शहीद हेमंत करकरे पर बीजेपी और प्रज्ञा ठाकुर की स्थिति साँप-छछूंदर जैसी हो गयी है जो न तो निगलते बन रही है और न ही उगलते।
चूँकि प्रज्ञा ठाकुर को बीजेपी एक चुनावी मुद्दा बनाकर हिन्दू वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश में लगी हुई है, ऐसे में फडणवीस का यह बयान काफ़ी अहम है।
2014 के चुनाव अभियान में जहाँ पार्टी सिर्फ़ एक ही नारे ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ को लेकर चल रही थी वहीं इस बार चुनाव के हर चरण के साथ उसका नारा बदल रहा है। चुनाव पूर्व के प्रचार की शुरुआत ‘मोदी है तो मुमकिन है’ के साथ शुरू हुई थी, लेकिन उसके बाद ‘मैं भी चौकीदार’, राष्ट्रवाद -बालाकोट पर हवाई हमला और अब हिन्दू आतंकवाद पर पहुँच गया।
जब बीजेपी या यूँ कह लें कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने प्रज्ञा ठाकुर को उतारा तो वह तुरुप का पत्ता साबित होने की बजाय एक पहेली बन गयी जो अब लगता है बीजेपी और संघ को भी समझ में नहीं आ रही।