छत्रपति शिवाजी और टीपू सुल्तान की तुलना के बयान के बाद महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष पर केस दर्ज क्यों किया गया? टीपू सुल्तान का इतिहास क्या रहा है और बीजेपी विरोध क्यों करती रही है?
हर्षवर्धन सपकाल, टीपू सुल्तान और देवेंद्र फडणवीस
टीपू सुल्तान पर फिर से विवाद हो गया है। इस बार कर्नाटक में नहीं, बल्कि महाराष्ट्र में। छत्रपति शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान की तुलना करने के लिए महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई है। पुणे पुलिस ने यह मामला शनिवार रात को दर्ज किया। यह विवाद तब शुरू हुआ जब मालेगांव नगर निगम की डिप्टी मेयर शान-ए-हिंद निहाल अहमद के ऑफिस में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाने पर शिवसेना और अन्य संगठनों ने विरोध किया। इस बीच कांग्रेस नेता सपकाल ने कहा था कि छत्रपति शिवाजी महाराज के आदर्शों पर टीपू सुल्तान चले थे। इसी को लेकर विवाद बढ़ा।
सपकाल ने शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज में जो बहादुरी थी और उन्होंने 'स्वराज्य' का विचार दिया था, उसी पर चलकर बहुत बाद में टीपू सुल्तान ने भी अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उन्होंने कहा, 'इस अर्थ में टीपू सुल्तान एक महान योद्धा थे, जिन्होंने बहुत बहादुरी दिखाई और वे भारत के सच्चे बेटे थे। उन्होंने कभी जहर वाली या सांप्रदायिक सोच को नहीं अपनाया। बहादुरी के प्रतीक के रूप में हमें टीपू सुल्तान को छत्रपति शिवाजी महाराज के समकक्ष देखना चाहिए।'
सपकाल ने बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया। उन्होंने शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान की असली संविधान की मूल प्रति में लगी तस्वीरें शेयर कीं। उन्होंने लिखा कि शिवाजी महाराज का शौर्य बेजोड़ है, वे हमारा गर्व हैं। टीपू सुल्तान भी बहादुर थे और स्वराज्य के प्रेमी थे। उन्होंने शिवाजी महाराज को आदर्श मानकर अंग्रेजों से लड़ाई की।
उन्होंने बीजेपी और आरएसएस पर भी निशाना साधा और कहा कि जब शिवाजी महाराज और टीपू अंग्रेजों से लड़ रहे थे, तब भाजपा-आरएसएस की विचारधारा वाले देवेंद्र फडणवीस जैसे लोग अंग्रेजों के लिए जासूसी और गुलामी कर रहे थे। इसलिए फडणवीस को हमें इतिहास सिखाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
पुलिस में केस कैसे दर्ज हुआ?
पुणे भाजपा शहर अध्यक्ष धीरज घाटे ने पर्वती पुलिस स्टेशन में शिकायत की। उन्होंने कहा कि सपकाल के बयान से हिंदुओं की भावनाएँ आहत हुईं, क्योंकि छत्रपति शिवाजी महाराज को लोग भगवान की तरह मानते हैं। यह बयान सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ सकता है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत केस दर्ज किया। जांच जारी है।
बीजेपी और फडणवीस का हमला
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में कहा कि यह बयान बेहद शर्मनाक है। उन्होंने कहा, 'छत्रपति शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान की तुलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शिवाजी महाराज ने हिंदवी स्वराज्य की स्थापना की और मुगलों से आजादी दिलाई, जबकि टीपू सुल्तान ने हजारों हिंदुओं पर अत्याचार किए। सपकाल को शर्म आनी चाहिए। उन्हें माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस को इस पर ध्यान देना चाहिए, अगर उसमें थोड़ी भी नैतिकता बची है। कांग्रेस के सहयोगी दलों को भी नोट करना चाहिए।'देवेंद्र फडणवीस ने इसे वोट बैंक की सबसे खराब राजनीति बताया। भाजपा के अन्य नेता भी सपकाल के खिलाफ बोल रहे हैं। उन्होंने माफी और कांग्रेस को कार्रवाई करने की मांग की है। तो सवाल है कि बीजेपी टीपू सुल्तान के विरोध में क्यों है?
टीपू सुल्तान का विरोध क्यों करती है बीजेपी?
टीपू सुल्तान 18वीं सदी के मैसूर के शासक थे। वे अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई के लिए मशहूर हैं, लेकिन कुछ लोग उन्हें हिंदुओं पर अत्याचार और कट्टरता के लिए भी आलोचना करते हैं। वैसे, टीपू सुल्तान को लेकर बीजेपी बार-बार मुद्दा उठाती रही है और इस वजह से इस पर विवाद भी होता रहा है। कर्नाटक में पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने 2019 में माध्यमिक स्कूलों के इतिहास की किताब से टीपू सुल्तान के पाठ को हटाने की बात की थी तो इस पर काफी विवाद हुआ था। कर्नाटक में सत्ता में आने के तुरंत बाद जुलाई में बीजेपी सरकार ने टीपू सुल्तान की जयंती समारोह को ख़त्म कर दिया था। यह एक वार्षिक सरकारी कार्यक्रम था जिसको सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान शुरू किया गया था। इसका 2015 से ही बीजेपी विरोध कर रही थी।
टीपू सुल्तान को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का दुश्मन माना जाता था। श्रीरंगपटना में अपने क़िले का बचाव करते समय ब्रिटिश सेना से लड़ाई के दौरान मई, 1799 में उनकी हत्या कर दी गई थी।
कई इतिहासकार टीपू को एक धर्मनिरपेक्ष और आधुनिक शासक के रूप में देखते हैं जिसने अंग्रेज़ों की ताक़त को चुनौती दी थी। टीपू एक राजा थे और किसी भी मध्ययुगीन राजा की तरह उन्होंने बग़ावत करने वाली प्रजा का मनोबल तोड़ने के लिये अत्याचार किया। मध्य युग के राजाओं का इतिहास ऐसी घटनाओं से भरा पड़ा है।
इतिहास में ऐसे ढेरों उदाहरण हैं, जो ये साबित करते हैं कि टीपू सुल्तान ने हिंदुओं की मदद की। उनके मंदिरों का जीर्णोंद्धार करवाया। उसके दरबार में लगभग सारे उच्च अधिकारी हिंदू ब्राह्मण थे। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है- श्रंगेरी के मठ का पुनर्निर्माण।
1790 के आसपास मराठा सेना ने इस मठ को तहस-नहस कर दिया था। मठ के स्वामी सच्चिदानंद भारती तृतीय ने तब मैसूर के राजा टीपू सुल्तान से मदद की गुहार लगायी थी। दोनों के बीच तक़रीबन तीस चिट्ठियों का आदान-प्रदान हुआ था। ये पत्र आज भी श्रंगेरी मठ के संग्रहालय में पड़े हैं। टीपू ने एक चिट्ठी में स्वामी को लिखा था- “जिन लोगों ने इस पवित्र स्थान के साथ पाप किया है उन्हें जल्दी ही अपने कुकर्मों की सजा मिलेगी। गुरुओं के साथ विश्वासघात का नतीजा यह होगा कि उनका पूरा परिवार बर्बाद हो जायेगा।'
बहरहाल, यह ताज़ा विवाद महाराष्ट्र की राजनीति में गरमा गया है। कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। लोग सोशल मीडिया पर भी बहस कर रहे हैं। पुलिस जांच कर रही है कि आगे क्या होता है।