बीजेपी पर अपने सहयोगियों को ख़त्म करने का जो आरोप विपक्ष लगाता है, क्या महाराष्ट्र में बीजेपी नेता यह साबित करने में जुटे हैं? कभी मुख्यमंत्री पद के दावेदार माने जाने वाले बीजेपी के मंत्री गणेश नाइक ने शिंदे का बिना नाम लिए साफ़-साफ़ कह दिया है कि अगर पार्टी इजाजत दे तो वे उनका 'नामोनिशान मिटा देंगे'। उनके इस बयान से महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा विवाद छिड़ गया है।

शिवसेना के मंत्रियों ने महाराष्ट्र के वन मंत्री गणेश नाइक के 'हम उनका अस्तित्व ख़त्म कर देंगे' वाले बयान पर चेतावनी दी है। ईटी की रिपोर्ट के अनुसार शिवसेना नेता और सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने कहा कि बीजेपी सिर्फ़ इसलिए सत्ता में है क्योंकि शिंदे ने 2022 में अविभाजित शिवसेना के नेतृत्व के ख़िलाफ़ विद्रोह किया था। नाइक पर निशाना साधते हुए शिरसाट ने छत्रपति संभाजीनगर में कहा, 'वह नवी मुंबई की पहाड़ियाँ या रेत नहीं हैं कि ख़त्म हो जाएँगे। हम हिम्मत से खड़े रहने वाले लोग हैं। शिंदे को कम नहीं आँका जा सकता है।'
शिंदे शिवसेना की प्रवक्ता ज्योति वाघमारे ने कहा कि एकनाथ शिंदे साहब का नामोनिशान मिटाने वाला 'माई का लाल' अभी पैदा नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, 'गणेश नाइक, खबरदार! इसके बाद अगर आपने एकनाथ शिंदे साहब के बारे में एक शब्द भी बोला, तो आपकी बची-खुची इज्जत की धज्जियाँ उड़ जाएंगी।' शिवसेना नेता ने कहा कि इस नाइक के सारे काले धंधे बाहर निकाले बिना हम चुप नहीं बैठेंगे।

यह झगड़ा सिर्फ़ राजनीतिक नहीं है, बल्कि इसमें पुरानी दुश्मनी और व्यक्तिगत रंजिश भी है। दोनों नेता कभी शिवसेना में साथ थे, लेकिन अब अलग-अलग पार्टियों में हैं। महायुति गठबंधन में होने के बावजूद दोनों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है।

पहले शिवसेना के नेता ही थे गणेश नाइक

गणेश नाइक नवी मुंबई के पास बोंकोड़े गांव से आते हैं। नवी मुंबई तेजी से शहर बना, इलाके में इंडस्ट्री आई और मजदूरों की संख्या बढ़ी। नाइक ने किशोरावस्था में ही मजदूर यूनियनों में काम शुरू किया। उन्होंने मजदूरों की समस्याएं सुलझाईं और स्थानीय मुद्दों पर काम किया। 1970 के अंत में नाइक शिवसेना में शामिल हुए।

बीजेपी में कैसे पहुँचे?

1980 के अंत तक नाइक नवी मुंबई में मजबूत हो गए थे। लेकिन तब ठाणे जिले में आनंद दिघे शिवसेना के बड़े नेता थे। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार दोनों के बीच इलाके को लेकर टकराव हुआ। बाल ठाकरे ने बीच-बचाव किया और नवी मुंबई को नाइक का इलाका बताया। 1995 में शिवसेना-बीजेपी सरकार बनी, तो मनोहर जोशी के मंत्रिमंडल में उन्हें मंत्री बनाया गया। उस समय उनका नाम मुख्यमंत्री पद के लिए भी चला। मंत्री रहते हुए नाइक का जोशी और पार्टी लीडरशिप से झगड़ा हो गया। वे खुले में मुख्यमंत्री की आलोचना करते थे, जो शिवसेना में असामान्य था। आखिरकार उन्हें कैबिनेट से हटा दिया गया।

नाइक 1999 में शरद पवार की नई पार्टी एनसीपी में शामिल हुए। उसी साल चुनाव में उन्हें शिवसेना ने हराया, जहाँ आनंद दिघे के नीचे एकनाथ शिंदे उभर रहे थे। 2019 में नाइक बीजेपी में शामिल हो गए और ऐरोली से जीते। 

शिंदे से पुरानी रंजिश के कारण 2019 में बीजेपी-शिवसेना कैबिनेट में नाइक को जगह नहीं मिली। 2024 में देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने तो नाइक को वन मंत्री बनाया गया।

शिंदे-नाइक के बीच झगड़े की वजह

नाइक की शिंदे पर हमला बीजेपी की रणनीति माना जाता है। बीजेपी अपने सहयोगी शिवसेना पर दबाव बनाए रखना चाहती है। नाइक नवी मुंबई में बेहद मज़बूत हैं। वे शिंदे पर निर्भर नहीं हैं और उनके पास पैसे और कॉर्पोरेट कनेक्शन हैं। नाइक को लगता है कि शिंदे उनके इलाके नवी मुंबई में घुसने की कोशिश कर रहे हैं।

हाल ही में नवी मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव में बीजेपी ने नाइक के नेतृत्व में 111 में से 65 सीटें जीतीं। शिंदे की सेना वहां कमजोर रही। नाइक कहते हैं कि अगर बीजेपी उन्हें आजादी दे तो शिंदे की पार्टी का नामोनिशान मिटा सकते हैं।
शिंदे खेमे ने इसका जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी आज सत्ता में है तो सिर्फ उनकी 2022 की बगावत की वजह से। शिवसेना नेताओं ने नाइक को चेतावनी दी है कि वे जवाब देंगे।

यह झगड़ा महायुति गठबंधन में दरार दिखा रहा है। लगता है कि बीजेपी ने अभी नाइक को खुली छूट दी हुई है, लेकिन आगे क्या होगा, यह देखना बाक़ी है।