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परमबीर सिंह के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आप हाई कोर्ट जाइए

महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर गंभीर आरोप लगाने वाले मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने परमबीर सिंह की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी से कहा कि वे इस मामले को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट जाएं। अदालत ने यह भी कहा कि याचिका में अनिल देशमुख को पक्षकार क्यों नहीं बनाया गया। मुकुल रोहतगी आज ही बॉम्बे हाई कोर्ट का रूख़ करेंगे। 

अदालत ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है और हम इसे ध्यान में रखेंगे। अदालत ने कहा कि अनुच्छेद 226 में काफी शक्तियां हैं। अगर आप चाहते हैं कि कोई जांच एजेंसी इसकी जांच करे तो हाई कोर्ट यह कर सकता है। कुल मिलाकर अदालत ने इसमें ज़्यादा दख़ल देने से इनकार कर दिया। 

परमबीर सिंह ने याचिका में अपने ट्रांसफ़र को चुनौती दी है। परमबीर सिंह को कमिश्नर पद से हटाकर डीजी, होमगार्ड बना दिया गया था। 

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परमबीर सिंह ने आरोप लगाया था कि अनिल देशमुख चाहते थे कि पुलिस अधिकारी सचिन वाजे मुंबई में होटल और बार से उनके लिए हर महीने 100 करोड़ रुपये की वसूली करें। उनके इस आरोप के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आ गया था। हालांकि देशमुख ने इन आरोपों को पूरी तरह ग़लत बताया था। 

पूर्व कमिश्नर ने याचिका में मांग की है कि अदालत इंटेलिजेंस विभाग की कमिश्नर रश्मि शुक्ला की रिपोर्ट पर सीबीआई जांच का निर्देश दे। 

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इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मुंबई में ट्रांसफर-पोस्टिंग के गोरखधंधे को रश्मि शुक्ला ने ट्रैप किया था और ठाकरे सरकार को रिपोर्ट भेजी थी। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि ठाकरे सरकार ने आरोपियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के बजाय उन्हें उनकी मनमाफिक पोस्टिंग और ट्रांसफर दे दिया। देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले को लेकर मंगलवार शाम को केंद्रीय गृह सचिव से मुलाकात की थी और सीबीआई से जांच कराने की भी मांग की थी। 

कहां थे अनिल देशमुख?

इस मामले में पेच दो बातों पर अटका हुआ है। पहली यह कि क्या सचिन वाजे की देशमुख से मुलाक़ात हुई थी या नहीं। इसके अलावा देशमुख 15 से 27 फरवरी तक होम क्वारेंटीन थे या नहीं, इसे लेकर भी भ्रम बना हुआ है। 

एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने सोमवार को कहा था कि 5 से 15 फरवरी तक अनिल देशमुख कोरोना संक्रमण के कारण नागपुर के अस्पताल में भर्ती थे और 16 से 27 फ़रवरी तक वह घर में आइसोलेट थे। लेकिन बीजेपी की आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने 15 फ़रवरी को अनिल देशमुख की प्रेस कॉन्फ्रेन्स का एक वीडियो री ट्वीट किया था और कहा था कि पवार ने इस मामले में झूठ बोला है।

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मंगलवार को देशमुख ने एक वीडियो जारी कर कहा है कि उन्हें कोरोना हुआ था और वह 5 से लेकर 15 फ़रवरी तक नागपुर के एक अस्पताल में भर्ती थे। महाराष्ट्र के गृह मंत्री ने कहा था, “15 फ़रवरी को डिस्चार्ज के बाद जब मैं अस्पताल के नीचे गेट पर पहुंचा तो वहां काफी पत्रकार खड़े थे, कोरोना के कारण मैं कमजोरी महसूस कर रहा था और मैंने वहीं कुर्सी पर बैठकर उनके जवाब दिए। इसके बाद मैं 27 फ़रवरी तक होम क्वारेंटीन हो गया और 28 फ़रवरी को घर से बाहर निकला।” 

फडणवीस आए सामने 

लेकिन तभी फडणवीस सामने आए थे और उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेन्स में दावा किया कि शरद पवार को ग़लत जानकारी दी गई थी। फडणवीस ने कहा कि देशमुख 17 फ़रवरी को सहयादरी गेस्ट हाउस और 24 फ़रवरी को अपने मंत्रालय गये थे। उन्होंने कहा कि देशमुख 15 से 27 फरवरी के बीच होम क्वारेंटीन थे लेकिन इस दौरान भी उन्होंने अफ़सरों से मुलाक़ात की थी। 

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