकेले अपने पास रखना चाहती है, जबकि अजित पवार अपनी पार्टी की पुरानी ताकत वापस हासिल करने पर जोर दे रहे हैं। कार्यकर्ताओं के मनोबल और स्थानीय स्तर की गतिशीलता को देखते हुए ऐसे 'फ्रेंडली मुकाबले' बढ़ रहे हैं।

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महायुति में दरार की वजह चुनाव

बीएमसी सहित 29 नगर निगमों के चुनाव 15 जनवरी 2026 को होने हैं। महायुति ने 227 सीटों वाली बीएमसी में 150 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है और बीजेपी ने 'मराठी मानुष' को मेयर बनाने का वादा किया है। हालांकि, नवाब मलिक के मामलों का साया अभी भी बीजेपी-एनसीपी एकता पर बना हुआ है। कुछ सूत्रों का दावा है कि बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना मुख्य रूप से सीट बंटवारा कर रही हैं (बीजेपी 130-140, शिंदे सेना 80-90 सीटें), जबकि एनसीपी को बाहर रखने की रणनीति अपनाई जा सकती है ताकि मुस्लिम वोट बंटें। हाल में हुए पंचायत और नगर पालिका चुनावों में भी महायुति की दरार साफ तौर पर नज़र आई थी। जब गठबंधन के दल कई जगह एक दूसरे के खिलाफ लड़ते नज़र आए।

गठबंधन में तनाव कम नहीं हुआ है। शिंदे सेना और बीजेपी के बीच पूर्व कॉर्पोरेटरों की दलबदली को लेकर हालिया विवाद हुआ था, जिसके बाद लंबी बैठकों से समझौता तो हुआ, लेकिन आंतरिक कलह बरकरार है। अजित पवार का आरएसएस कार्यक्रमों से दूरी बनाना और कुछ नेताओं की बगावत जैसी खबरें भी सामने आई हैं। विपक्ष इसे गठबंधन की कमजोरी बता रहा है, जबकि महायुति नेता 2029 विधानसभा चुनाव तक एकजुट रहने के दावे कर रहे हैं।

नवाब मलिक का मामला

एनसीपी (एपी) के मुख्य प्रवक्ता आनंद परंजपे ने कहा कि गठबंधन पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री लेंगे। नवाब मलिक पर आरोप हैं, लेकिन उनमें से कोई भी साबित नहीं हुआ है। जांच जारी है। उन्होंने दोहरे मापदंड का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “नवाब की बेटी सना मलिक महायुति सरकार में विधायक हैं। यह उन्हें स्वीकार्य है। साथ ही, जब सुधाकर बड़गुजर (नासिक से भाजपा नेता) और सलीम कुत्ता (दाऊद का सहयोगी) की तस्वीरें वायरल हुईं, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं थी। परंजपे ने सवाल किया- अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग मापदंड क्यों?
प्रवर्तन निदेशालय ने नवाब मलिक पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया है। उन पर अंडरवर्ल्ड गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम के साथियों सलीम पटेल और सरदार शाह वली खान से जुड़ी संपत्तियों का मालिक होने का भी आरोप है। फिलहाल वे इलाज की वजह से जमानत पर हैं। 
लेकिन भाजपा का यह रुख कोई आश्चर्य की बात नहीं है। 2023 में महायुति सरकार में शामिल होने के बाद, फडणवीस ने अजीत पवार को पत्र लिखकर मलिक को गठबंधन में शामिल न करने की चेतावनी दी थी।
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फडणवीस और अजित पवार के बयान

सोमवार को फडणवीस ने कहा था, “अजित पवार और हम पुणे और पिंपरी चिंचवाड़ में एक साथ चुनाव नहीं लड़ सकते। हम दोनों राजनीति को अच्छी तरह समझते हैं और जानते हैं कि अगर हम एक साथ चुनाव लड़ते हैं, तो इससे किसी तीसरे दल को फायदा होगा, और हम ऐसा होने नहीं देना चाहते। हम एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे, लेकिन यह एक सौहार्दपूर्ण मुकाबला होगा।” इसके बाद अजित पवार ने कहा, “अगर मुख्यमंत्री ने ऐसा कहा है, तो उन्होंने सोच-समझकर ही कहा होगा। मुख्यमंत्री महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी के सर्वोच्च नेता हैं। मुख्यमंत्री का जो भी कहना होगा, वही अंतिम होगा।” बता दें कि 2017 में भाजपा के सत्ता में आने से पहले पिंपरी चिंचवाड़ लगभग 9 वर्षों तक एनसीपी का गढ़ था। पुणे भी एनसीपी का गढ़ था, जिसे भाजपा ने 2017 में बिना किसी समर्थन के छीन लिया था।इसलिए, फडणवीस दोनों नगर निगमों पर अकेले ही अपना दबदबा बनाए रखना चाहेंगे, जबकि अजित पवार वहां एनसीपी का वर्चस्व फिर से स्थापित करना चाहेंगे।

पवार ने कहा- “जहां तक ​​एनसीपी का सवाल है, हम पुणे और पिंपरी चिंचवाड़ में एनसीपी की जीत सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन के संबंध में अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। नामांकन दाखिल करने से पहले इस पर भी अंतिम निर्णय लिया जाएगा।”