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महाराष्ट्र: अनिल देशमुख ने दिया इस्तीफ़ा, दिलीप पाटिल होंगे गृह मंत्री 

महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। उन्होंने इस्तीफ़े की चिट्ठी को ट्वीट किया है। एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा है कि हाई कोर्ट का आदेश आने के बाद देशमुख ने ख़ुद कहा कि यह ठीक नहीं होगा कि वे इस पद पर बने रहें और उन्होंने इस बारे में पार्टी को बताया था। मलिक ने फिर कहा कि देशमुख पर लगाए गए आरोप पूरी तरह ग़लत हैं और एनसीपी का यही स्टैंड है। 
Home Minister Anil Deshmukh submits resigns - Satya Hindi

देशमुख की जगह दिलीप वलसे पाटिल राज्य के गृह मंत्री होंगे। पाटिल एनसीपी के वरिष्ठ नेता हैं और पहले भी राज्य सरकार में मंत्री रहे हैं। 

देशमुख के इस्तीफ़े के तुरंत बाद केंद्रीय क़ानून मंत्री रविशंकार प्रसाद सामने आए और उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेन्स की। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे सरकार चलाने का नैतिक अधिकार खो चुके हैं। उन्होंने कहा कि आज़ाद भारत के इतिहास में ऐसी घटना पहले कभी नहीं हुई। 

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस परमबीर सिंह के आरोपों के बाद से ही अनिल देशमुख से इस्तीफ़ा मांगते रहे हैं। उन्होंने कहा था कि इस्तीफ़ा दिए बग़ैर इस केस की जांच सही तरीक़े से नहीं की जा सकती। 

हाई कोर्ट ने दिया आदेश 

बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार को ही सीबीआई से कहा था कि मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों पर वह 15 दिन के अंदर अनिल देशमुख के ख़िलाफ़ प्रारंभिक जाँच शुरू करे। याचिकाकर्ता डॉ. जयश्री पाटिल की याचिका पर हाई कोर्ट ने यह फ़ैसला दिया है। पाटिल के अनुसार इसके साथ ही अदालत ने यह भी कहा है कि कोई भी संज्ञेय अपराध पाए जाने पर एफ़आईआर दर्ज की जाए। 

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पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने देशमुख पर आरोप लगाया है कि उन्होंने गिरफ़्तार किए गए पुलिस अधिकारी सचिन वाज़े को हर महीने 100 करोड़ रुपये उगाहने का टारगेट दिया था। उन्होंने ये आरोप तब लगाए थे जब उन्हें मुंबई पुलिस के प्रमुख पद से हटा दिया गया था। उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखा था।
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एफ़आईआर क्यों नहीं कराई?

कुछ दिन पहले परमबीर सिंह को तब झटका लगा था जब बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनसे ही पूछ लिया था कि बिना एफ़आईआर दर्ज किए सीबीआई जांच कैसे कराई जा सकती है। अनिल देशमुख के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर अदालत ने साफ़-साफ़ कहा था कि यदि कोई अपराध हुआ है तो आपने एफ़आईआर दर्ज क्यों नहीं कराई। कोर्ट ने यहां तक कहा था कि क्या आप क़ानून से ऊपर हैं। कोर्ट परमबीर सिंह की याचिका पर ही सुनवाई कर रही थी। याचिका में उन्होंने अनिल देशमुख के ख़िलाफ़ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी। 

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