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महाराष्ट्र: क्यों टली सोनिया-पवार के बीच मुलाक़ात?

महाराष्ट्र में पल-पल बदल रही सियासी तसवीर के बीच कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख शरद पवार की रविवार को होने वाली मुलाक़ात टल गयी है। बताया जा रहा है कि अब यह मुलाक़ात सोमवार को होगी। महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के बीच सरकार गठन को लेकर सहमति तो बन गई है लेकिन ऐन मौक़े पर पवार और सोनिया की मुलाक़ात के टलने से सवाल भी खड़े होते हैं। 
महाराष्ट्र के चुनावी नतीजे आने के बाद से ही बीजेपी के साथ मुख्यमंत्री की कुर्सी की लड़ाई लड़ने वाली शिवसेना इस मुद्दे पर अभी तक अड़ी हुई है। वह इस मुद्दे पर बीजेपी के साथ-साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से भी नाता तोड़ चुकी है और केंद्र सरकार में शामिल अपने मंत्री अरविंद सावंत का भी इस्तीफ़ा करवा चुकी है। हालाँकि पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए संघ प्रमुख मोहन भागवत से लेकर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से भी मुलाक़ात की लेकिन कोई हल नहीं निकला। बीजेपी ने कुछ निर्दलीय और छोटी पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाने की कोशिश भी की लेकिन यह कोशिश अंतत: सफल नहीं हुई और फडणवीस को इस्तीफ़ा सौंपना पड़ा। 
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दूसरी ओर, एनसीपी की ओर से पुणे में पार्टी की कोर कमेटी की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में सरकार गठन को लेकर एनसीपी का क्या रुख रहेगा और न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) के मसले पर चर्चा होगी। 

अब सवाल यह खड़ा होता है कि आख़िर सरकार गठन में इतनी देरी क्यों हो रही है। शरद पवार कह चुके हैं कि राज्य में तीनों ही दल मिलकर सरकार बनाएँगे और यह एक स्थिर सरकार होगी जो पूरे 5 साल चलेगी। तो क्या सीएमपी को लेकर एनसीपी और कांग्रेस के बीच कुछ उलझन है?
शरद पवार पहले अपनी पार्टी में सीएमपी को लेकर स्थिति साफ़ कर लेना चाहते हैं, तभी वह कांग्रेस से इस मसले पर बात करेंगे। क्योंकि पवार कह चुके हैं कि कांग्रेस और एनसीपी ने मिलकर चुनाव लड़ा है और बिना कांग्रेस की सहमति के कोई भी फ़ैसला नहीं लिया जाएगा। शिवसेना के साथ सरकार में शामिल होने को लेकर कांग्रेस के भीतर जो शंकाएं थीं, उन्हें दूर करने का काम पवार ने ही किया और उसे सरकार में शामिल होने के लिए राजी भी किया। 

पटेल ने सोनिया को दी जानकारी

सोनिया गाँधी ने कुछ दिन पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, अहमद पटेल और केसी वेणुगोपाल को एनसीपी नेताओं से बात करने के लिए मुंबई भेजा था। बताया जाता है कि वहां से लौटकर अहमद पटेल ने सोनिया गाँधी के सामने पूरी स्थिति साफ़ कर दी है। पटेल ने सीएमपी को लेकर एनसीपी और शिवसेना के रुख के बारे में भी सोनिया गाँधी को बताया है। 

शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के बीच चर्चा के बाद सीएमपी का जो ड्राफ्ट तैयार हुआ है, उसमें 40 बिंदु लिए गए हैं। सीएमपी के ड्राफ्ट में तीनों पार्टियों के चुनावी घोषणा पत्र में शामिल मुद्दों को लिया गया है। इसमें किसानों की कर्जमाफी, बेरोजगारी और महंगाई से निपटने के उपाय, छात्रों की समस्याओं को लिया गया है। इसके साथ ही अल्पसंख्यकों को शिक्षा में 5 फीसदी आरक्षण पर शिवसेना को विरोध न करने के लिए राजी किया गया है। इस मसौदे को सोनिया गाँधी, शरद पवार और उद्धव ठाकरे के पास भेजा जा चुका है। 

महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा है कि सीएमपी के ड्राफ्ट पर सोनिया गाँधी की मंजूरी मिलने के बाद राज्य में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की सरकार बनने का रास्ता साफ़ हो जाएगा।

विवादित मुद्दों से किया परहेज

सीएमपी में विवादित मुद्दों को जगह नहीं दी गई है। इनमें हिंदुत्व, मुसलिम आरक्षण और समान नागरिक संहिता का मुद्दा प्रमुख था। बताया जा रहा है कि शिवसेना के साथ इन तीनों मुद्दों पर कांग्रेस और एनसीपी की सहमति बन गई है। शिवसेना नेता संजय राउत ने विशेषकर हिंदुत्व के मुद्दे पर पार्टी का रुख साफ़ किया है और कहा है कि इस पर कोई टकराव इन दलों के बीच नहीं होगा। लेकिन फिर भी सवाल उठता है कि शरद पवार और सोनिया गाँधी की बैठक क्यों टल गई और पवार ने रविवार को ही अपनी पार्टी की कोर कमेटी की बैठक क्यों बुला ली।

शिवसेना का बनेगा सीएम!

ऐसी अटकलें हैं कि मुख्यमंत्री का पद शिवसेना को देने के साथ ही एनसीपी और कांग्रेस से एक-एक डिप्टी सीएम बनाए जा सकते हैं। सरकार गठन को लेकर शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की पुण्यतिथि यानी 17 नवंबर को कोई बड़ा एलान होने की उम्मीद थी लेकिन अब लगता है कि इसमें कुछ दिन लग सकते हैं। एनसीपी की बैठक के साथ ही शिवसेना ने अपने सभी विधायकों को 17 नवंबर को मुंबई में मौजूद रहने के लिए कहा है। 

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