महाराष्ट्र के जालना और अंबड शहरों में धनगर समुदाय द्वारा अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग को लेकर किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों के बाद कर्फ्यू लगा दिया गया है। इस आंदोलन का नेतृत्व दीपक बोरहाडे कर रहे हैं।
महाराष्ट्र के जालना और अंबड में कर्फ्यू लगा दिया गया है
महाराष्ट्र के जालना जिले में धनगर समुदाय के विरोध प्रदर्शनों के बाद जालना और अंबड शहरों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। यह कर्फ्यू कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन द्वारा लगाया गया है।धनगर समुदाय लंबे समय से अनुसूचित जनजाति (ST) दर्जे की मांग कर रहा है। ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं और आरक्षण का लाभ मिल सके।
इस मांग को लेकर धनगर नेता दीपक बोरहाडे सक्रिय हैं, जो पूर्व पुलिस कांस्टेबल भी रह चुके हैं। वे इस मुद्दे पर आंदोलन चला रहे हैं और पहले भी आमरण अनशन जैसी कार्रवाई कर चुके हैं।प्रदर्शनों के बाद स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए जालना की जिलाधिकारी आशिमा मित्तल ने कर्फ्यू के आदेश जारी किए। यह कर्फ्यू शनिवार सुबह 5 बजे से रात 12 बजे तक (कुछ रिपोर्टों में 19 घंटे का उल्लेख) लागू है। शहरों में सार्वजनिक सभाएं, दुकानें और अन्य गतिविधियां प्रतिबंधित हैं।
मुक्तेश्वर द्वार क्षेत्र में, जहां धनगर नेता दीपक बोरहाडे का निवास है, भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। यह कदम किसी भी तरह की हिंसा या अशांति को रोकने के लिए उठाया गया है। पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्क है और स्थिति पर नजर रख रही है।यह घटना महाराष्ट्र में हाल ही में हुए महानगरपालिका चुनावों के नतीजों के ठीक बाद हुई है, जिससे राजनीतिक और सामाजिक तनाव बढ़ा है।
धनगर समुदाय का यह आंदोलन राज्य में आरक्षण से जुड़े अन्य मुद्दों (जैसे मराठा आरक्षण) के साथ जुड़ा हुआ माना जा रहा है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और कर्फ्यू का पालन करने की अपील की है। स्थिति सामान्य होने तक कर्फ्यू जारी रह सकता है।
22 जनवरी को चलो मुंबई की घोषणा
इस आंदोलन में धनगर नेता जैसे गोपीचंद पडलकर (BJP MLC), प्रकाश शेंडगे आदि सक्रिय हैं, और 21 जनवरी 2026 को "चलो मुंबई" जैसे आंदोलन की घोषणा की गई है। महायुति सरकार (शिंदे/फडणवीस) ने कई बार आश्वासन दिए, लेकिन कोई ठोस GR या प्रस्ताव केंद्र को नहीं भेजा गया।
धनगर (Dhangar) समुदाय महाराष्ट्र का एक प्रमुख पशुपालक (shepherd) समुदाय है, जो मुख्य रूप से पश्चिमी महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और अन्य क्षेत्रों में रहता है। इसकी अनुमानित आबादी राज्य की कुल जनसंख्या का लगभग 9% (लगभग 1 करोड़ से अधिक) है। यह समुदाय लंबे समय से अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe - ST) दर्जे की मांग कर रहा है, ताकि उन्हें ST श्रेणी में 7% आरक्षण, शिक्षा, नौकरियों और अन्य सरकारी योजनाओं में विशेष लाभ मिल सके।
वर्तमान स्थिति और आरक्षण
धनगर समुदाय वर्तमान में महाराष्ट्र में विमुक्त जाति और घुमंतू जनजाति (Vimukta Jati and Nomadic Tribes - VJNT) श्रेणी में आता है। विशेष रूप से NT-C subcategory में, जहां उन्हें 3.5% आरक्षण मिलता है। वे ST दर्जे की मांग कर रहे हैं क्योंकि अन्य राज्यों में "धनगड" (Dhangad) या इसी तरह के नाम वाली जनजाति ST सूची में शामिल है। उनका दावा है कि महाराष्ट्र में वर्तनी की गलती (typographical error) के कारण उन्हें ST लाभ से वंचित रखा गया है। "Dhangar" के बजाय "Dhangad" ST सूची में है, और दोनों एक ही समुदाय हैं।
धनगर समुदाय की यह मांग दशकों पुरानी है। लेकिन हाल के वर्षों में (2019 से अब तक) यह और तेज हो गई है। विभिन्न सरकारों (कांग्रेस, NCP, BJP, शिवसेना आदि) ने इसका समर्थन किया है, लेकिन अमल नहीं हुआ। कई समितियां बनीं, जैसे TISS (Tata Institute of Social Sciences) रिपोर्ट (2015-2019), सुधाकर शिंदे समिति (2024) आदि, लेकिन अधिकांश रिपोर्टों में धनगर को ST मानदंडों पर खरा नहीं पाया गया। बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2024 में कई याचिकाओं को खारिज किया, कहते हुए कि "Dhangad" और "Dhangar" अलग हैं, और राज्य ST सूची में बदलाव केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में है।
अनुसूचित जनजाति (Adivasi/ST) समुदाय इसका कड़ा विरोध कर रहा है, क्योंकि इससे ST का 7% आरक्षण कमजोर हो जाएगा। 2024 में आदिवासी विधायकों (जैसे नरहरी झिरवाल) ने मंत्रालय की तीसरी मंजिल से नेट पर कूदकर विरोध जताया।बंजारा (Vanjari) समुदाय की भी ST मांग है, जिससे और जटिलता बढ़ी है।केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि ST सूची में बदलाव केवल संसद कर सकती है, राज्य केवल सिफारिश कर सकता है।
धनगरों का राजनीतिक महत्व
धनगर समुदाय 30-35 विधानसभा और कुछ लोकसभा सीटों (बारामती, माढा, सोलापुर, सतारा आदि) में निर्णायक है। यह मराठा आरक्षण के बाद एक और कोटा विवाद है, जो चुनावों (विशेषकर 2024-2025 विधानसभा) में वोट बैंक पॉलिटिक्स का मुद्दा बन गया है। विपक्ष और आदिवासी नेता इसे संवैधानिक उल्लंघन बताते हैं।
धनगर समुदाय की ST मांग सामाजिक-आर्थिक न्याय पर आधारित है, लेकिन कानूनी, संवैधानिक और अन्य समुदायों के विरोध के कारण यह अब तक पूरी नहीं हुई। हाल के विरोध प्रदर्शन से स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, और केंद्र-राज्य स्तर पर आगे की कार्रवाई पर निर्भर है।