आंतरिक मतभेद और बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच एनसीपी दोहरी चुनौतियों से जूझ रही है। क्या सुनेत्रा पवार पार्टी को नई दिशा देकर संकट से बाहर निकाल पाएँगी?
अजित गुट वाली एनसीपी के सामने क्या बड़ा मुश्किल दौर आ गया है? इस खेमे के मंत्रियों पर एक के बाद एक भ्रष्टाचार के मामले में तो कार्रवाई से परेशानी बढ़ी ही है, शरद पवार वाले खेमे के साथ मर्जर का दबाव भी है। तो पार्टी के सामने दोहरी परेशानी है- एक महायुति और दूसरी पार्टी के अंदर की राजनीति की। सुनेत्रा पवार इससे कैसे पार पाएँगी?
महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के सामने अभी-अभी नई जिम्मेदारी मिली है, लेकिन चुनौतियां पहले से ही शुरू हो गई हैं। उनके पति और एनसीपी के बड़े नेता अजित पवार के निधन के बाद जनवरी के अंत में सुनेत्रा को उपमुख्यमंत्री बनाया गया। वे महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनीं।
सुनेत्रा अभी सरकारी कामकाज समझ रही हैं। उनके पति अजित पवार के पास जो विभाग थे, अब वे संभाल रही हैं। लेकिन ठीक इसी समय एनसीपी के वरिष्ठ मंत्री नरहरी जिरवाल के विभाग फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन में भ्रष्टाचार का केस आ गया। एंटी-करप्शन ब्यूरो यानी एसीबी ने गुरुवार को मंत्रालय में एक क्लर्क को रिश्वत लेते पकड़ा। आरोप है कि क्लर्क राजेंद्र धेरंगे ने एक मेडिकल स्टोर के लाइसेंस रिन्यू करने के लिए 50000 रुपये मांगे थे। 35000 रुपये लेते हुए उन्हें गिरफ्तार किया गया और ऑफिस सील कर दिया गया।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार लेकिन जिरवाल ने कहा, 'मेरा इसमें कोई रोल नहीं है। अगर जांच में मेरा कोई लिंक निकला तो मैं इस्तीफा दे दूंगा।' वे दिल्ली में थे जब यह घटना हुई। कांग्रेस ने इस पर हमला बोला और सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अच्छे प्रशासन और पारदर्शिता की बात कर रहे हैं, लेकिन मंत्रालय में ऐसा केस आने से महायुति गठबंधन को शर्मिंदगी हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार महायुति के एक बड़े मंत्री ने कहा कि सरकार के कई विभागों में रिश्वत की आदत गहरी है। इसे रोकने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और लोगों की भागीदारी चाहिए।
एनसीपी में पहले भी ऐसे विवाद हुए हैं। पिछले साल अजित पवार ने दो मंत्रियों को हटाया था। बीड़ सरपंच हत्याकांड मामले में नाम आने पर धनंजय मुंडे को और 1995 के हाउसिंग स्कैम में दोषी पाए गए माणिकराव कोकाटे को। लेकिन एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के कुछ मंत्रियों पर आरोप लगने पर भी कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। फडणवीस ने कहा कि अच्छे शासन पर फैसला सामूहिक होगा। बजट सेशन के बाद मंत्रियों के विभागों में बदलाव हो सकता है।
एनसीपी में नया अध्यक्ष और मर्जर की बात
अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी में अध्यक्ष कौन बनेगा, इस पर सवाल थे। हाल ही में पार्टी के वर्किंग प्रेसिडेंट प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि सुनेत्रा पवार ही एकमात्र उम्मीदवार हैं। दो हफ्ते में उन्हें अध्यक्ष बनाया जाएगा।
लेकिन शरद पवार गुट (एनसीपी एसपी) के साथ मर्जर की बात चल रही है। कुछ एनसीपी एसपी नेता कहते हैं कि अजित पवार मर्जर चाहते थे और वे ही नई पार्टी के नेता बनते। लेकिन अजित के निधन के बाद स्थिति बदल गई। एनसीपी के सुनील तटकरे ने कहा कि कोई मर्जर प्रस्ताव नहीं आया। अजित ने बीजेपी के साथ गठबंधन चुना था क्योंकि विकास सरकार में रहकर ही होता है।
अंग्रेज़ी अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार एनसीपी के अंदरूनी सूत्र कहते हैं कि मर्जर अभी पीछे छूट गया है। बीजेपी ने कहा कि सुनेत्रा एनसीपी को अच्छे से चला सकती हैं। बीजेपी उनके साथ है। शिवसेना यूबीटी के संजय राउत ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वे सहयोगियों को इस्तेमाल कर फेंक देते हैं।
सुनेत्रा की स्थिति
सुनेत्रा के पास राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव कम है, लेकिन वे शांत और मजबूत हैं। कई लोग उनकी दृढ़ता से हैरान हैं। वे एनसीपी को आगे ले जाने और महायुति में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन भ्रष्टाचार के केस और मर्जर की बहस से उनके सामने चुनौतियाँ भी आ गई हैं।
आने वाले दिनों में बजट सेशन और पार्टी के फैसले अहम होंगे। सुनेत्रा पवार के लिए यह समय मुश्किल है, लेकिन वे अजित पवार की विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन सवाल वही है कि क्या वह ऐसा कर पाएँगी?