महायुति गठबंधन में तनाव बढ़ रहा है। शिंदे की शिवसेना ने महापौर पद को लेकर चल रहे विवाद के बीच 29 बीएमसी पार्षदों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है। शिंदे ने मुख्यमंत्री फडणवीस की बैठक में भाग नहीं लिया।
महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में तनाव और गहरा गया है। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने मंगलवार को अचानक अपने 29 बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) पार्षदों का पंजीकरण रद्द कर दिया। इस कदम ने गठबंधन सहयोगी दलों को चौंका दिया। बीजेपी और शिंदे की सेना ने मिलकर बीएमसी चुनाव लड़ा था। नतीजे आए तो बीजेपी सबसे बड़ा दल बनकर उभरी लेकिन अकेले दम पर उसके पास बहुमत नहीं है। शिंदे की शिवसेना के 29 पार्षदों के समर्थन से ही बीएमसी में महायुति का मेयर बन सकता है। लेकिन बीजेपी अपना मेयर चाहती है। बीएमसी मेयर का पद इस बार महिला के रिजर्व है।
इसके साथ ही उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को परेशान करने वाला एक और काम किया है। शिंदे ने बीएमसी पर निर्धारित बैठक और कैबिनेट बैठक में मंगलवार को हिस्सा नहीं लिया। इसके बजाय वे अपने पैतृक गांव डरे (सतारा जिले) पहुंचे और वहां स्थानीय गतिविधियों में शामिल हुए। शिंदे गुट के कई मंत्री भी फडणवीस की अध्यक्षता वाली बैठक से अनुपस्थित रहे।
यह पूरा घटनाक्रम बीएमसी में महत्वपूर्ण पदों के बंटवारे को लेकर असंतोष के कारण हुआ है। शिंदे सेना को लगता है कि महापौर पद, विभिन्न समितियों की अध्यक्षता और अन्य लाभकारी पदों का उचित वितरण नहीं हो रहा। पार्टी ने 'स्प्लिट टर्म' फॉर्मूले का प्रस्ताव रखा था, जिसमें पांच साल के कार्यकाल में पहले ढाई साल के लिए महापौर पद शिवसेना को दिया जाए। यह मांग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आगामी वर्ष में शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी मनाई जा रही है, और पार्टी इसे राजनीतिक व प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण मानती है।
बीएमसी चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जिसने 89 सीटें जीतीं। शिंदे गुट के पास 29 पार्षद हैं, जो गठबंधन को बहुमत दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। महायुति (भाजपा + शिंदे सेना) के पास कुल 118 पार्षद हैं, जो 114 के बहुमत से 4 अधिक है। पार्टी खुद को बीएमसी में 'किंगमेकर' के रूप में पेश कर रही है।
हालांकि दोनों पक्षों ने गठबंधन के मजबूत रहने का दावा किया है और कहा है कि चर्चाएं जारी हैं, लेकिन यह घटनाक्रम महायुति में बढ़ते तनाव की ओर इशारा करता है। भाजपा की ओर से अभी तक इस पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
विपक्षी दल इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, जबकि बीएमसी में महापौर चुनाव फरवरी के पहले सप्ताह में होने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता के बंटवारे पर बातचीत से ही यह विवाद सुलझ सकता है, वरना गठबंधन में और दरार पड़ सकती है।