महाराष्ट्र में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) ने फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन विभाग में ड्रग इंस्पेक्टर, ग्रुप-B पदों के लिए चल रही पूरी भर्ती प्रक्रिया बुधवार 26 अगस्त को रद्द कर दी है। यह फैसला 22 मार्च 2026 को हुई स्क्रीनिंग परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं की प्रारंभिक जांच में सामने आए निष्कर्षों के बाद लिया गया है। आयोग ने अब इस पद के लिए नई परीक्षा कराने का फैसला किया है।
MPSC ने कहा है कि भर्ती प्रक्रिया रद्द करने का उद्देश्य सभी अभ्यर्थियों को समान और निष्पक्ष अवसर देना तथा परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखना है। इसका मतलब यह है कि स्क्रीनिंग परीक्षा पास कर चुके और इंटरव्यू तक पहुंच चुके उम्मीदवारों को भी अब दोबारा परीक्षा देनी होगी।
ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती के लिए विज्ञापन 29 जुलाई 2025 को जारी किया गया था। स्क्रीनिंग परीक्षा 22 मार्च 2026 को महाराष्ट्र के छह संभागीय मुख्यालयों में ऑफलाइन आयोजित की गई थी। परीक्षा का परिणाम 12 जून को घोषित हुआ। इसके बाद 506 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए योग्य पाया गया। इनमें से 488 उम्मीदवारों ने 1 से 22 जुलाई के बीच इंटरव्यू दिया। इंटरव्यू के बाद MPSC ने 488 उम्मीदवारों की अस्थायी सामान्य मेरिट सूची जारी की, जिसमें 485 उम्मीदवार नियुक्ति के लिए योग्य और तीन अयोग्य पाए गए थे। लेकिन इसी बीच परीक्षा को लेकर शिकायतें सामने आने लगीं।
ताज़ा ख़बरें

22 से 26 जुलाई के बीच मिलीं शिकायतें

MPSC के मुताबिक, आयोग को 22 से 26 जुलाई के बीच कुछ अभ्यर्थियों और जनप्रतिनिधियों की ओर से ई-मेल के जरिए शिकायतें मिलीं। आरोप था कि कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र या उसके सवाल मिल गए थे। शिकायतों में यह भी कहा गया कि प्रश्नपत्र या प्रश्नों की सामग्री परीक्षा से पहले सोशल मीडिया और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से प्रसारित की गई थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए MPSC ने 27 जुलाई को मुंबई पुलिस आयुक्त से जांच कराने का अनुरोध किया। इसके बाद मुंबई पुलिस की क्राइम इन्वेस्टिगेशन ब्रांच ने प्रारंभिक जांच की और अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंपी।

जांच में क्या सामने आया?

MPSC के बयान के मुताबिक, पुलिस की प्रारंभिक जांच में प्रथम दृष्टया यह संकेत मिला कि कम से कम एक उम्मीदवार को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र का सेट मिल गया था और उसने उसका लाभ उठाया। इसी निष्कर्ष को गंभीर मानते हुए आयोग ने पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने का फैसला किया। आयोग के अनुसार, अगर परीक्षा की गोपनीयता और निष्पक्षता पर संदेह पैदा हो गया है तो पूरी प्रक्रिया को जारी रखना उम्मीदवारों के साथ न्याय नहीं होगा। इस फैसले से स्क्रीनिंग परीक्षा, उसका परिणाम और उसके बाद हुई इंटरव्यू प्रक्रिया- तीनों प्रभावी रूप से निरस्त हो गए हैं।

उम्मीदवारों को दोबारा आवेदन और फीस नहीं देनी होगी

MPSC ने हालांकि उम्मीदवारों को प्रशासनिक राहत दी है। जो उम्मीदवार नई परीक्षा के लिए पात्र होंगे, उन्हें दोबारा आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी और उनसे परीक्षा शुल्क भी नहीं लिया जाएगा। नई परीक्षा की तारीख और विस्तृत कार्यक्रम बाद में अलग अधिसूचना के जरिए जारी किया जाएगा।

Nandurbar के कोचिंग संचालक पर आरोप

मामले को लेकर राजनीतिक सवाल भी उठ रहे हैं। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) नेता संदीप देशपांडे ने सरकार से पूछा कि यदि पेपर लीक की जानकारी थी तो तत्काल FIR क्यों दर्ज नहीं की गई। उन्होंने दावा किया कि उत्तर महाराष्ट्र के नंदुरबार के एक कोचिंग क्लास संचालक के इस पेपर लीक के पीछे होने की बात सामने आई है। देशपांडे के मुताबिक, उसे नोटिस दिया गया था लेकिन गिरफ्तार नहीं किया गया और बाद में वह फरार हो गया। यह आरोप फिलहाल राजनीतिक नेता के दावे के तौर पर सामने आया है; पुलिस जांच के अंतिम निष्कर्ष का इंतजार है।

महाराष्ट्र में 2026 में कितने पेपर लीक?

MPSC का मामला अलग-थलग घटना नहीं दिखता। उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर 2026 में महाराष्ट्र में कम से कम चार बड़े पेपर लीक/पेपर लीक के आरोप वाले मामले सामने आए हैं। हालांकि इनमें सभी मामलों में जांच की स्थिति एक जैसी नहीं है, इसलिए इन्हें एक ही श्रेणी में रखना उचित नहीं होगा।

महाराष्ट्र बोर्ड SSC गणित पेपर

मार्च में महाराष्ट्र बोर्ड की कक्षा 10 की गणित पार्ट-1 और पार्ट-2 की प्रश्नपत्रिकाएं Telegram चैनल पर परीक्षा से पहले उपलब्ध होने की शिकायत सामने आई। FIR के मुताबिक पार्ट-1 का पेपर 5 मार्च और पार्ट-2 का पेपर 6 मार्च को Telegram चैनल पर साझा किया गया था, जबकि परीक्षाएं क्रमशः 6 और 9 मार्च को हुईं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। हालांकि बोर्ड के कार्यवाहक अध्यक्ष ने यह संभावना भी जताई थी कि यह माता-पिता से पैसे ऐंठने वाला घोटाला हो सकता है।

कक्षा 12 HSC केमिस्ट्री-फिजिक्स मामले

फरवरी में नागपुर में महाराष्ट्र बोर्ड की कक्षा 12 की केमिस्ट्री परीक्षा के दौरान एक छात्र के मोबाइल में परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र मिलने के बाद जांच शुरू हुई। पुलिस ने SIT बनाई और आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई। रिपोर्टों में फिजिक्स के पेपर की सामग्री भी मोबाइल में मिलने की बात सामने आई। हालांकि इस मामले में बोर्ड की ओर से पेपर के वास्तव में लीक होने को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं, इसलिए इसे संदिग्ध पेपर लीक मामला कहना अधिक सावधानीपूर्ण होगा।

महाराष्ट्र TET पेपर लीक

जून में महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) 2026 का पेपर लीक होने के बाद 28 जून को होने वाली परीक्षा स्थगित करनी पड़ी। पुलिस ने Bhiwandi में आरोपियों को पकड़ा और जांच आगे बढ़ी। जांच में कथित मास्टरमाइंड और अन्य आरोपियों की भूमिका सामने आई तथा पुलिस ने इसे बड़े नेटवर्क से जोड़कर भी जांच की। बाद की जांच में यह भी सामने आया कि कथित गिरोह का अगला निशाना असिस्टेंट प्रोफेसर की परीक्षा हो सकती थी।

MPSC ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा

अब अगस्त में MPSC ने ड्रग इंस्पेक्टर ग्रुप-B भर्ती की पूरी प्रक्रिया रद्द कर दी है। यह 22 मार्च की परीक्षा में पेपर पहले मिलने की शिकायतों पर मुंबई पुलिस की प्रारंभिक जांच के बाद हुआ। आयोग के मुताबिक जांच में कम से कम एक उम्मीदवार के परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र हासिल करने और उसका फायदा उठाने का प्रथमदृष्टया संकेत मिला।

NEET को अलग से क्यों देखना चाहिए?

इसके अलावा NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में महाराष्ट्र का महत्वपूर्ण कनेक्शन सामने आया है। CBI की जांच के मुताबिक लीक हुए NEET प्रश्नपत्र महाराष्ट्र से राजस्थान, हरियाणा और केरल तक WhatsApp जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए पहुंचे। CBI ने इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जिनमें महाराष्ट्र के लातूर स्थित कोचिंग संस्थान के संचालक का नाम भी शामिल है।
इसलिए NEET को महाराष्ट्र की एक अलग राज्य-स्तरीय परीक्षा का पेपर लीक गिनना तकनीकी रूप से सही नहीं होगा। लेकिन महाराष्ट्र इस राष्ट्रीय पेपर लीक नेटवर्क की जांच में एक महत्वपूर्ण कड़ी जरूर है।
MPSC के ताजा मामले ने इस संकट को और गंभीर बना दिया है। यहां मामला सिर्फ परीक्षा रद्द होने का नहीं है। सैकड़ों उम्मीदवारों ने महीनों तैयारी की, परीक्षा पास की, इंटरव्यू दिया और नियुक्ति के करीब पहुंचे- लेकिन अब उन्हें पूरी प्रक्रिया फिर से शुरू करनी होगी। आयोग ने उन्हें फीस और दोबारा आवेदन से राहत दी है, लेकिन समय, मेहनत और भर्ती प्रक्रिया पर भरोसे की जो कीमत उम्मीदवारों को चुकानी पड़ रही है, वह कहीं ज्यादा बड़ी है।
महाराष्ट्र सरकार और परीक्षा कराने वाली संस्थाओं के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि पेपर की गोपनीयता परीक्षा केंद्र तक पहुंचने से पहले कैसे सुनिश्चित की जाए और अगर किसी स्तर पर सेंध लगती है तो जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया कितनी तेज और पारदर्शी होगी।