महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने के मामले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सफाई आई है। सोमवार 24 अगस्त को मुंबई के कई इलाकों में ऑटो ड्राइरों ने विरोध में हड़ताल की थी। गैर-मराठी भाषी चालकों के बीच यह डर फैल गया कि मराठी नहीं बोल पाने पर उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा और उनका लाइसेंस या बैज रद्द किया जा सकता है। इसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि चालकों को मराठी का विशेषज्ञ या धाराप्रवाह वक्ता बनने की जरूरत नहीं है। उन्हें सिर्फ यात्रियों से कामकाज से जुड़ा बुनियादी संवाद करने लायक मराठी जाननी होगी।

तीन दिन की हड़ताल का ऐलान

मुंबई में कुछ ऑटो-रिक्शा चालकों ने मराठी भाषा संबंधी निर्देश के विरोध में तीन दिन की हड़ताल शुरू की। चालकों का कहना है कि वे मराठी सीखने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उम्रदराज और कम पढ़े-लिखे लोगों से अचानक भाषा सीखने और परीक्षा पास करने की अपेक्षा करना व्यावहारिक नहीं है।
एक 60 वर्षीय चालक ने कहा कि अगर इतने साल की उम्र में अचानक मराठी बोलने को कहा जाए तो यह आसान नहीं है। एक अन्य चालक, जिसने बताया कि उसने कभी स्कूल में पढ़ाई नहीं की, ने कहा कि वह टूटी-फूटी मराठी बोलने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसे भी पर्याप्त नहीं माना जा रहा। चालकों ने कथित तौर पर 15,000-20,000 रुपये तक के जुर्माने की आशंका जताई और कहा कि वे अपनी आजीविका को लेकर चिंतित हैं।
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हालांकि, एक ऑटो-टैक्सी यूनियन नेता ने कहा कि किसी प्रमुख यूनियन ने आधिकारिक तौर पर हड़ताल या आंदोलन का आह्वान नहीं किया था। उनके मुताबिक, पश्चिमी मुंबई के उन इलाकों में कुछ समूहों ने प्रदर्शन किया जहां गैर-मराठी भाषी चालकों की संख्या ज्यादा है।

कांदिवली, मलाड, सांताक्रूज और अंधेरी में प्रदर्शन

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कांदिवली, मलाड वेस्ट, सांताक्रूज, दहिसर और अंधेरी समेत कई इलाकों में चालकों के प्रदर्शन दिखाई दिए। बोरीवली आरटीओ के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, चालकों के बीच यह गलत सूचना फैल गई थी कि मराठी का कामकाजी ज्ञान नहीं होने पर 5,000 से 20,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
कांदिवली वेस्ट के लालजीपाड़ा में सुबह करीब 9 बजे चालकों ने रास्ता रोको किया। पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को हटाया। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों द्वारा दूसरे ऑटो, टैक्सी और ऐप-आधारित कैब चालकों को यात्रियों को ले जाने से रोकने के आरोप भी सामने आए। कुछ यात्रियों को वाहनों से उतरने के लिए मजबूर किए जाने और वाहनों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की शिकायतें भी सामने आईं।
प्रदर्शन के कारण सुबह के व्यस्त समय में यात्रियों को परेशानी हुई और मुंबई के कुछ हिस्सों में ऑटो-टैक्सी सेवाएं प्रभावित हुईं। हालांकि, यूनियन नेता के अनुसार दिन के दूसरे हिस्से में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो गई।

सरकार ने क्या नियम बनाया हैः महाराष्ट्र सरकार के 12 अगस्त के शासनादेश के मुताबिक जिन ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों को मराठी का कामकाजी ज्ञान नहीं है, उन्हें पहले एक महीने का नोटिस दिया जाना है ताकि वे भाषा सीख सकें। इस अवधि के खत्म होने से पहले उनके खिलाफ लाइसेंस संबंधी कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने साफ कहा कि यदि कोई आरटीओ अधिकारी एक महीने की निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले चालक पर गलत तरीके से जुर्माना लगाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सरनाईक के मुताबिक, एक महीने की अवधि के बाद भी अगर चालक आवश्यक मराठी ज्ञान हासिल नहीं करता है तो उसका लाइसेंस और बैज निलंबित किया जा सकता है। इसके बाद उसे मराठी सीखने के लिए तीन महीने और दिए जाएंगे। इसके बावजूद नियम का पालन नहीं करने पर लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, जानबूझकर मराठी सीखने से इनकार करने वाले चालकों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

1,268 और फिर 1,499 चालकों को नोटिस

आरटीओ ने 20 अगस्त को मराठी का पर्याप्त ज्ञान नहीं होने के कारण 1,268 कमर्शियल पैसेंजर वाहन चालकों, मुख्य रूप से ऑटो और टैक्सी चालकों, को नोटिस जारी किए थे। इसके अगले दिन महाराष्ट्र भर में 1,499 गैर-मराठी भाषी चालकों को नोटिस दिए गए। परिवहन मंत्री सरनाईक ने यह भी बताया कि अब तक 1,65,600 गैर-मराठी ऑटो और टैक्सी चालकों ने मराठी की कक्षाओं में हिस्सा लिया है। सरकार का तर्क है कि भाषा का उद्देश्य चालकों और यात्रियों के बीच बुनियादी संवाद सुनिश्चित करना है।

संजय निरुपम ने जुर्माने पर सवाल उठाए

विवाद बढ़ने के बाद शिवसेना नेता संजय निरुपम ने परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक से मुलाकात कर चालकों पर जुर्माना रोकने की मांग की। निरुपम ने आरोप लगाया कि कुछ चालकों को निर्धारित एक महीने का समय दिए बिना ही कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ मामलों में 25,000 रुपये तक के जुर्माने की बात सामने आई है।

फडणवीस ने कहा- मराठी का प्रोफेसर बनना जरूरी नहीं

विरोध के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पूरे विवाद को शांत करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ऑटो और टैक्सी चालकों को मराठी भाषा का विशेषज्ञ बनाना नहीं है। फडणवीस के मुताबिक, चालकों को सिर्फ कामकाज से संबंधित बुनियादी मराठी आनी चाहिए, ताकि वे स्थानीय यात्रियों से आवश्यक बातचीत कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार भाषा के आधार पर किसी के साथ अन्याय नहीं होने देगी और जरूरत पड़ने पर चालकों को मराठी सीखने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक किसी चालक का लाइसेंस रद्द नहीं किया गया है। उनके मुताबिक, नियम का उद्देश्य मराठी भाषा, संस्कृति और पहचान को बढ़ावा देने के साथ-साथ यात्रियों और चालकों के बीच बुनियादी संवाद सुनिश्चित करना है।

असली विवाद क्या है?

पूरे विवाद में दो बातें एक साथ सामने आ रही हैं। सरकार का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन से जुड़े चालकों को स्थानीय यात्रियों से संवाद करने के लिए बुनियादी मराठी आना जरूरी है और उन्हें इसके लिए समय भी दिया जा रहा है। दूसरी ओर, गैर-मराठी भाषी चालक आशंकित हैं कि भाषा संबंधी नियम उनके रोजगार और लाइसेंस पर असर डाल सकता है।
सोमवार को फैली जुर्माने की अफवाहों ने इस आशंका को और बढ़ा दिया। फडणवीस और सरनाईक की सफाई के बाद सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि तुरंत भारी जुर्माना लगाने की कोई व्यवस्था नहीं है और निर्धारित अवधि से पहले कार्रवाई करने वाले आरटीओ अधिकारियों के खिलाफ ही कदम उठाया जाएगा।
फिलहाल मुंबई में मराठी भाषा का यह नियम सिर्फ भाषाई नीति का मुद्दा नहीं रह गया है। यह प्रवासी और गैर-मराठी भाषी कामगारों की रोजी-रोटी, मुंबई की बहुभाषी सामाजिक संरचना और महाराष्ट्र की क्षेत्रीय भाषा की पहचान—तीनों से जुड़ा विवाद बन गया है। सरकार की ताजा सफाई के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बुनियादी मराठी की व्यावहारिक जांच कैसे होती है और नियम लागू करते समय चालकों को कितना समय और प्रशिक्षण दिया जाता है।