मुंबई के प्रसिद्ध काला घोड़ा कला महोत्सव यानी केजीएएफ में एक्टिविस्ट आनंद तेलतुंबड़े की एक किताब पर चर्चा कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया है। आनंद तेलतुंबड़े की किताब जेल से जुड़ी कहानियों पर आधारित है। मंगलवार रात को यह फ़ैसला लिया गया, जिसके पीछे ऑनलाइन ट्रोलिंग और मुंबई पुलिस की कथित अनुरोध का हवाला दिया गया है। क्या यह कारण तार्किक लगते हैं या फिर यह सेंसरशिप या अभिव्यक्ति की आज़ादी को दबाने जैसा है?

कार्यक्रम का नाम था 'Incarcerated: Tales from Behind Bars' यानी जेल के पीछे की कहानियां। इसमें आनंद तेलतुंबड़े अपनी किताब "द सेल एंड द सोल: ए प्रिजन मेमॉयर" पर बात करने वाले थे। उनके साथ लेखिका नीता कोल्हटकर और स्क्रॉल के एडिटर नरेश फर्नांडिस भी शामिल होने वाले थे। यह सत्र गुरुवार रात 8 बजे डेविड ससून लाइब्रेरी गार्डन में होना था।
फेस्टिवल के डायरेक्टर ब्रिंदा मिलर ने रद्द होने पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, लेकिन कहा कि यह अप्रत्याशित और दुखद है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, 'केजीएएफ़ की सुरक्षा सबसे पहले है।' रिपोर्ट के अनुसार मुंबई पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि इस कार्यक्रम के लिए कोई अनुमति नहीं मांगी गई थी, इसलिए अनुमति नहीं दी गई। हालांकि, एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पुलिस आमतौर पर ऐसे कार्यक्रम रद्द करने का निर्देश नहीं देती और ऐसा होने की संभावना कम है।

लेकिन आयोजकों ने मंगलवार रात को कार्यक्रम में बोलने वाले लोगों को ईमेल भेजा। अंग्रेज़ी अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार इसमें कहा गया कि पुलिस के अनुरोध पर कार्यक्रम रद्द किया जा रहा है। इसके साथ ही, सभी को सोशल मीडिया पर इस कार्यक्रम से जुड़े पोस्ट डिलीट करने को कहा गया।

आनंद तेलतुंबड़े ने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा, 'मुझे सच में नहीं पता क्या हुआ। स्थिति बिल्कुल बेतुकी है। कार्यक्रम पहले 8 फरवरी को था, लेकिन मुझे 7 फरवरी को भोपाल में शादी में जाना था, इसलिए मैंने तारीख बदलने की गुजारिश की। आयोजकों ने खुशी-खुशी मान लिया। जब नई तारीख का पोस्ट सोशल मीडिया पर डाला गया, तो मुंबई पुलिस ने कार्यक्रम रद्द करने को कहा। यही मुझे बताया गया है।'
उन्होंने कहा कि उनकी किताब पहले से प्रकाशित हो चुकी है और कई जगहों पर चर्चा हो चुकी है। हाल ही में प्रेस क्लब में भी बड़ा कार्यक्रम हुआ था, जिसमें कोई समस्या नहीं आई। तेलतुंबड़े ने कहा, 'यह समझना मुश्किल है कि आखिर क्यों ऐसा हुआ।'
नीता कोल्हटकर ने कहा, 'यह दुखद है कि आयोजकों ने कुछ दक्षिणपंथी ट्रोल्स और पुलिस के दबाव में झुक गए। ये कहानियां बतानी जरूरी हैं, नागरिकों को जानकारी मिलनी चाहिए। आयोजकों ने लोगों को यह मौका छीन लिया। यह कैंसल कल्चर हमारे लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है।'

कार्यक्रम नवंबर 2025 में प्रस्तावित हुआ था और दिसंबर में फाइनल हुआ। सोशल मीडिया पर नई तारीख आने के बाद दक्षिणपंथी अकाउंट्स से ट्रोलिंग शुरू हो गई। कुछ ने तेलतुंबड़े को 'अर्बन नक्सल' कहकर विरोध किया और भिमा कोरेगांव केस का जिक्र किया।

कौन हैं आनंद तेलतुंबड़े?

आनंद तेलतुंबड़े आईआईटी के पूर्व प्रोफेसर, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्हें अप्रैल 2020 में एल्गार परिषद केस में गिरफ्तार किया गया था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने नवंबर 2022 में उन्हें जमानत दी थी और कहा था कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है जो यूएपीए के तहत आतंकी गतिविधि साबित करे।

बहरहाल, यह काला घोड़ा आर्ट्स फेस्टिवल का 26वां संस्करण है, जो 31 जनवरी से शुरू हुआ और 8 फरवरी तक चलेगा। इसमें बीएमसी, महाराष्ट्र पर्यटन विभाग और यूनेस्को जैसे संगठन शामिल हैं। फेस्टिवल के समर्थकों में महाराष्ट्र पुलिस और मुंबई ट्रैफिक पुलिस भी सूचीबद्ध हैं। यह घटना 'कैंसल कल्चर' और अभिव्यक्ति की आजादी पर बहस छेड़ रही है। कई लोग इसे दबाव में झुकने का उदाहरण मान रहे हैं।